देश के 2026–27 के आम बजट से राजस्थान को है कई अपेक्षाएँ

Rajasthan has many expectations from the country's general budget for 2026–27

गोपेन्द्र नाथ भट्ट

देश का आम बजट केवल केंद्रीय आय–व्यय का दस्तावेज नहीं होता, बल्कि यह राज्यों के विकास की दिशा और गति तय करने वाला नीति-पत्र भी होता है। वर्ष 2026–27 के आम बजट को लेकर राजस्थान की अपेक्षाएँ इसलिए भी अधिक हैं क्योंकि यह राज्य भौगोलिक दृष्टि से विशाल, सामाजिक रूप से विविधता पूर्ण और आर्थिक रूप से कृषि, पर्यटन तथा छोटे कुटीर उद्योगों पर आधारित प्रदेश है। मरुस्थलीय परिस्थितियों, सीमावर्ती चुनौतियों और रोजगार की जरूरतों को देखते हुए राजस्थान चाहता है कि केंद्रीय बजट में उसकी विशिष्ट आवश्यकताओं को पर्याप्त स्थान मिले।

सबसे पहली और प्रमुख अपेक्षा प्रदेश को पानी की कमी की समस्या से उबारने के जतन में जुटी राज्य की भजन लाल सरकार द्वारा पूर्वी राजस्थान नहर परियोजना जिसे पुनर संशोधित कर पीकेसी ई आर सी पी के नए वर्जन रामसेतु परियोजना नाम दिया गया है को सिरे पर चढ़ाना है। यह महत्वाकांक्षी परियोजना पश्चिमी राजस्थान की इन्दिरा गांधी नहर परियोजना की तरह पूर्वी राजस्थान की तकदीर को बदलना है। भजन लाल सरकार ने यमुना के जल को राजस्थान के शेखावाटी अंचल में लाने के लिए भी अपनी प्रतिबद्धता दर्शायी है। इन दोनों महती परियोजनाओं के लिए केन्द्रीय सहायता की आवश्यकता है। उम्मीद है केन्द्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के निर्देश पर राजस्थान को पेयजल और सिंचाई मद में अधिक धन राशि का आवंटन करेगी।

पश्चिम राजस्थान के पचपदरा तेल रिफाइनरी और पेट्रो कॉम्प्लेक्स के लिए भी केन्द्रीय मदद की जरूरत है ताकि अतिशीघ्र इस महत्वपूर्ण परियोजना का प्रधानमंत्री के हाथों लोकार्पण हो सके। राजस्थान में रेल परियोजनाओं हवाई अड्डों के निर्माण और सड़कों और राजमार्गो के विस्तार के लिए भी केन्द्रीय मदद आवश्यक है।

प्रदेश में कृषि एवं किसान कल्याण से जुड़ी योजनाओं को अंजाम देने के लिए भी केन्द्रीय सहायता अपेक्षित है। राजस्थान का बड़ा हिस्सा वर्षा-आधारित खेती पर निर्भर है। ऐसे में बजट से उम्मीद की जा रही है कि प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि की राशि बढ़ाई जाए, सिंचाई परियोजनाओं के लिए अधिक केंद्रीय सहायता मिले और सूखा-प्रभावित क्षेत्रों के लिए विशेष पैकेज घोषित किया जाए। फसल बीमा योजना को और व्यावहारिक बनाने, न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) को प्रभावी ढंग से लागू करने तथा बाजरा, ज्वार जैसी मोटे अनाज वाली फसलों को प्रोत्साहन देने की भी मांग है। इससे किसानों की आय में स्थिरता आएगी और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी।

जल और सिंचाई राजस्थान की जीवनरेखा है। इसलिए बजट से अपेक्षा है कि पूर्वी राजस्थान नहर परियोजना जैसी बड़ी जल परियोजनाओं को राष्ट्रीय परियोजना का दर्जा मिले। इसके अलावा जल संरक्षण, वर्षा जल संचयन, नलकूपों के पुनर्भरण और पेयजल योजनाओं के लिए केंद्रीय आवंटन बढ़ाने की मांग भी प्रमुख है। जल संकट से जूझते राज्य के लिए यह सहायता दीर्घकालिक विकास का आधार बन सकती है।

बुनियादी ढाँचे और परिवहन के क्षेत्र में भी राजस्थान को बजट से काफी उम्मीदें हैं। सड़क, रेलवे और हवाई संपर्क का विस्तार राज्य की आर्थिक गतिविधियों को गति दे सकता है। सीमावर्ती और जनजातीय क्षेत्रों में सड़क नेटवर्क मजबूत करने, नई रेल लाइनों और पर्यटन स्थलों को जोड़ने वाली परियोजनाओं के लिए अतिरिक्त बजटीय प्रावधान की अपेक्षा है। इससे न केवल आवागमन सुगम होगा, बल्कि व्यापार और निवेश को भी बढ़ावा मिलेगा।

राजस्थान की अर्थव्यवस्था में पर्यटन का विशेष योगदान है। ऐतिहासिक किले, महल, धार्मिक स्थल, रेगिस्तानी पर्यटन और जनजातीय संस्कृति राज्य की पहचान हैं। आम बजट से उम्मीद है कि पर्यटन को उद्योग का दर्जा देते हुए हेरिटेज संरक्षण, डेस्टिनेशन वेडिंग, फिल्म शूटिंग और ग्रामीण पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए विशेष प्रोत्साहन योजनाएँ लाई जाएँ। इससे स्थानीय स्तर पर रोजगार सृजन होगा और विदेशी मुद्रा अर्जन भी बढ़ेगा।

एम एस एम ई और उद्योग क्षेत्र को लेकर भी राजस्थान की अपेक्षाएँ स्पष्ट हैं। राज्य में पत्थर, हस्तशिल्प, वस्त्र, जेम्स एंड ज्वेलरी तथा कृषि आधारित उद्योग बड़ी संख्या में हैं। बजट से GST प्रक्रिया को सरल करने, सस्ते ऋण की व्यवस्था, निर्यात प्रोत्साहन और क्लस्टर आधारित औद्योगिक विकास के लिए सहायता की मांग है। इससे छोटे उद्यमों की प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता बढ़ेगी और युवाओं को स्थानीय स्तर पर रोजगार मिलेगा।

रोजगार और कौशल विकास राजस्थान के लिए एक और अहम मुद्दा है। युवा आबादी को देखते हुए बजट में कौशल प्रशिक्षण, आईटी, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, हरित ऊर्जा और स्टार्टअप इकोसिस्टम से जुड़े कार्यक्रमों पर विशेष ध्यान देने की अपेक्षा है। तकनीकी शिक्षा संस्थानों, औद्योगिक प्रशिक्षण केंद्रों और डिजिटल स्किल्स को बढ़ावा देने से राज्य की मानव संसाधन क्षमता मजबूत हो सकती है।

सामाजिक क्षेत्र में भी राजस्थान को बजट से बड़ी उम्मीदें हैं। स्वास्थ्य, शिक्षा, महिला सशक्तिकरण और जनजातीय कल्याण योजनाओं के लिए अधिक केंद्रीय सहायता की मांग है। आदिवासी बहुल जिलों में आवास, पोषण, शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार के लिए विशेष पैकेज की अपेक्षा की जा रही है। इससे सामाजिक संतुलन और समावेशी विकास को बल मिलेगा।
नवीकरणीय ऊर्जा के क्षेत्र में राजस्थान देश का अग्रणी राज्य है। सौर और पवन ऊर्जा की अपार संभावनाओं को देखते हुए बजट से उम्मीद है कि ग्रीन एनर्जी, बैटरी स्टोरेज और ग्रीन हाइड्रोजन परियोजनाओं के लिए अतिरिक्त प्रोत्साहन दिए जाएँ। इससे राज्य न केवल ऊर्जा आत्मनिर्भर बनेगा, बल्कि रोजगार और निवेश के नए अवसर भी पैदा होंगे।

उम्मीद है कि 2026–27 का आम बजट राजस्थान के लिए कृषि सुरक्षा, जल समाधान, पर्यटन विकास, औद्योगिक विस्तार और सामाजिक सशक्तिकरण का माध्यम बन कर सामे आ सकता है। राज्य की अपेक्षा है कि केंद्र सरकार बजट के जरिए उसकी भौगोलिक और सामाजिक विशिष्टताओं को समझते हुए संतुलित और दीर्घकालिक विकास की राह प्रशस्त करे। यदि ये अपेक्षाएँ पूरी होती हैं, तो राजस्थान राष्ट्रीय विकास में और अधिक सशक्त भूमिका निभा सकेगा इसमें कोई दो राय नहीं है।