
राकेश शर्मा
कुछ भी समझ नहीं आ रहा की संभल, मऊ और नागपुर की घटनाएँ संयोग है या प्रयोग क्यूंकि तीनों ही घटनाओं में एक ही समुदाय के लोग शामिल पाए गए हैं । इन्हें कवर फायर इंडी गठबंधन के दल दे रहे हैं वो भी सिर्फ़ तुष्टिकरण और वोट बैंक के लालच में ।
इन सभी घटनाओं के मूल में मुग़ल आक्रांता हैं जिन्होंने भारत को लूटने, सनातन को समाप्त करने, धर्म परिवर्तन कराने, मंदिरों को ध्वस्त करने, हिंदू संस्कृति को समाप्त करने का ही काम किया । ऐसे आक्रमणकारियों से किसी को भी कैसी हमदर्दी हो सकती है । मुझे तो लगता है आज भी मुगल आक्रांताओं , मुसलमानों और इस्लाम का भेद यह तत्व समझ ही नहीं पा रहे हैं। इन्हें लगता है कि इन आक्रांताओ का इतिहास हटाने का मतलब मुसलमानों पर हमला है, इस्लाम पर हमला हैं । यदि यह सचमुच भारतीय मुसलमान हैं और इस्लाम को मानते है तो इन्हें अपने देश के खातिर मर मिटना चाहिए क्यूंकि मुगल आक्रांताओं ने इनके मुल्क की सभ्यता, संस्कृति समाप्त करने का प्रयास किया, मंदिर ध्वस्त किए, जबरदस्ती धर्म परिवर्तन करवाया तो कुछ भारतीय मुसलमान इन्हें अपना वंशज मानकर पूरी क़ौम को क्यूँ बरगलाते हैं और राष्ट्र को प्रगति के मार्ग से भटकाते है ।
अब संभल को ही लें , वहाँ एक विवादित ढांचा आर्कियोलॉजिकल सर्वे ऑफ़ इंडिया के तहत आता है जिसे हिंदू पौराणिक हरिहर मंदिर कहते है और मुसलमान इसे मस्जिद कहते है । एक शिकायत कोर्ट में की गई की इस ढांचे में कुछ परिवर्तन किए जा रहे हैं जिसका कोर्ट ने संज्ञान लेते हुए आर्कियोलॉजिकल सर्वे को हिंदू और मुस्लिम पक्ष को साथ लेकर एक सर्वे का निर्देश दिया। इस बात पर एक समुदाय के हज़ारों लोगों ने इकट्ठा होकर हुड़दंग मचा दिया, पत्थरबाज़ी की, गोलियाँ चलाई जिससे कई लोग घायल हो गए जिसमे पुलिस वाले भी थे । इस हुड़दंग का नेतृत्व मुस्लिम समुदाय के कुछ नेताओं ने किया था । इस अराजकता को आप किस श्रेणी में रखेंगे मैं आपके विवेक पर ही छोड़ता हूँ ।
अब मऊ की घटना को लें । दुबई में भारत के चैम्पियंस ट्रॉफी जीतने के बाद पूरा देश जश्न मन रहा था । मऊ में भी भारतीय लोग जश्न मनाते हुए जलूस निकाल रहे थे कि अचानक उनपर एक मस्जिद से पत्थरों से हमला कर दिया गया , हुड़दंग किया गया ,आगजनी की गई । क्या जिन्होंने हमला किया वह अपने को भारतीय नहीं मानते, भारत कि खुशी में शामिल नहीं होना चाहते । भारतीय विजय जलूस पर हमला कौनसी मानसिकता का परिचायक है। दुर्भाग्य है की ऐसे लोग भी भारत में रहते है ।
अब यदि देश में कुछ लोग अक्रांता औरंगज़ेब की कब्र पर टिप्पड़ियाँ कर रहे हैं तो मुस्लिम समाज के कुछ लोगों ने नागपुर में हिंदुओं के घरों में घुसकर तोड़फोड़ कर दी, उनके मंदिर तोड़ दिए, उनकी गाड़ियाँ आग के हवाले कर दी, हिंदू महिलाओं से बदतमीजी की । यह कौन से इस्लाम का प्रदर्शन था या कौन सी भारतीयता का परिचय था ।
यह सब संयोग नहीं प्रयोग ही दिखता है जिसे कुचला जाना अत्यावश्यक है । इसे धरना प्रदर्शन बिल्कुल नहीं कहा जा सकता ।
हाँ एक बात और जो लोग आजकल संविधान की किताब जेब में लेकर घूमते है , हर जगह संविधान की दुहाई देते हैं वह वक़्फ़ बिल पर हिंसात्मक भड़काऊ भाषण देकर किस संविधान का पालन कर रहे है। संविधान निमित्त किसी भी विषय पर संसद कोई क़ानून बनाता है तो वह सबके लिए मान्य होता है । आल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के आव्हान पर परसों दिल्ली के जंतर मंतर पर प्रदर्शन किया गया जिसमे इंडी गठबंधन, कांग्रेस, समाजवादियों, मुस्लिम संगठनों ने देश में हिसा फैलाने की अजीबोगरीब धमकियाँ दी ।
मुझे समझ नहीं आता ऐसे लोगों पर समय रहते सरकार कार्यवाही क्यों नहीं करती, यदि कानून कि कोई बाध्यता है तो उसे समाप्त क्यूँ नही किया जा सकता ।
इस प्रकार के अराजक तत्व भारत राष्ट्र के लिए बहुत घातक हैं और इनका इलाज़ तुरंत होना चाहिए , कहीं देर ना हो जाए।
कवर फायर देने वालों को भी बोलने लिखने की स्वतंत्रता के नाम पर स्वच्छंदता की इजाज़त नहीं होनी चाहिए ।