रविंद्र कुमार त्यागी को राष्ट्रीय गौरक्षा वाहिनी गौसेवा संघ का राष्ट्रीय सचिव नियुक्त किया गया

Ravindra Kumar Tyagi has been appointed as the National Secretary of the Rashtriya Gau Raksha Vahini Gauseva Sangh

रविवार दिल्ली नेटवर्क

राजस्थान का प्रभार दिया गया

गाजियाबाद : राष्ट्रीय गौरक्षा वाहिनी गौसेवा संघ के विस्तार कार्यक्रम के अंतर्गत संगठन के राष्ट्रीय संरक्षक डॉ इंद्रेश कुमार, राष्ट्रीय अध्यक्ष संजीव सिंह सेंगर, स्वतंत्र प्रभारी श्रीमंत विक्रमादित्य सिंह जूदेव, राष्ट्रीय सलाहकार डॉ सुभाष शर्मा एवं राष्ट्रीय अध्यक्ष (मुस्लिम प्रकोष्ठ) इकबाल त्यागी की सहमति से रविंद्र कुमार त्यागी को राष्ट्रीय सचिव पद पर मनोनीत किया गया और उनको विशेष प्रभार राजस्थान दिया गया है।

संगठन की ओर से रविंद्र कुमार त्यागी को अपने प्रदेश एवं जनपद में स्थित संगठन के कार्यकर्ताओं से समन्वय स्थापित कर, प्रदेश व जनपद के पदाधिकारियों का सहयोग लेकर गौसेवा एवं गौरक्षा के उत्कृष्ट कार्यों को गतिशील रखने का दायित्व सौंपा गया है।

रविंद्र कुमार त्यागी ने संगठन के शीर्ष नेतृत्व का धन्यवाद व आभार प्रकट करते हुए उन्होंने कहा कि देश में गौवंश के सरंक्षण के लिए स्वावलंबी गौशाला कार्यक्रम को अपनाना होगा तथा गौवंश से आर्थिक स्वावलम्बन के रास्ते बनाने होंगे उसके लिए सबसे ज़्यादा नस्ल सुधार भारतीय देसी गायों का पालन, उनसे प्राप्त पंचगव्य का मानव और प्रकृति के लिए उपयोगिता आदि के हमें प्रयास करने होंगे गाय को गौमाता इसीलिए कहा गया है उनसे प्राप्त पंचगव्य अमृत के समान है, गौवंश के संरक्षण के लिए बहुत सरल प्रक्रिया है हम सभी प्राणी दैनिक जीवन में गौमाता से प्राप्त दूध, गोबर से बने पूजा उत्पाद, गोबर ओर गौमूत्र से बनने जैविक खाद को खेती के लिए उपयोग करना शुरू कर दे तो गौवंश की उपयोगिता बढ़ेगी और स्वत: ही गौमाता का संरक्षण शुरू होगा। विदेशों में हमारे भारतीय गायों के पालन की संख्या बहुत बढ़ गयी है और हमारा दुर्भाग्य हम जाति एवं राजनीतिक कुचक्र में फंसे हुए है एक विशेष संदेश उन सभी गायों के संरक्षण व रक्षार्थ कार्यों में संलग्न विभिन्न प्रकार के संगठनों के लिए है कि हम बड़े छोटे के भेद में ना फँसे और ना ही केवल गौपुत्र लिखने के लिए कार्य करे, हम ये सोचे कि जहां भी जिस स्थिति में जितना कर रहे है वह सर्वश्रेष्ठ निस्वार्थ सभी को एकजुटता के साथ गौमाता के संरक्षण के लिए कार्य करने होंगे तभी गाय को राष्ट्र में विशेष दर्जा मिलने का प्रयास सफल होगा।