मथुरा का का मुन्ना भैया और माँ की सेवा

Service of Munna Bhaiya and Mother of Mathura

रविवार दिल्ली नेटवर्क

माँ का आशीर्वाद कितना फलदाई होता है इस बारे पूछो तो उत्तर प्रदेश के मथुरा में सौ साल पुराने राजनीतिक परिवार के मुन्ना भाईया (कृष्ण कुमार शर्मा) से पूछो। मुन्ना भैया का कहना है आप पर माँ का आशीर्वाद है तो आपका भगवान भी नहीं कुछ नहीं बिगाड सकता । इसका मतलब अगर आपकी माँ है तो आप माँ के आशीर्वाद लेकर जाएँगे तो आप को हर क्षेत्र में कामयाबी ममिलेगी ।मुन्ना भैया ने अपनी फेश बुक पर माँ के अंतिम समय की कुछ बातें साझा की है ।

29 फरवरी 2016- में माँ के पास कैलाश हॉस्पिटल में था, उनकी खतरे वाली डायलिसिस हो चुकी थी, पहले से तबियत बेहतर थी, तो लगा कि पिछले 13-14 सालों की तरह, माँ की उम्र का रिचार्ज फिर से हो गया है।
डॉक्टर ने बताया की एक डायलिसिस आज होनी है, तो वहाँ पहुँचे, आज माँ भजन सुना रही थी, सर पर हाथ रखा तो सारी थकावट दूर हो गई और इतने दिनों से पूरी नहीं हो पाई नींद आज पूरी हो गई है।

बगल के बिस्तर पर एक कम उम्र की बिटिया थी, उससे बात करके उसका शायद हौंसला बढ़ा रही थी, आदत थी उनकी यूँही सब उन्हें मांट की शेरनी कहते थे।

घर का एक बालक मुझसे और माँ से मिलने आया तो में शीशे की दूसरी ओर गया, मथुरा की जानकारी प्राप्त ही कर रहा था कि मन में कुछ बेचैनी सी हुई, मेरा चालक कन्हैया जो कि माँ की सेवा, मेरे बच्चों की तरह ही करता थ, डायलिसिस कक्ष से मेरी ओर भागता हुआ आ रहा था, मैंने भी उसकी तरफ़ तेजी दिखाई, कुछ चिकित्सक भी तेज़ी से कक्ष की ओर दौड़े, कुछ समय उन्होंने प्रयास किया परंतु जो माँ अक्सर कहती थी विधि का विधान सदैव अटल रहता है, आज माँ अपनी गौलोक यात्रा पर निकल चुकी थी, पीछे छूट गई थी उनसे लगाव वाली मुस्कुराती देह और बेबस- असहाय सा, मुन्ना भैया (सबसे छोटा था तो माँ प्यार से मुन्ना भैया ही बुलाती थी, उसी नाम से सभी जानने व बुलाने लगे)।

साधनों के अभाव में, स्वतंत्रता संग्राम आंदोलन में पिता और उनके साथियों का साथ देने से; हम भाइयों को पढ़ाने के लिए खेतों में काम करने से ले कर, सभी को शिक्षित बनाने तक; ग्राम पचहरा से मथुरा शहर में स्थापित व्यापार तक; एक छोटे से दबे कुचले गाँव से 30/40 लगातार विधान सभा की तहलीज तक; हम 4 भाइयों के परिवार से हजारो लाखो के लोकमणि कुटुंभ तक, अध्यात्म में अपने छोटे से मंदिर से महामंडलेश्वरों को आशीर्वाद तक का सफर लगभग 96 साल में पूरा किया।

माँ देह के रूप में जरूर मेरे साथ नहीं है लेकिन अपने विराट स्वरूप में, माँ सदैव मेरे साथ रहती है, माँ की पूजा आज भी भगवान की पूजा से पहले, उनके सिखाए मूल्यों के साथ ज़िन्दगी में परिस्थितियों से लड़ कर स्थान बनाने का प्रयास निरंतर अग्रसर है।

अग्रेज़ी कैलेंडर की तारीख़ 29 फरवरी के हिसाब से माँ की पुण्यतिथि पर उन्हें उनके मुन्ना भैया का नमन ।

‘नास्ति मातृसमा छाया, नास्ति मातृसमा गतिः।
नास्ति मातृसमं त्राण, नास्ति मातृसमा प्रिया।।’