अनन्त मित्तल
भारत—अमेरिका व्यापार समझौते को जहाँ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी दो प्रभावशाली लोकतंत्रों के बीच ऐतिहासिक समझौता बता रहे हैं, वहीं अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि जेमीसन ग्रीयर एवं भारत के वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल की मानें तो इस द्विपक्षीय व्यापार सौदे पर अंतिम बातचीत एवं शर्तें तय होना अभी बाकी है। पीयूष गोयल एवं ग्रीयर द्वारा भारत के कृषि क्षेत्र को सौदे से अक्षुण्ण रखने के दावे के बावजूद तमाम राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय व्यापार एवं कृषि विशेषज्ञ भारत—अमेरिका के बीच प्रस्तावित व्यापार सौदे को अमेरिका के पक्ष में और भारतीय किसानों तथा विनिर्माण क्षेत्र के लिए भारी चुनौती बनने की आशंका जता रहे हैं।
बहरहाल, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने दावा किया है कि उनके देश से द्विपक्षीय व्यापार सौदे के तहत भारत द्वारा साल 2030 तक कम से कम 500 अरब डॉलर मूल्य के माल एवं सेवाओं का जीरो आयात शुल्क पर आयात किया जाएगा।
उनके अनुसार भारत द्वारा चूँकि रूस से कच्चा तेल खरीदने पर रोक लगाने की हामी भरी गई है, इसलिए वे व्यापार सौदे के तहत भारत से आयातित सामान एवं सेवाओं पर आयात कर की दर 25 प्रतिशत से घटाकर 18 प्रतिशत कर देंगे। उन्होंने 25 प्रतिशत पीनल टैरिफ अर्थात जुर्माना शुल्क हटाने के बारे में अभी कुछ भी नहीं कहा है, हालांकि पीयूष गोयल ने सौदे के तहत उसे समाप्त किए जाने का दावा किया है।
गौरतलब है कि ट्रम्प द्वारा भारत से अमेरिका में आयातित सामान पर टैरिफ की दरों में बढ़ोतरी किए जाने से पूर्व अमेरिका द्वारा इन पर चार प्रतिशत से भी कम टैरिफ वसूला जाता था। उसके मुकाबले अमेरिका से आयातित माल पर भारत में टैरिफ की दर कई गुना अधिक थी। इसलिए ट्रम्प ने भारत को ‘टैरिफ किंग’ बताकर हमारे माल पर टैरिफ दरों में अभूतपूर्व बढ़ोतरी की भूमिका बनाई थी।
उसके बाद रूस—यूक्रेन युद्धविराम के लिए रूस पर दबाव बनाने को अमेरिका ने भारत पर उससे कच्चे तेल की खरीद रोकने के लिए 25 प्रतिशत अतिरिक्त टैरिफ लाद दिया था। बहरहाल, अब उम्मीद यह है कि इस द्विपक्षीय व्यापार सौदे के लागू होने पर भारत—अमेरिका के बीच व्यापार सुचारू होने के साथ-साथ उसमें बढ़ोतरी भी होगी।
अभी तक भारत से अमेरिका को निर्यात की मात्रा अधिक होने के कारण दोनों देशों के बीच व्यापारिक असंतुलन बना हुआ था, जिस पर अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि लंबे अरसे से आपत्ति जता रहे थे। हालांकि अब भारत और अमेरिका के बीच व्यापार में ट्रम्प का पलड़ा भारी हो जाने की आशंका जताई जा रही है, फिर भी तस्वीर तो द्विपक्षीय व्यापार समझौते की शर्तें तय होने और उस पर दोनों देशों की मुहर लगने के बाद ही साफ होगी। फिर भी भारतीय उत्पादकों से लेकर निर्यातकों तक निर्यात से जुड़े सभी पक्षों ने अभी घोषणा तक सीमित इस द्विपक्षीय व्यापार सौदे का स्वागत किया है।
ऐसा माना जा रहा है कि देश के प्रमुख निर्यात उत्पादन केंद्रों में उम्मीद की किरण जागी है, जो ट्रम्प टैरिफ के कारण पिछले आठ महीने से मायूस थे। द्विपक्षीय व्यापार सौदे की घोषणा ने बजट की मार से त्रस्त शेयर बाजार में भी तेजी की नई लहर ला दी है। साथ ही भारतीय मुद्रा रुपये में भी डॉलर के मुकाबले करीब पाँच प्रतिशत की तेजी आई है, अर्थात अब एक डॉलर खरीदने के लिए पहले के मुकाबले कम रुपये खर्च करने पड़ेंगे।
वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल के अनुसार एशिया में भारत के व्यापारिक प्रतिद्वंद्वी देशों के मुकाबले अमेरिका से हम व्यापार सौदे की बेहतर शर्तें कबूल करवाने में कामयाब हुए हैं। उनका दावा है कि व्यापार सौदे में भारत के कृषि—पशुपालन एवं अन्य नाजुक क्षेत्रों को सुरक्षित रखा गया है।
मीडिया में आई जानकारी के अनुसार डेयरी, पोल्ट्री, मछली, अनाज, जीएम खाद्य पदार्थों, सोयामील एवं मक्का आदि जिंसों के आयात पर अमेरिका को टैरिफ दरों में कोई छूट नहीं दी गई है। हालांकि मक्का, कपास एवं सोयाबीन तो अमेरिका के प्रमुख कृषि उत्पाद हैं, जिनका सौदे में किसी न किसी रूप में शामिल होना अनिवार्य माना जा रहा है। इसके मुकाबले अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि ग्रीयर ने अमेरिकी औद्योगिक उत्पादों को भारत में जीरो प्रतिशत टैरिफ पर आयात की मंजूरी देने की भारत सरकार की तैयारी का दावा किया है।
इसका मतलब है कि अमेरिकी कारों से लेकर दवाओं, अल्कोहल आधारित उत्पादों जैसे शराब—बीयर, वैज्ञानिक उपकरणों तथा कच्चे तेल के आयात में जबरदस्त इजाफा भारत के बाजार में होने जा रहा है, जिससे भारत के विनिर्माण क्षेत्र पर असर पड़ना लाजिमी है।
इसके मुकाबले भारत के कपड़ा, प्लास्टिक, सिलसिलेवार कपड़ों, चमड़ा एवं जूते—चप्पल, घरेलू सजावटी सामान तथा रत्नों एवं आभूषणों से संबंधित उद्योगों के लिए अमेरिका से व्यापार की राह फिर से खुलेगी, जो 50 प्रतिशत ट्रम्प टैरिफ के कारण भारी घाटा उठा रहे थे। हमारे यहाँ बजट में घोषित स्वदेशी डेटा सेंटरों को 2047 तक शुल्क-मुक्त घोषित किए जाने से उनकी स्थापना के लिए अमेरिका से भारी मात्रा में उपकरणों, माइक्रोचिप, आधुनिकतम प्रौद्योगिकी, बहुमूल्य खनिजों एवं कच्चे तेल का आयात भारत में तेजी से बढ़ने की संभावना है। कुछ विशेषज्ञों का दावा है कि अगले पाँच साल में ट्रम्प की भारत पर सालाना 100 अरब डॉलर के माल के अमेरिका से आयात की शर्त को ऐसे ही सामान के आयात से पूरा करने में मदद मिलेगी।
कुल मिलाकर भारत—अमेरिका द्विपक्षीय व्यापार सौदा अभी तक रहस्य के कुहासे में लिपटा होने के बावजूद उससे उम्मीदों और आशंकाओं का इज़हार बखूबी हो रहा है। भारत के विपक्षी दल जहाँ इस संभावित व्यापार सौदे के प्रति आशंका जता रहे हैं, वहीं सरकारी तंत्र एवं कॉरपोरेट मीडिया इसके कसीदे पढ़ते नहीं अघा रहे। ताज्जुब यह है कि सौदे की अंतिम शर्तों और उस पर औपचारिक मुहर लगने से पहले ही एनडीए संसदीय दल ने तीन फरवरी को संसद भवन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का इसके लिए भारी—भरकम माला पहना कर अभिनंदन भी कर दिया। देखना यही है कि मोदी सरकार द्वारा भारत—अमेरिका व्यापार सौदे का विवरण आम जनता को बताया भी जाएगा अथवा भारत—यूरोपीय संघ व्यापार सौदे की तरह यह भी रहस्य की परतों में ही लिपटा रहेगा।





