भूमिगत जल में ज़हर घोलता प्रदूषित पानी और इंदौर जैसी घटनाएँ जनस्वास्थ्य के लिए गंभीर चेतावनी : के के गुप्ता

Polluted water poisoning groundwater and incidents like Indore are a serious warning for public health: K.K. Gupta

  • के के गुप्ता ने सरकार और न्यायालय से मीडिया में छपी जल प्रदूषित खबरों पर स्वतःसंज्ञान लेकर दोषियों के विरुद्ध सख्त कार्यवाही की मांग
  • जल प्रदूषण से मुक्त होने डूंगरपुर मॉडल को अपनाया जाए

नीति गोपेन्द्र भट्ट

नई दिल्ली/जयपुर/उदयपुर : राजस्थान के स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) के समन्वयक के के गुप्ता ने केन्द्र और राज्य सरकारों एवं न्यायालयों से भूमिगत जल में ज़हर घुलते प्रदूषित पानी से सैकड़ो लोगों के मरने की इंदौर जैसी घटनाओं को जनस्वास्थ्य के लिए गंभीर चेतावनी और जघन्य अपराध मानते हुए स्वतः संज्ञान लेकर दोषी अधिकारियों के विरुद्ध सख्त कार्यवाही सुनिश्चित करने की मांग रखी है।

गुप्ता ने कहा कि देश के कई शहरों और कस्बों में धरती के भीतर केमिकल युक्त प्रदूषित पानी का लगातार प्रवेश एक गंभीर पर्यावरणीय और जनस्वास्थ्य संकट बनता जा रहा है। औद्योगिक कचरे, वर्षा जल के साथ बहकर आने वाले ठोस-तरल अपशिष्ट और बिना शोधन छोड़े जा रहे सीवरेज के गंदे पानी ने भूजल को जहरीला कर दिया है। मध्यप्रदेश के इंदौर सहित देश के अनेक हिस्सों में सामने आई घटनाएँ इस बात की चेतावनी हैं कि यदि अभी सख्त कदम नहीं उठाए गए तो आने वाली पीढ़ियों के लिए स्वच्छ जल केवल कागज़ी नारा बनकर रह जाएगा।

उन्होंने कहा कि स्वच्छता के लिए पूरे देश में पिछलें कई वर्षों से प्रथम रहने वाले इंदौर में दूषित पानी से लोगों का मरना इस नगर के माथें पर लगा एक कलंक है जिसे धोने के लिए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को ऐसी सख़्त कार्यवाही करनी चाहिए कि आयन्दा देश में ऐसा अपराध करने वाले लोगों की रूह तक काँप जाए।

गुप्ता ने बताया कि आज हम देख रहे है निकायों द्वारा कचरा यार्डो में गंदगी के ढेर लगा रखे है जहाँ मरे हुए जानवरों को भी खुले में डाला जा रहा है। जब वर्षा आती है उस कचरे के ढेर पर पानी पड़ता है जो केमिकल्स युक्त बन जाता है। धीरे-धीरे धरती में जाकर आस पास की धरती का पानी प्रदूषित कर देता है,वही अधिकारियो द्वारा कचरे निस्तारण वैज्ञानिक ढंग से कागजो में बताकर रात के अँधेरे में कचरे में आग लगवाकर कचरे का निस्तारण कर देते है। वही आस पास रहने वाले आमजन का इस पीड़ा से जीना दुर्लभ हो रहा है यह केवल धरती के जल को ही प्रदूषित नहीं कर रहे है अपितु वायु प्रदूषण भी कर रहे जो जानलेवा है।यह स्पष्ट है कि औद्योगिक इकाइयों से निकलने वाला रासायनिक अपशिष्ट, नगर निकायों द्वारा वैज्ञानिक ढंग से निस्तारण न किया गया कचरा और खुले नालों-नालियों से बहता सीवरेज वर्षा के समय जमीन में समा जाता है। इससे मिट्टी की परतों से छनकर वही प्रदूषित पानी एक्विफर तक पहुँचता है, जो वर्षों बाद हैंडपंपों और ट्यूबवेलों के जरिए पीने के पानी के रूप में लोगों तक लौटता है। इंदौर में हाल के वर्षों में भूजल में भारी धातुओं, नाइट्रेट और हानिकारक रसायनों की मात्रा बढ़ने की रिपोर्टें इसी खतरनाक चक्र की ओर इशारा करती हैं।गुप्ता ने कहा कि ऐसा दूषित भूजल लंबे समय तक उपयोग में रहने से कैंसर, किडनी और लीवर की बीमारियाँ, त्वचा रोग, बच्चों में जन्मजात विकृतियाँ और पाचन तंत्र से जुड़ी गंभीर समस्याएँ बढ़ सकती हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में जहाँ लोग आज भी भूजल पर निर्भर हैं, वहाँ यह खतरा और भी गहरा है। विडंबना यह है कि कई स्थानों पर दूषित पानी की जानकारी होने के बावजूद वैकल्पिक स्वच्छ जल व्यवस्था समय पर नहीं की जाती।

गुप्ता ने कहा कि यह स्थिति केवल प्राकृतिक नहीं, बल्कि प्रशासनिक लापरवाही और जवाबदेही के अभाव का परिणाम है। ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम, जल (प्रदूषण निवारण एवं नियंत्रण) अधिनियम और पर्यावरण संरक्षण अधिनियम जैसे कड़े कानून मौजूद हैं, लेकिन उनके क्रियान्वयन में ढिलाई बरती जाती है। कई औद्योगिक इकाइयाँ बिना पूर्ण शोधन संयंत्र चलाए धरती पर अपशिष्ट छोड़ देती हैं। सामाजिक संगठनों और पर्यावरण कार्यकर्ताओं की मांग है कि सरकार और न्यायालय इस पूरे मुद्दे पर स्वतः संज्ञान लें। दोषीयों और जिम्मेदारो के खिलाफ सख्त दंडात्मक कार्रवाई हो, ताकि यह संदेश जाए कि जल स्रोतों से खिलवाड़ अब बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

उन्होंने बताया कि दक्षिणी राजस्थान के ऐतिहासिक डूंगरपुर में उनके नगरपरिषद चेयरमैन के कार्यकाल में घरों में वर्षा पानी को वाटर हार्वेस्टिंग के माध्यम से धरती में डालने के कार्य से न केवल धरती का जल स्तर बढ़ा अपितु पानी में वर्षा पानी मिलने से टी.डी.एस.की मात्रा जो पहले 800 के करीब थी वह बाद में 500 हो गई। आज देश में शहरी क्षेत्रो में वाटर हार्वेस्टिंग हेतु निकायों द्वारा निर्माण स्वीकृति के पूर्व राशि ली जाती है परन्तु “वाटर हार्वेस्टिंग” न करवाने से आज निगमों में करोडो रुपया जल के नाम से जमा पड़ा है जिसे सख्ती के साथ लागू किया जाना आवश्यक है अन्यथा शहरो में भारी जल संकट आने की संभावनाए बन रही है वाटर हार्वेस्टिंग से हैंडपंपों के रिचार्जिंग तथा नगर में कई आरओ प्लांट लगाने के परिणाम अद्भुत रहे है। इसी तर्ज पर देश के हर शहर में काम किए जाने की जरूरत है। साथ ही पानी की गुणवत्ता जांचने का मापदण्ड टी डी एस की भी समय समय पर जांच कराई जानी चाहिए क्योंकि गंदा और प्रदूषित पानी ही हर बीमारी की जड़ है ।

गुप्ता ने बताया कि डूंगरपुर मॉडल को देखने और अध्ययन के लिए तत्कालीन दिल्ली सरकार और अन्य स्थानों की टीमें भी डूंगरपुर आई थी तथा 04 दिसम्बर 2023 को संसद में भी डूंगरपुर जल संचय एवं जल संरक्षण की चर्चा हुई थी। उन्होंने कहा कि स्कूल-कॉलेजों और समाज में जल संरक्षण व प्रदूषण के दुष्परिणामों पर जागरूकता अभियान चलाए जाने चाहिए।गुप्ता ने कहा कि धरती के भीतर जा रहा प्रदूषित पानी केवल एक शहर या राज्य की समस्या नहीं, बल्कि राष्ट्रीय संकट है। यदि आज सरकार और न्यायालय कठोर रुख अपनाकर दोषियों पर दंडात्मक कार्रवाई करते हैं, तो न केवल इंदौर जैसी घटनाओं पर लगाम लगेगी, बल्कि देश के अमूल्य जल संसाधनों को भी बचाया जा सकेगा। स्वच्छ जल जीवन का अधिकार है और इसकी रक्षा में किसी भी स्तर की लापरवाही को अब अपराध माना जाना चाहिए। साथ ही प्रदूषण से मुक्त होने के लिए डूंगरपुर मॉडल को अपनाया जाए।