भोपाल की साहित्यिक चेतना को राष्ट्रीय पहचान देने वाली संतोष श्रीवास्तव

Santosh Srivastava, who gave national recognition to the literary consciousness of Bhopal

रविवार दिल्ली नेटवर्क

भोपाल : प्रख्यात साहित्यकार रामस्वरूप दीक्षित ने संतोष श्रीवास्तव के योगदान की सराहना करते हुए कहा है कि वे जिस भी शहर में रहती हैं, उसे अपनी सक्रियता से साहित्य का केंद्र बना देती हैं। उनके अनुसार, जीवन के इस पड़ाव पर जहाँ अधिकांश लोग विश्राम की राह चुनते हैं, वहीं संतोष श्रीवास्तव ने भोपाल आकर न केवल अपनी नई पहचान बनाई, बल्कि यहाँ के सांस्कृतिक परिदृश्य को भी समृद्ध किया।

बिना सरकारी सहायता के बड़ा आयोजन
रामस्वरूप दीक्षित ने विशेष रूप से ‘अंतरराष्ट्रीय विश्व मैत्री मंच’ का उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि आज के समय में, जब साहित्य के लिए अवसर और स्थान कम होते जा रहे हैं, संतोष श्रीवास्तव बिना किसी बाहरी संसाधन या सरकारी सहायता के हर साल एक भव्य राष्ट्रीय आयोजन करती हैं। इस आयोजन में शामिल होने के लिए देश भर से रचनाकार भोपाल जुटते हैं और साहित्य जगत को साल भर इस कार्यक्रम की प्रतीक्षा रहती है।

साहित्य और समाज का सम्मान
इस वार्षिक आयोजन की विशेषता ‘हेमंत स्मृति कविता पुरस्कार’ है। इसके साथ ही साहित्य और समाज सेवा के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य करने वाले व्यक्तियों को पुरस्कृत करना इस कार्यक्रम को और भी अर्थपूर्ण बनाता है। दीक्षित जी ने इसे एक बहुउद्देशीय मंच बताया जो भोपाल की साहित्यिक विरासत को लगातार आगे बढ़ा रहा है।