‘संस्था शिरोमणि’ जैन श्वेताम्बर तेरापंथी महासभा का दायित्व हस्तांतरण समारोह

Responsibility Transfer Ceremony of 'Sanstha Shiromani' Jain Swetambar Terapanthi Mahasabha

“गुरु अनुकंपा से प्राप्त दायित्व को पूर्ण निष्ठा और जागरूकता के साथ निभाऊँगा” -महेन्द्र नाहटा

रविवार दिल्ली नेटवर्क

नई दिल्ली : जैन श्वेताम्बर तेरापंथ धर्मसंघ की ‘संस्था शिरोमणि’ जैन श्वेताम्बर तेरापंथी महासभा के सत्र 2026-28 के नवनिर्वाचित पदाधिकारियों का दायित्व स्वीकरण उत्सव महासभा प्रधान कार्यालय, कोलकाता में गरिमामय एवं भावपूर्ण वातावरण में संपन्न हुआ। दोपहर में जैन संस्कार विधि से पूजन-अर्चन के उपरान्त शुभ मुहूर्त में नवनिर्वाचित पदाधिकारियों ने महासभा कार्यालय में प्रवेश कर विधिवत दायित्व ग्रहण किया। निवर्तमान अध्यक्ष श्री मनसुखलाल सेठिया ने नवनिर्वाचित अध्यक्ष श्री महेन्द्र नाहटा को दायित्व हस्तांतरित किया। इस अवसर पर महासभा के पाँच पूर्व अध्यक्ष एवं पाँच पूर्व प्रधान न्यासी विशेष रूप से उपस्थित रहे।

अपराह्न में महासभा भवन के प्रज्ञा समवसरण में नवनिर्वाचित पदाधिकारियों के सम्मान में शुभकामना समारोह का आयोजन हुआ, जिसमें तेरापंथ समाज की विभिन्न संघीय संस्थाओं, कोलकाता एवं उपनगरीय क्षेत्रों की सभाओं-संस्थाओं के पदाधिकारी तथा अनेक गणमान्य महानुभावों की उल्लेखनीय उपस्थिति रही। कार्यक्रम का शुभारम्भ नमस्कार महामंत्रोच्चार से हुआ, तत्पश्चात सभा गीत का संगान एवं श्रावक निष्ठा पत्र का वाचन किया गया। शुभकामना समारोह में अपने भाव व्यक्त करते हुए महासभा के नवनिर्वाचित अध्यक्ष श्री महेन्द्र नाहटा ने कहा कि परम श्रद्धास्पद युगप्रधान आचार्य महाश्रमण की असीम अनुकंपा एवं तेरापंथ धर्मसंघ के विश्वास से जो यह महनीय दायित्व उन्हें प्राप्त हुआ है, वह उनके लिए परम सौभाग्य का विषय है। उन्होंने कहा कि वे पूर्ण निष्ठा, सजगता और जागरूकता के साथ गुरुआज्ञा एवं गुरु-इंगित के अनुरूप अपने दायित्वों का निर्वहन करने का प्रयास करेंगे। उन्होंने आगामी कार्यकाल की रूपरेखा प्रस्तुत करते हुए महासभा की गतिविधियों को नई गति और दिशा देने का संकल्प व्यक्त किया तथा यह भी कहा कि संघ-समाज के सहयोग से ही सभी योजनाएँ पूर्णता को प्राप्त कर सकेंगी।

विकास परिषद सदस्य श्री बनेचंद मालू ने इसे सेवा-स्वीकरण का उत्सव बताते हुए कहा कि महासभा तेरापंथ समाज की शीर्ष संस्था है और आचार्यश्री द्वारा इसे ‘संस्था शिरोमणि’ के रूप में उद्भाषित किया जाना इसके गौरव को और बढ़ाता है। प्रधान न्यासी श्री सुरेशचन्द गोयल ने कहा कि महासभा के प्रत्येक पदाधिकारी पर समाज की विशेष जिम्मेदारी है और गुरुदेव के आशीर्वाद से प्राप्त इस दायित्व का निर्वहन तन-मन-धन से करते हुए महासभा को आर्थिक रूप से सुदृढ़ बनाना हम सभी का परम कर्तव्य है।

निवर्तमान अध्यक्ष श्री मनसुखलाल सेठिया ने नवनिर्वाचित अध्यक्ष, प्रधान न्यासी एवं समस्त पदाधिकारियों को मंगल शुभकामनाएँ प्रदान करते हुए कहा कि पद पर हों या न हों, एक श्रावक के रूप में गुरुआज्ञा, गुरु-इंगित और संघहित को सर्वाेपरि रखना ही हमारी सच्ची पहचान है। महासभा का दायित्व सक्षम हाथों में आने से उसकी सफलता सुनिश्चित है। पूर्व अध्यक्ष श्री कमल कुमार दूगड़ ने नवनिर्वाचित टीम को बधाई देते हुए कहा कि अध्यक्ष श्री महेन्द्र नाहटा एक विचारशील नेतृत्व हैं और उनके मार्गदर्शन में महासभा नई ऊँचाइयों को स्पर्श करेगी। वे कुशल नेतृत्वकर्ता हैं।

शुभकामना समारोह के दौरान तेरापंथी सभा-कोलकता सहित अन्य सभाओं के पदाधिकारियों द्वारा महासभा के नवनिर्वाचित पदाधिकारियों को सम्मानित भी किया गया। इस दौरान महासभा के पूर्व अध्यक्ष श्री सुरेन्द्र चोरड़िया, श्री चैनरूप चिण्डालिया, पूर्व न्यासी श्री भंवरलाल बैद, अखिल भारतीय तेरापंथ महिला मण्डल की न्यासी श्रीमती मधु दुगड़, पूर्व अध्यक्ष श्रीमती सूरज बरड़िया, श्रीमती तारा सुराणा व वरिष्ठ श्राविका चंपाबाई कोठारी आदि विशिष्ट गणमान्य व्यक्तियों की भी उपस्थिति रही। साथ ही कोलकाता महानगर की अनेक सभाओं के पदाधिकारीगण, अखिल भारतीय तेरापंथ युवक परिषद, अखिल भारतीय तेरापंथ महिला मण्डल, तेरापंथ प्रोफेशनल फोरम, अणुव्रत समिति आदि के पदाधिकारियों के साथ स्थानीय ज्ञानशाला के ज्ञानार्थियों, प्रशिक्षक व प्रशिक्षिकाओं की उपस्थिति भी रही। यह दायित्व स्वीकरण उत्सव गुरु-निष्ठा, संघ-समर्पण और सेवा-संकल्प का प्रेरक उदाहरण बनकर तेरापंथ समाज के लिए एक सशक्त संदेश के रूप में उभरा।