प्रदर्शन, सुप्रीम कोर्ट में याचिका, यूजीसी के नए नियम पर क्यों हो रहा घमासान

Protests, petition in Supreme Court, why is there a ruckus over the new UGC rule?

प्रदीप शर्मा

इन दिनों देशभर में UGC के नए नियम को लेकर भारी विवाद चल रहा है। पहले सोशल मीडिया पर विरोध में UGC Rolle back ट्रेंड होने लगा। फिर मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा और इसे भेदभाव बढ़ाने वाला बताया गया, तो वहीं बरेली के सिटी मजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री ने इस बदलाव का विरोध करते हुए इस्तीफा दे दिया। ऐसे में सवाल ये खड़ा होता है कि आखिर UGC ने कौन से नियम बनाए हैं और टीचर्स, स्टूडेंट्स और आम लोग इसमें क्यों नाराज हैं।

UGC ने 13 जनवरी, 2026 को नया नियम लागू किया, जिसका नाम है- “Promotion of Equity in Higher Education Institutions Regulations 2026″। इसका उद्देश्य बताया गया है कि उच्च शिक्षा संस्थानों में जातिगत भेदभाव और असमानता को रोकना। सभी विश्वविद्यालय और कॉलेज Equity Center, Equity Squad और Equity Committee बनाएंगे। इसी के साथ ही 24×7 हेल्पलाइन का प्रावधान होगा। अगर कोई भी संस्थान इन नियमों का पालन नहीं करती है तो UGC उनकी मान्यताओं को रद्द कर सकता है या फिर फंड पर रोक लगा सकता है।

UGC ने जानकारी देते हुए कहा कि पिछड़ी जातियों, अनुसूचित जातियों और जनजातियों के खिलाफ शिकायतों में 2020 से 2025 के बीच 100% से ज्यादा वृद्धि हुई है। इसके अलावा रोहित वेमुला और पायल तड़वी जैसे मामलों में सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणियों को ध्यान में रखते हुए यह नियम बनाया गया है।

बता दें कि नियम के कुछ सेक्शन विशेष रूप से विवादित हैं। सुप्रीम कोर्ट में एक जनहित याचिका दायर की है, जिसमें कहा गया कि नियम का Section 3 (C) अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, समानता और व्यक्तिगत आजादी के अधिकारों का उल्लंघन करता है। सामान्य वर्ग यानी सवर्ण समाज के छात्र और शिक्षक भी नाराज हैं।

तो वहीं, बरेली के मजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री ने कहा कि नया नियम सामान्य वर्ग के छात्रों को स्वघोषित अपराधी बनाने जैसा है। इसको लेकर छात्र और शिक्षक दोनों का कहना है कि नियम एकतरफा है, झूठी शिकायतों पर कार्रवाई की व्यवस्था नहीं है और सामान्य वर्ग का प्रतिनिधित्व पर्याप्त नहीं है।

हर कॉलेज और विश्वविद्यालय में Equity Committee और Equity Squad बनाए जाएंगे। छात्रों का कहना है कि इसमें सामान्य वर्ग का प्रतिनिधित्व जरूरी नहीं है। साथ ही, Equity Squad को बहुत अधिकार दिए गए हैं और ‘भेदभाव’ की परिभाषा स्पष्ट नहीं की गई है।

UGC नियम के तहत हर संस्थान में हेल्पलाइन और Equal Opportunity Centre होगा, जहां छात्र भेदभाव की शिकायत आसानी से कर सकते हैं। नियम में झूठी शिकायतों पर कोई रोक नहीं है। इससे कोई भी छात्र बिना सबूत के आरोप का शिकार हो सकता है और उसका करियर प्रभावित हो सकता है।

UGC के नए नियमों के तहत SC, ST और पिछड़ी जातियों के खिलाफ भेदभाव रोका जाए। सामान्य वर्ग के छात्र और शिक्षक इसे एकतरफा बता रहे हैं। उनका कहना है कि यह नियम सवर्ण छात्रों को ‘संभावित अपराधी’ मानकर भेदभाव बढ़ा सकता है।

अगर कोई संस्थान नियम का पालन नहीं करता है, तो UGC उनकी मान्यताओं को रद्द कर देगा या फंड रक रोक लगा सकता है। छात्र और शिक्षकों का कहना हैं कि यह नियम संस्थानों पर अत्यधिक दबाव डालता है और इसे बिना पर्याप्त प्रशिक्षण के लागू करना मुश्किल है।

UGC के मुताबिक यह नियम उच्च शिक्षा में समान अवसर और सुरक्षित माहौल सुनिश्चित करने के लिए जरूरी है। बिना निगरानी व्यवस्था के पिछड़ी जातियों के खिलाफ भेदभाव रोकना मुश्किल है। नियम धीरे-धीरे लागू होंगे और उद्देश्य सिर्फ समान अवसर और सुरक्षा सुनिश्चित करना है। UGC का नया नियम शिक्षा प्रणाली में समानता और सुरक्षा बढ़ाने का प्रयास है, लेकिन इसके कुछ सेक्शन विवादास्पद हैं।

सूत्रों के मुताबिक, केंद्र सरकार जल्द ही यूजीसी के इन नए नियमों के बारे में लोगों विस्तृत जानकारी देगी। सूत्र का कहना है कि सत्तापक्ष यह मान रही है कि बजट सत्र से पहले विपक्ष इस मुद्दे पर सामान्य वर्ग को गुमराह कर रहा है। सरकार का यह भी कहना है कि नए नियमों का किसी भी तरह का दुरुपयोग बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

उधर बरेली के नगर मजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री ने सरकारी नीतियों विशेषकर विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) के नए नियमों पर नाराजगी जताते हुए सोमवार को सेवा से इस्तीफा दे दिया। उन्होंने मंगलवार को बताया ‘मैंने कल ही अपना इस्तीफा जारी कर दिया है। कल जब सुनियोजित साजिश विफल हो गई। DM सर के ऑफिस में फोन पर किसी ने आपत्तिजनक वार्ता की वो मैंने सुन लिया था। मैंने अपने वकील को बताया की मुझे बंधक बनाने की बात हो रही है आप प्रेस को बता दें। तब आनन-फानन में मुझे जाने दिया गया। मुझे अन्य आरोप में सस्पेंड करने की सुनियोजित साजिश थी।’