राष्ट्रमंडल देशों के अध्यक्षों और पीठासीन अधिकारियों के 28वें सम्मेलन में प्रधानमंत्री का धारदार और प्रभावशाली भाषण

Prime Minister's sharp and powerful speech at the 28th Commonwealth Speakers and Presiding Officers Conference

राजस्थान करेगा विदेशी मेहमानों की मेजबानी

गोपेन्द्र नाथ भट्ट

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने गुरुवार को नई दिल्ली में संसद के संविधान सदन के केंद्रीय कक्ष में राष्ट्रमंडल देशों के लोकसभा अध्यक्षों और पीठासीन अधिकारियों के 28वें सम्मेलन (सीएसपीओसी) का उद्घाटन करते हुए हिन्दी और अंग्रेजी में ऐसा धारा प्रवाह भाषण दिया कि विदेशों से आए मेहमानों ने न केवल उसे मंत्रमुग्ध होकर सुना वरन कई बार करतल ध्वनि से उसे सराहा भी । इस अवसर पर लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला, राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश, अंतर संसदीय संघ के अध्यक्ष डॉ. तुलिया एकसन, राष्ट्रमंडल संसदीय संघ के अध्यक्ष डॉ. क्रिस्टोफर कलीला सहित केन्द्रीय मंत्रिपरिषद के सदस्यगण,राज्यों के विधानसभाध्यक्ष सहित अन्य गणमान्य व्यक्ति भी उपस्थित थे। राजस्थान के विधानसभाध्यक्ष वासुदेव देवनानी ने भी उद्घाटन कार्यक्रम में भाग लिया।

इस दो दिवसीय सम्मेलन की अध्यक्षता लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला कर रहे हैं। इसमें दुनिया के विभिन्न हिस्सों से 42 राष्ट्रमंडल देशों और 4 अर्ध-स्वायत्त संसदों के 61 अध्यक्ष और पीठासीन अधिकारी भाग ले रहे हैं।
राष्ट्रमंडल देशों के अध्यक्षों और पीठासीन अधिकारियों का यह सम्मेलन चौथी बार भारत में आयोजित किया जा रहा है।

प्रधानमंत्री मोदी ने अपने धारदार उद्घाटन भाषण में कहा कि भारत विश्व का सबसे बड़ा लोकतंत्र इसलिए है कि क्योंकि यहां जनता सर्वोपरि है। भारत में लोकतंत्र का अर्थ है अंतिम व्यक्ति तक लाभ पहुंचाना। हाल के वर्षों में 25 करोड़ लोग गरीबी से बाहर निकले हैं। उन्होंने कहा कि भारत में लोकतंत्र सफल है क्योंकि भारत की जनता का इसमें विश्वास है। उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक भावना भारत की रगों और मन में बसी है।मोदी ने कोविड-19 महामारी का उदाहरण दिया, जब पूरी दुनिया इस महामारी से जूझ रही थी। देश के भीतर चुनौतियों के बावजूद, भारत ने 150 से अधिक देशों को दवाएं और टीके उपलब्ध कराए। भारत के लोकतंत्र का पैमाना वास्तव में असाधारण है। 2024 में हुए आम चुनावों का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि ये मानव इतिहास का सबसे बड़ा लोकतांत्रिक चुनाव था। लगभग 98 करोड़ नागरिकों ने मतदान के लिए पंजीकरण कराया था, जो कुछ महाद्वीपों की जनसंख्या से भी अधिक है। उन्होंने बताया कि 8,000 से अधिक उम्मीदवार और 700 से अधिक राजनीतिक दल चुनाव लड़ रहे थे और इन चुनावों में महिला मतदाताओं की रिकॉर्ड भागीदारी भी देखी गई। प्रधानमंत्री ने कहा कि आज भारतीय महिलाएं मतदान में न केवल भाग ले रही हैं बल्कि नेतृत्व भी कर रही हैं। उन्होंने बताया कि भारत की राष्ट्रपति, जो देश की सर्वोच्च नागरिक हैं, एक महिला हैं और दिल्ली की मुख्यमंत्री भी एक महिला हैं, जहां यह सम्मेलन आयोजित हो रहा है। ग्रामीण और स्थानीय सरकारी निकायों में लगभग 15 लाख निर्वाचित महिला प्रतिनिधि हैं, यह जमीनी स्तर के नेताओं का लगभग 50 प्रतिशत है, जो विश्व स्तर पर अद्वितीय है। भारत में सैकड़ों भाषाएं बोली जाती हैं, विभिन्न भाषाओं में 900 से अधिक टेलीविजन चैनल हैं और हजारों समाचार पत्र और पत्रिकाएं प्रकाशित होती हैं। भारत इस विविधता का जश्न मनाता है क्योंकि यहां के लोकतंत्र की नींव मजबूत है। भारत को लोकतंत्र की जननी कहा जाता है। भारत के 5,000 वर्ष से अधिक पुराने पवित्र ग्रंथों और वेदों में उन सभाओं का उल्लेख है जहां लोग मुद्दों पर चर्चा करने और विचार-विमर्श एवं सहमति के बाद निर्णय लेने के लिए एकत्रित होते थे। भारत भगवान बुद्ध की भूमि है, जहां बौद्ध संघ खुली और सुनियोजित चर्चाएं करता था और सर्वसम्मति या मतदान के माध्यम से निर्णय लिए जाते थे। उन्होंने तमिलनाडु के एक 10वीं शताब्दी के शिलालेख का भी उल्लेख किया जिसमें एक ग्राम सभा का वर्णन है जो लोकतांत्रिक मूल्यों पर काम करती थी।

प्रधानमंत्री मोदी ने सम्मेलन के मुख्य विषय ‘संसदीय लोकतंत्र का प्रभावी क्रियान्वयन’ पर भी विस्तार से प्रकाश डाला। मोदी ने याद दिलाया कि जब भारत को आजादी मिली थी, तब यह आशंका व्यक्त की गई थी कि इतनी विविधता वाले देश में लोकतंत्र टिक नहीं पाएगा लेकिन भारत ने इसी विविधता को अपने लोकतंत्र की ताकत बना लिया है। एक और बड़ी चिंता यह भी थी कि यदि किसी तरह भारत में लोकतंत्र कायम भी रह जाए, तो विकास संभव नहीं होगा। प्रधानमंत्री ने कहा, “भारत ने यह सिद्ध कर दिया है कि लोकतांत्रिक संस्थाएं और लोकतांत्रिक प्रक्रियाएं लोकतंत्र को स्थायित्व, गति और व्यापकता प्रदान करती हैं।” आज भारत विश्व की सबसे तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्था है, भारत में यूपीआई के माध्यम से विश्व की सबसे बड़ी डिजिटल भुगतान प्रणाली है, भारत सबसे बड़ा वैक्सीन उत्पादक, दूसरा सबसे बड़ा इस्पात उत्पादक, तीसरा सबसे बड़ा स्टार्टअप परितंत्र, तीसरा सबसे बड़ा विमानन बाजार, चौथा सबसे बड़ा रेलवे नेटवर्क, तीसरा सबसे बड़ा मेट्रो रेल नेटवर्क, सबसे बड़ा दूध उत्पादक और दूसरा सबसे बड़ा चावल उत्पादक देश है। समय-समय पर भारत के लोकतांत्रिक मूल्यों को कसौटी पर परखा गया है, विविधता ने इन्हें सहारा दिया है और पीढ़ी दर पीढ़ी ये मजबूत होते गए हैं।

इस अवसर पर मोदी ने संसदीय लोकतंत्र में अध्यक्ष की भूमिका पर चुटकी भी ली और कहा कि स्पीकर को बोलने का अधिक अवसर नहीं मिलता, लेकिन उनकी जिम्मेदारी दूसरों की बात सुनने और यह सुनिश्चित करने में निहित है कि सभी को अपनी बात कहने का मौका मिले। उन्होंने कहा कि धैर्य अध्यक्षों का सबसे अद्वितीय आम गुण है, जो शोर मचाने वाले और अति उत्साही सांसदों को भी मुस्कुराते हुए संभाल लेते हैं। मोदी ने कहा कि राष्ट्रमंडल की कुल जनसंख्या का लगभग 50 प्रतिशत हिस्सा भारत में रहता है। भारत ने सभी देशों के विकास में यथासंभव योगदान देने का निरंतर प्रयास किया है।प्रधानमंत्री ने कहा कि ऐसे समय में जब दुनिया अभूतपूर्व बदलाव से गुजर रही है, यह विकासशील देशों के लिए नए रास्ते तलाशने का भी सही समय है। उन्होंने कहा कि भारत हर वैश्विक मंच पर विकासशील देशों की चिंताओं को मजबूती से उठा रहा है।मोदी ने बताया कि इस सम्मेलन का प्रमुख उद्देश्य संसदीय लोकतंत्र के ज्ञान और समझ को बढ़ावा देने के विभिन्न तरीकों का पता लगाना है। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि इस प्रयास में अध्यक्ष और पीठासीन अधिकारियों दोनों की महत्वपूर्ण भूमिका है, क्योंकि इससे लोग अपने देश की लोकतांत्रिक प्रक्रिया से अधिक निकटता से जुड़ पाते हैं। उन्होंने कहा कि भारतीय संसद पहले से ही इस तरह की पहल कर रही है।

उल्लेखनीय है कि इस सम्मेलन में समकालीन संसदीय मुद्दों की एक विस्तृत श्रृंखला पर विचार-विमर्श होगा, जिसमें मजबूत लोकतांत्रिक संस्थानों को बनाए रखने में अध्यक्षों और पीठासीन अधिकारियों की भूमिका, संसदीय कामकाज में आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस का उपयोग, सांसदों पर सोशल मीडिया का प्रभाव, संसद की सार्वजनिक समझ को बढ़ाने के लिए अभिनव रणनीतियां और मतदान से परे नागरिक भागीदारी आदि शामिल हैं।

सम्मेलन की समाप्ति पर सभी विदेशी मेहमान शनिवार 17 जनवरी को जयपुर भ्रमण पर जायेंगे जहां राजस्थान सरकार और राज्य विधानसभा की ओर से मेजबानी कर पारम्परिक ढंग से उनका स्वागत सत्कार किया जाएगा। राजस्थान विधानसभाध्यक्ष वासुदेव देवनानी शनिवार शाम को कांस्टीट्यूशन क्लब ऑफ राजस्थान में सभी डेलीगेट्स के सम्मान में रात्री भोज देने जिसमें लोकसभाध्यक्ष ओम बिरला, राजस्थान के राज्यपाल हरिभाऊ बागड़े, मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा,और राज्य मंत्रिपरिषद के सदस्य,नेता प्रतिपक्ष आदि भाग लेंगे। इस अवसर पर पर्यटन विभाग के द्वारा राजस्थानी सांस्कृतिक संध्या का आयोजन भी किया जाएगा।