गोवर्द्धन दास बिन्नाणी ” राजा बाबू”
पुरे हर्सोल्लास के साथ मनाये जाने वाले तीन महत्वपूर्ण राष्ट्रीय पर्वों में से एक गणतन्त्र दिवस इस बार भी २६ जनवरी २०२६ को मनाया जायेगा और यह हमारा सतहत्तरवाँ [७७वां] गणतन्त्र दिवस होगा।
इस बार का गणतन्त्र दिवस ‘वंदे मातरम्’ के गौरवशाली 150 वर्षों को समर्पित होगा।इस बार के समारोह में राष्ट्रगीत ‘वंदे मातरम्’ की स्पष्ट व प्रभावी छाप दिखाई देगी।‘स्वतंत्रता का मन्त्र – वंदे मातरम्’ और ‘समृद्धि का मन्त्र – आत्मनिर्भर भारत’ विषयवस्तु पर कुछ कार्यक्रम भी इस बार के समारोह में आपको देखने मिलेंगे।
उपरोक्त के अलावा इस बार सरकार आय और रोजगार सृजन में बेहतरीन काम करने वाले नवप्रवर्तक [इनोवेटर्स], अन्वेषक [रिसर्चर], नवाचार [स्टार्टअप] से जुड़े उद्यमी और स्वयं सहायता समूहों के प्रतिनिधिके अलावा विश्व पैरा एथलेटिक्स चैंपियनशिप के विजेता, प्राकृतिक खेती करने वाले किसान और गगनयान, चन्द्रयान जैसे इसरो अभियानों से जुड़े वैज्ञानिक, स्वास्थ्य और शिक्षा क्षेत्र [हेल्थ और एजुकेशन सेक्टर] में उत्कृष्ट कार्य करने वाले, रेहड़ी पटरी विक्रेता, गायक और पीएम मुद्रा योजना से लोन लेकर सफल व्यवसाय चला रहीं महिलाओं सहित कुल दस [१०,०००] हजार विशेष अतिथियों को आमन्त्रित कर उन्हें इस राष्ट्रीय उत्सव का साक्षी बनने का मौका दे रही है। इससे स्पष्ट है कि देश के विकास में अमूल्य भूमिका निभाने वाले नागरिकों के असाधारण योगदान को इस महत्वपूर्ण राष्ट्रीय पर्व पर सम्मानित करने की दिशा में सरकार का यह एक सकारात्मक कदम है।
आपकी जानकारी के लिये गणतन्त्र से तात्पर्य होता है – जनता के लिए जनता द्वारा शासन यानि देश में रहने वाले लोगों की सर्वोच्च शक्ति और सही दिशा में देश के नेतृत्व के लिए राजनीतिक नेता के रूप में अपने प्रतिनिधि को चुनने के लिए केवल जनता के पास अधिकार है। इसलिए भारत एक गणतन्त्र देश है, जहाँ आम जनता अपना नेता, प्रधानमन्त्री के रूप में चुनती है।
अब जान लें कि स्वतन्त्रता दिवस के दिन भारत को अंग्रेजी की लम्बी गुलामी से आजादी मिली थी जबकि गणतन्त्र दिवस के दिन भारत गणतन्त्र देश बना और उसी दिन से “भारत सरकार अधिनियम 1935” की जगह भारत का लिखा हुआ संविधान लागू हुआ।
जैसा आप सभी जानते हैं भारतीय संविधान दुनिया में सबसे लम्बा लिखा हुआ संविधान है। इसमें 22 लेख और 12 अनुसूचियों में विभाजित 444 लेख हैं और इसकी दो मूल हस्तलिखित प्रतियाँ एक हिन्दी में व दूसरी अन्ग्रेजी में है | इसके अलावा भारतीय हस्तलिखित संविधान की 308 प्रतियाँ विधानसभा सदस्यों द्वारा 24 जनवरी, 1950 को हस्ताक्षरित भी की हुई है । गणतन्त्र दिवस के बारे में आप सभी बहुत कुछ जानते ही हैं फिर भी कुछ मुख्य रोचक जानकारियाँ यहाँ आप सभी के ध्यान्नार्थ प्रस्तुत है –
- चूँकि 26 जनवरी 1929 को अंग्रेजों की गुलामी के विरुद्ध कांग्रेस ने पूर्ण स्वराज का प्रस्ताव पासकर पूर्ण स्वराज्य की मांग की थी लेकिन जब उस पर निर्णय नहीं हुआ तब 26 जनवरी 1930 को भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने भारत को पूर्ण स्वराज घोषित कर दिया और उस दिन से 1947 में स्वतंत्रता प्राप्त होने तक 26 जनवरी गणतंत्र दिवस के रूप में मनाया जाता रहा ।
- स्वतंत्रता प्राप्ति पश्चात् भारत ने अपना पहला गणतन्त्र दिवस 26 जनवरी 1950 को मनाया था ।
- स्वतन्त्रता, समानता और बंधुत्व’, भारतीय संविधान में उजागर तीन अवधारणाएं फ्रांसीसी संविधान से प्रेरित हैं ।
- 1953 वाले साल से गणतन्त्र दिवस परेड में लोक नृत्य और आतिशबाजी प्रदर्शित हो रही है।
- परेड में शामिल सभी झाँकियाँ एक उचित दूरी बनाकर ०५ किमी प्रति घंटा की रफ्तार से ही चलती हैं, ताकि दोनों ओर के सभी दर्शक आसानी से इन झाँकियों का लुत्फ़ उठा सकें ।
- भारतीय राष्ट्र ध्वज गणतन्त्र दिवस पर भारत के राष्ट्रपति द्वारा फहराया जाता है जबकि स्वतन्त्रता जबकि स्वतन्त्रता दिवस पर भारत के प्रधानमन्त्री द्वारा।
- इसी प्रकार गणतन्त्र दिवस पर भारत के राष्ट्रपति देश को सम्बोधित करते हैं जबकि स्वतन्त्रता दिवस पर भारत के प्रधानमन्त्री।
- देश के सभी सर्वोच्च नागरिक सम्मान एवं पुरस्कारों की घोषणा [ भारतरत्न, पद्म पुरस्कार , अशोक चक्र, कीर्ति चक्र इत्यादि ] गणतन्त्र दिवस पर ही होती है।
- गणतन्त्रदिवस समारोह पूरी समय की पाबन्दी के साथ मनाया जाता है यानि शुरू होने में यदि एक मिनट की भी देरी हुई है तो समापन भी एक मिनट की देरी से होगा।
- चौहत्तरवें गणतन्त्र दिवस [२०२३] से भारतीय सेना की ०७ [सात] स्वदेशी १०५ मिमी [इन्डियन फील्ड गन] तोपों द्वारा इक्कीस [२१ ] सलामी दी जाती है, जिन्हें पौन्डर्स कहा जाता है यानि प्रत्येक तोप से तीन राउण्ड फायरिंग होती है।इस सन्दर्भ में जान लें कि हमारे यहाँ राष्ट्रपति और अन्य गणमान्य व्यक्तियों के सम्मान में तोपों से सलामी सेना के सभी औपचारिक कार्यक्रमों शामिल करने की परम्परा है।
- सर्वश्रेष्ठ परेड की निशानी पुरस्कार [ट्रॉफी] देने के लिए पूरे रास्ते में कई जगहों पर जजों को बिठाया जाता है जो प्रत्येक दल को २०० मापदण्डों पर अंक [नम्बर]देते हैं। किसी भी दल के लिए इस निशानी पुरस्कार [ट्रॉफी] को जीतना बड़े गौरव की बात होती है।
- किसी भी अनहोनी को टालने के उद्देश्य से परेड में शामिल होने वाले प्रत्येक जवान की चार स्तर पर सुरक्षा जाँच की जाती है और उनके हथियारों की भी जाँच की जाती है ताकि किसी भी जवान के हथियार में कोई जिंदा कारतूस न हो।
- अन्त में वायुसेना द्वारा किये जाने वाले ‘फ्लाई पास्ट’ में राफेल, सुखोई-30, पी-8आई, सी-130, सी-295, मिग-29, अपाचे, एलसीएच, एएलएच, एमआई-17 जैसे विमान व हेलीकॉप्टर शामिल रहेंगे। हर बार कि तरह इस बार का भी ‘फ्लाई पास्ट’ का नज़ारा देखने लायक होगा क्योंकि इसमें शामिल फाइटर प्लेन और हेलिकॉप्टर वायुसेना के अलग-अलग केंद्रों से उड़ान भरते हैं फिर भी ये तय समय और क्रम में ही सटीक तालमेल बैठते हुए राजपथ पर पहुँच आकाश में ऐसी ऐसी कलाबाजी और रंग-बिरंगे धुएं से आकृतियां बनाते हैं कि लोग विस्मित, व रोमांचित हो उठते हैं।
- जैसा आपलोगों को मालूम ही है कि हर साल गणतन्त्र दिवस की परेड के मुख्य अतिथि के लिये किसी विदेशी राष्ट्राध्यक्ष या शासनाध्यक्ष को आमन्त्रित किया जाता हैऔर उसी कड़ी में इस बार यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष एंटोनियो कोस्टा व यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन मुख्य अतिथि होंगे।
- आप सभी प्रबुद्ध पाठक यह भी जान लें कि गणतनत्र दिवस के पूरे आयोजन की जिम्मेदारी रक्षा मंत्रालय की होती है।
उपरोक्त वर्णित तथ्यों से स्पष्ट है कि हमारा गणतन्त्र का इतिहास जितना पुराना और रोचक है, उतना ही रोचक सफर है इसकी परेड के आयोजन वगैरह का। भारत के इस शौर्य और पराक्रम के अवलोकन हेतू प्रत्येक वर्ष नई दिल्ली के कर्तव्य पथ (पहले राजपथ) से लेकर लाल किले तक लाखों लोगों की भीड़ जुटती है। इसी तरह सभी राज्यों में भी सभी जगह पूरे उल्लास व उमँग के साथ मनाया जाता है और सब जगह स्थानीय जनता भी बढ़-चढ़ के सहभागिता निभाती है ।
अन्त में जैसा आप सभी जानते हैं कि अपने गणतन्त्र में कोई भी आम आदमी, बिना किसी विशेष वर्ग, धर्म के सत्ता के सबसे ऊँचे पद पर आसीन हो सकता है और हमारा इतिहास इसका जीवन्त उदाहरण है।





