सुनील कुमार महला
22 फरवरी को स्काउट संस्थापक दिवस या संस्थापक दिवस (फाउंडर्स डे) के रूप में मनाया जाता है। वास्तव में यह दिवस स्काउट आंदोलन के संस्थापक लॉर्ड रॉबर्ट बैडेन‑पावेल की जयंती के रूप में मनाया जाता है तथा स्काउट्स और गाइड्स के लिए विशेष महत्व रखता है।यह दिन उनकी पत्नी तथा विश्व प्रमुख गाइड ओलेव बैडेन-पॉवेल का भी जन्मदिन होता है। पाठकों को बताता चलूं कि भारत में इसे अक्सर ‘विश्व चिंतन दिवस’ (वर्ल्ड थिंकिंग डे) के साथ जोड़कर भी देखा जाता है। पाठकों को बताता चलूं कि स्काउट्स प्यार से संस्थापक को ‘बी.पी.’ भी कहते हैं।इस दिन स्काउट और गाइड अपने ‘नियम और प्रतिज्ञा'(स्काउट प्रॉमिस)को दोहराते हैं तथा करोड़ों स्काउट यूनिफॉर्म पहनकर समाज सेवा के कार्य करते हैं। दूसरे शब्दों में कहें तो इस दिन स्काउट और गाइड्स द्वारा सामुदायिक सेवा, रक्तदान, धन जुटाने, ध्वजारोहण और रैलियां आयोजित की जाती हैं। इस दिवस का महत्व यह है कि यह दिवस स्काउटिंग के उन मूल्यों (अनुशासन, देशभक्ति, सेवा) को पुनर्जीवित करता है, जो युवाओं को भविष्य की चुनौतियों का सामना करने के लिए तैयार करते हैं। यदि हम यहां पर स्काउटिंग,जिसे शांति और भाईचारे का उत्सव भी कहा जाता है, के इतिहास पर नजर डालें तो उपलब्ध जानकारी के अनुसार स्काउटिंग की शुरुआत एक प्रयोगात्मक कैंप से हुई थी। दरअसल, लॉर्ड बेडन पॉवेल ने इंग्लैंड के ब्राउंसी द्वीप पर वर्ष 1907 में पहला कैंप लगाया था। गौरतलब है कि स्काउटिंग की शुरुआत किसी खेल या शौक के रूप में नहीं हुई थी। बैडेन-पॉवेल ने अपने सैन्य अनुभवों से प्रेरणा लेकर युवाओं में चरित्र निर्माण और आत्मनिर्भरता बढ़ाने के लिए यह आंदोलन शुरू किया था। पाठकों को बताता चलूं कि स्काउट सैल्यूट के पीछे भी एक अर्थ है। दरअसल,तीन उंगलियों वाला स्काउट सलाम तीन मूल सिद्धांतों क्रमशः ईश्वर और देश के प्रति कर्तव्य, दूसरों की मदद तथा स्काउट नियमों के पालन का प्रतीक है। उल्लेखनीय है कि दुनिया भर के स्काउट्स एक-दूसरे से बाएं हाथ (लेफ्ट हैंड) से हाथ मिलाते हैं। इसके पीछे का तर्क यह है कि बायां हाथ दिल के करीब होता है और यह गहरी मित्रता और विश्वास का प्रतीक है। इसके अलावा, युद्ध के समय योद्धा अपना बचाव करने वाली ढाल (शील्ड) बाएं हाथ में रखते थे; बाएं हाथ से हाथ मिलाने का मतलब था ढाल को नीचे रखना, जो सामने वाले पर पूर्ण विश्वास को दर्शाता है। पाठकों को यह जानकर आश्चर्य होगा कि चंद्रमा पर कदम रखने वाले पहले व्यक्ति नील आर्मस्ट्रांग एक ‘ईगल स्काउट’ थे। वे अपने साथ चंद्रमा पर स्काउटिंग का बैज भी ले गए थे। रिकॉर्ड के अनुसार, चंद्रमा पर जाने वाले 12 अंतरिक्ष यात्रियों में से 11 किसी न किसी रूप में स्काउटिंग से जुड़े रहे थे। बहुत कम लोग ही यह बात जानते होंगे कि स्काउट जो गले में स्कार्फ पहनते हैं, वह सिर्फ वर्दी का हिस्सा नहीं है, बल्कि इसके पीछे कुछ वैज्ञानिक तथ्य भी हैं। दरअसल, इसे इस तरह डिजाइन किया गया है कि आपातकालीन स्थिति में इसका उपयोग पट्टियों (बैंडजेज) के रूप में, खून रोकने के लिए, या झुलसे हुए हाथ को सहारा देने के लिए किया जा सके। स्काउट के पास स्कार्फ को बांधने वाला एक छल्ला होता है,जिसे वोगल कहा जाता है। ‘गांठ बांधना’ (नोटिंग) स्काउटिंग का मुख्य हिस्सा है। इतना ही नहीं, स्काउट बेल्ट अक्सर चमड़े या मजबूत कपड़े की होती है, जिसमें हुक लगे होते हैं ताकि जरूरत पड़ने पर भारी सामान या औजार लटकाए जा सकें। वहीं, बैज स्काउट की दक्षता, उसकी रैंक और उसके द्वारा सीखे गए कौशलों (जैसे प्राथमिक चिकित्सा, तैराकी, खाना बनाना) को दर्शाते हैं।जब स्काउट कैंपिंग या ट्रेकिंग पर होते हैं, तो उनके पास एक ‘सर्वाइवल किट’ मौजूद होती है, जिसमें क्रमशः रस्सी (टेंट लगाने, पुल बनाने या किसी को बचाने में प्रयोग),चाकू या पेननाइफ;सीटी(संकट के समय संकेत देने के लिए) तथा कंपास और नक्शा भी मौजूद होता है। इसके अलावा,आपातकालीन सामग्री में क्रमशः फर्स्ट एड बॉक्स,माचिस या फ्लिंट तथा टॉर्च,व्यक्तिगत डायरी और पेन
भी प्रत्येक स्काउट के पास होते हैं।स्काउटिंग इतनी प्रसिद्ध रही है कि फिल्मों तक में इसका प्रभाव देखने को मिलता है। पाठकों को बताता चलूं कि प्रसिद्ध फिल्म निर्माता स्टीवन स्पीलबर्ग ने अपनी फिल्म ‘इंडियाना जोन्स’ के मुख्य किरदार को एक स्काउट के रूप में दिखाया था क्योंकि वे स्वयं एक स्काउट थे और फिल्म की शूटिंग के दौरान उन्हें अपने पुराने अनुभवों से काफी मदद मिली थी। बहरहाल, यहां यह भी गौरतलब है कि आज स्काउटिंग दुनिया के लगभग हर देश में मौजूद है और करोड़ों युवा इससे जुड़े हैं। वैश्विक स्तर पर इसे वर्ल्ड ऑर्गेनाइजेशन ऑफ द स्काउट मूवमेंट संचालित करता है।स्काउट का प्रसिद्ध आदर्श वाक्य ‘बी प्रिपेयर्ड’ यानी कि ‘सदैव तैयार रहो’ (उपस्थिति और विवेक) प्रत्येक स्काउट कोजीवन के हर क्षेत्र में मानसिक और शारीरिक रूप से तैयार रहने की प्रेरणा देता है। कहना ग़लत नहीं होगा कि आज स्काउटिंग सबसे बड़ा स्वैच्छिक युवा संगठन है। दूसरे शब्दों में कहें तो
भारत स्काउट्स एंड गाइड्स देश का सबसे बड़ा गैर-राजनीतिक, वर्दीधारी युवा संगठन माना जाता है।
बहरहाल, यदि हम यहां पर अपने देश भारत की बात करें तो भारत विश्व के सबसे बड़े स्काउट सदस्य देशों में से एक है और आज स्कूल आधारित स्काउटिंग कार्यक्रमों के कारण सदस्य संख्या लगातार बढ़ती रहती है।महामारी, आपदा राहत और सामाजिक अभियानों में स्काउट-गाइड की बड़ी भूमिका रही है। दिलचस्प तथ्य यह है कि
भारत का स्काउट संगठन विश्व के 170 से अधिक देशों के स्काउट आंदोलन से जुड़ा हुआ है तथा इसका कार्य क्षेत्र क्रमशः चरित्र निर्माण, सामुदायिक सेवा, आपदा राहत, पर्यावरण संरक्षण, स्वास्थ्य जागरूकता और नेतृत्व प्रशिक्षण है। पाठकों को बताता चलूं कि भारत में स्काउट-गाइड आंदोलन से लगभग 60 लाख से अधिक बच्चे और युवा (विभिन्न सरकारी कार्यक्रमों और आयोजनों के संदर्भ में) जुड़े हुए बताए जाते हैं । इसकी स्थापना के बारे में यदि हम यहां पर बात करें तो वर्तमान संगठन का गठन 1950 में हुआ (स्काउट) और 1951 में गाइड संगठन के एकीकरण के बाद पूर्ण रूप से बना।भारत में स्काउटिंग का संचालन मुख्य रूप से भारत स्काउट्स एंड गाइड्स (बीएसजी) द्वारा किया जाता है, जो देश का राष्ट्रीय स्काउट-गाइड संगठन है। गौरतलब है कि पिछले साल यानी कि वर्ष 2025 में आयोजित 19वीं राष्ट्रीय जम्बूरी उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में आयोजित की गई थी और यह आयोजन भारत स्काउट्स एंड गाइड्स द्वारा किया गया, जिसमें देश-विदेश से लगभग 30-33 हजार स्काउट और गाइड सदस्य शामिल हुए थे।यह जम्बूरी खास इसलिए भी रही क्योंकि लगभग 61 वर्षों बाद लखनऊ को राष्ट्रीय जम्बूरी की मेजबानी का अवसर मिला।हाल फिलहाल, यह बता दूं कि 22 फरवरी, 1857 को रॉबर्ट स्टीफनसन स्मिथ बेडन पॉवेल का जन्म हुआ था।1908 में उनकी पुस्तक ‘ स्काउटिंग फ़ोर ब्वायज’ के प्रकाशन के बाद उनका यह आंदोलन पूरी दुनिया में फैल गया। वास्तव में इस दिवस और आंदोलन का मूल उद्देश्य युवाओं का सर्वांगीण विकास(आल राउंड डेवलपमेंट) करना है।बच्चों में अनुशासन, साहस और आत्मविश्वास, समाज सेवा की भावना, नेतृत्व व मित्रता की भावना व क्षमता पैदा करना तथा उनका चरित्र निर्माण करना इसका वास्तविक उद्देश्य है।यह विश्व बंधुत्व की भावना को जाति, धर्म और देश की सीमाओं से ऊपर उठकर मजबूत और सुदृढ़ करता है।इस दिवस के लिए
हर साल एक विशेष थीम चुनी जाती है, जो वैश्विक मुद्दों पर आधारित होती है। पिछले साल यानी कि वर्ष 2025 में थीम ‘हमारी दुनिया, हमारा साझा भविष्य’ रखी गई थी,जिसमें क्रमशः पर्यावरण संरक्षण, लैंगिक समानता तथा शांति स्थापना(भाईचारा और समझ) जैसे बिंदुओं पर जोर दिया गया था।इस साल यानी कि वर्ष 2026 में इस दिवस की थीम ‘हमारी दुनिया, हमारा संपन्न भविष्य: पर्यावरण और वैश्विक गरीबी’ रखी गई है।यह थीम हमें यह सिखाती है कि कैसे पर्यावरण की रक्षा और गरीबी उन्मूलन एक बेहतर भविष्य के लिए जरूरी हैं। दूसरे शब्दों में कहें तो यह थीम बच्चों को जलवायु परिवर्तन के प्रभावों को कम करने, प्रकृति के साथ जुड़ाव (कचरे/अपशिष्ट प्रबंधन, वृक्षारोपण आदि) तथा सतत विकास या यूं कहें कि संसाधनों का इस तरह उपयोग करना कि भविष्य की पीढ़ियों के लिए भी वे सुरक्षित रहें आदि के बारे में जागरूक करती है। यह थीम सिखाती है कि हम सिंगल-यूज प्लास्टिक का त्याग करें, पर्यावरणीय शिक्षा के बारे में पूरे समाज को जागरूक व प्रोत्साहित करें तथा ईको-फ्रेंडली कैंपिंग पर जोर दें। वास्तव में यह थीम बच्चों में इस भावना का विकास करती है कि आज पर्यावरण की समस्या किसी एक देश विशेष की ही नहीं है, बल्कि यह पूरी दुनिया की एक बड़ी व साझी समस्या है। अंत में निष्कर्ष के तौर पर यही कहूंगा कि विश्व स्काउट दिवस केवल एक संगठन की वर्षगांठ नहीं है, बल्कि यह लॉर्ड बेडेन पावेल द्वारा स्थापित उन मानवीय मूल्यों को दोहराने का दिन है जो एक अनुशासित और सेवाभावी समाज की नींव रखते हैं। यह दिवस हमें सिखाता है कि निस्वार्थ सेवा, नेतृत्व और ‘सदैव तैयार’ रहने का संकल्प ही एक श्रेष्ठ नागरिक की असली पहचान है। यदि हम स्काउटिंग के सिद्धांतों को अपने जीवन में उतारें, तो हम न केवल स्वयं का सर्वांगीण विकास कर सकते हैं, बल्कि विश्व शांति और भाईचारे की भावना को भी सशक्त बना सकते हैं।





