राजस्थान में एसआईआर का काम पूरा और प्रत्येक 100 मतदाताओं में लगभग 6 नाम हटाए गए

SIR work completed in Rajasthan and approximately 6 names removed for every 100 voters

गोपेन्द्र नाथ भट्ट

राजस्थान में मतदाता सूचियों का विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर ) का काम पूरा हो गया है। राजस्थान में अब 5 करोड़ 15 लाख 19 हजार 929 वोटर्स हैं। एसआईआर के बाद मतदाता सूची का अंतिम प्रकाशन किया गया है। राज्य में एसआईआर- 2026 की प्रक्रिया पूरी होने के परिणामस्वरूप मतदाता सूचियों में बड़े पैमाने पर नामों के हटाए जाने (डिलीट) के आंकड़े सामने आए हैं। राज्य भर में कुल 31,36,286 (31.36 लाख) मतदाताओं के नाम अंतिम मतदाता सूची से हटाए गए हैं।

राजस्थान में एसआईआर शुरू होने से पहले कुल 5,46,56,215 मतदाता सूचीबद्ध थे। अंतिम प्रकाशित मतदाता सूची में यह संख्या 5,15,19,929 रह गई है। मतदाता सूचियों से हटाए गए नामों की संख्या कुल मतदाताओं का लगभग 5.74 प्रतिशत है यानी प्रत्येक 100 मतदाताओं में लगभग 6 नाम हटाए गए हैं।

अंतिम मतदाता सूची से उन नामों का हटाया गया है जो या तो गलत, मृत, दोहरी प्रविष्टि या अन्य कारणों से अब मान्य नहीं माने गए है। एसआईआर का मुख्य उद्देश्य मतदाता सूची को अधिक शुद्ध, सटीक और अद्यतन बनाना है ताकि केवल योग्य और वास्तविक मतदाता ही चुनाव में वोट दे सकें। एसआईआर के दौरान न केवल अमान्य मतदाताओं के नाम हटाने की प्रक्रिया चली, बल्कि नए मतदाताओं के नाम सूची में जोड़ने का काम भी हुआ जिसके कारण 12,91,365 नए मतदाता भी अंतिम सूची में शामिल किए गए हैं। इससे सूची कुल मिलाकर अधिक सटीक और समावेशी बनी।

मतदाता सूचियों।से नाम हटाने के पीछे कई कारण शामिल रहे, जिनमें प्रमुख रूप से जिन मतदाताओं की मृत्यु हो चुकी थी, उनके नाम हटाए गए।दूसरा कारण मतदाताओं के स्थानांतरण रहा यानी जो मतदाता पहले से ही अन्य राज्यों/स्थानों में स्थायी रूप से चले गए। तीसरा कारण मतदाताओं के डुप्लीकेट नाम और दोहरी प्रविष्टि अथवा जिनका रिकॉर्ड एक से अधिक स्थानों पर पाया जाना रहा। इसके अलावा अन्य सूचीगत विसंगतियां जैसे पता न मिलना या मान्य दस्तावेजों का अभाव आदि कारण रहें। प्रदेश के कई जिलों में भी एसआईआर के बाद बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम हटाए गए। उदाहरण के तौर पर जोधपुर जिले में एसआईआर प्रक्रिया के बाद लगभग 2,03,000 से अधिक नाम हटाए गए। इसी प्रकार उदयपुर जिले में लगभग 1,58,189 नाम हटाए गए। हालांकि इसके विरोध में प्रतिपक्ष के नेताओं के बयान भी सामने आए है

एसआईआर प्रक्रिया के पूरा होने से राजस्थान में लगभग 31.36 लाख मतदाताओं के नाम हटाए गए हैं, जिससे मतदाता सूची अब अधिक विश्वसनीय अपडेट, पहले से अधिक शुद्ध और भरोसेमंद बनी है। इससे न केवल चुनावी पारदर्शिता में वृद्धि होगी, बल्कि मतदाता अधिकारों का संरक्षण भी सुनिश्चित होगा। यह कदम चुनावी प्रक्रिया को मजबूत बनाता है और अवैध, असत्यापित या अस्तित्वहीन रिकॉर्ड को हटाकर प्रणाली को अधिक न्यायसंगत बनाता है।

इस पूरी प्रक्रिया का उद्देश्य लोकतांत्रिक प्रणाली को गंभीरता से सुदृढ़ करना और प्रत्येक योग्य मतदाता को उचित प्रतिनिधित्व का अवसर देना है।

राजस्थान में मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर ) का कार्य पूर्ण होना राज्य की लोकतांत्रिक प्रक्रिया के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है। चुनावी प्रणाली की विश्वसनीयता का आधार ही अद्यतन और शुद्ध मतदाता सूची होती है। ऐसे में यह प्रक्रिया केवल प्रशासनिक औपचारिकता नहीं, बल्कि लोकतंत्र की जड़ों को सुदृढ़ करने का प्रयास है। मतदाता सूची वह दस्तावेज है जिसके आधार पर नागरिक अपने मताधिकार का प्रयोग करते हैं। यदि सूची में त्रुटियां हों जैसे मृत व्यक्तियों के नाम, एक ही व्यक्ति का दोहराव, स्थानांतरित मतदाताओं के पुराने पते आदि तो चुनाव की पारदर्शिता पर प्रश्नचिह्न लग सकता है। विशेष गहन पुनरीक्षण का उद्देश्य इन कमियों को दूर कर सूची को अधिक सटीक और अद्यतन बनाना होता है।

यह संपूर्ण प्रक्रिया भारत के चुनाव आयोग के दिशा-निर्देशों के अंतर्गत संचालित की जाती है। राज्य स्तर पर मुख्य निर्वाचन अधिकारी, जिला निर्वाचन अधिकारी और बूथ स्तर अधिकारियों (बी एल ओ ) की सक्रिय भूमिका रहती है। घर-घर सत्यापन, दावे और आपत्तियों का निस्तारण, नए मतदाताओं का पंजीकरण तथा पात्रता की जांच—इन सभी चरणों के माध्यम से सूची को अंतिम रूप दिया जाता है।

विशेष गहन पुनरीक्षण के दौरान तीन प्रमुख उद्देश्यों पर विशेष ध्यान दिया गया है। नए मतदाताओं का समावेशन, विशेषकर 18 वर्ष की आयु पूरी करने वाले युवाओं का। दोहरे और मृत मतदाताओं के नाम हटाना, जिससे सूची की शुद्धता बढ़े। पता परिवर्तन और अन्य त्रुटियों का सुधार, ताकि मतदान के दिन भ्रम की स्थिति न बने।

राजस्थान जैसे भौगोलिक रूप से विशाल राज्य में यह कार्य चुनौतीपूर्ण था। शहरी क्षेत्रों में प्रवास और ग्रामीण क्षेत्रों में सीमित डिजिटल साक्षरता जैसी परिस्थितियों के बावजूद प्रशासनिक टीमों ने व्यापक अभियान चलाकर प्रक्रिया को समयबद्ध रूप से पूरा किया। डिजिटल प्लेटफॉर्म और ऑनलाइन फॉर्म के उपयोग से प्रक्रिया अधिक सुगम बनी।

युवा और महिला मतदाताओं पर फोकस
इस पुनरीक्षण अभियान में युवा मतदाताओं के पंजीकरण पर विशेष जोर दिया गया। महाविद्यालयों और शैक्षणिक संस्थानों में जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए गए। इसके साथ ही महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने पर भी ध्यान केंद्रित किया गया, ताकि लिंगानुपात संतुलित रहे और लोकतांत्रिक प्रतिनिधित्व व्यापक हो। मतदाता सूची में संतुलित और समावेशी प्रतिनिधित्व लोकतंत्र की गुणवत्ता को बढ़ाता है। यदि समाज के सभी वर्गों की समान भागीदारी सुनिश्चित हो, तो नीति निर्माण अधिक प्रभावी और जनोन्मुखी होता है।

एस आई आर प्रक्रिया के दौरान पारदर्शिता बनाए रखने के लिए प्रारूप प्रकाशन, दावे-आपत्तियों की सुनवाई और अंतिम प्रकाशन जैसे चरणों का पालन किया गया। नागरिकों को ऑनलाइन माध्यम से भी अपनी जानकारी जांचने और सुधार का अवसर मिला। तकनीकी एकीकरण से न केवल समय की बचत हुई, बल्कि डेटा की शुद्धता भी बढ़ी।

राज्य में बूथ स्तर अधिकारियों की भूमिका विशेष उल्लेखनीय रही। उन्होंने घर-घर जाकर सत्यापन किया और लोगों को मतदाता सूची में नाम जोड़ने या संशोधन की प्रक्रिया समझाई। इससे जमीनी स्तर पर विश्वास और सहभागिता बढ़ी।

मतदाता सूची का गहन पुनरीक्षण चुनावी पारदर्शिता के लिए अनिवार्य है। यह प्रक्रिया राजनीतिक दलों के लिए भी महत्वपूर्ण होती है, क्योंकि वे मतदाता आधार का आकलन इसी के आधार पर करते हैं। सूची की शुद्धता चुनाव परिणामों की निष्पक्षता में योगदान देती है और अनावश्यक विवादों को कम करती है।

साथ ही, यह नागरिकों में लोकतांत्रिक चेतना को भी मजबूत करती है। जब लोग देखते हैं कि उनकी जानकारी अद्यतन की जा रही है और उन्हें प्रक्रिया में भाग लेने का अवसर दिया जा रहा है, तो मतदान के प्रति उनका विश्वास बढ़ता है। हालांकि एस आई आर का कार्य पूर्ण हो चुका है,लेकिन यह प्रक्रिया निरंतर चलने वाली है। प्रवास, शहरीकरण और जनसंख्या वृद्धि के कारण नियमित अद्यतन आवश्यक रहेगा। भविष्य में डिजिटल सत्यापन और आधार-लिंकिंग जैसे तकनीकी उपायों से प्रक्रिया और अधिक सुदृढ़ की जा सकती है, बशर्ते निजता और विधिक प्रावधानों का ध्यान रखा जाए।

राजस्थान में मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण का कार्य पूर्ण होना लोकतांत्रिक मजबूती का संकेत है। यह केवल आंकड़ों का संशोधन नहीं, बल्कि नागरिक अधिकारों की सुरक्षा और चुनावी पारदर्शिता का आधार है। यदि इसी तत्परता और पारदर्शिता के साथ आगे भी अद्यतन की प्रक्रिया जारी रहती है, तो राज्य की चुनाव प्रणाली और अधिक विश्वसनीय और सशक्त बनेगी। लोकतंत्र की सफलता मतदाता सूची की शुद्धता पर निर्भर करती है, और राजस्थान ने भी इस दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम आगे बढ़ाया है।

एस आई आर का काम पूरा होने के बाद अब निर्वाचन के काम में जुटे अधिकारियों-कर्मियों के तबादले, पोस्टिंग हो सकेंगे। इस काम के चलते निर्वाचन के काम में जुटे अधिकारियों-कर्मियों के तबादले, पोस्टिंग पर रोक थी। जानकारों के अनुसार राज्य में पंचायतीराज और शहरी निकाय चुनाव से पहले भारी संख्या में तबादले होने की संभावना हैं. करीब दो दर्जन जिलों में कलेक्टर बदले जा सकते हैं. इसी के साथ उपखंडों में भी बड़ी संख्या में एस डी ओ बदले जाएंगे तो वहीं सचिवालय में भी लंबे समय से पोस्टेड अधिकारी इधर-उधर हों सकते है।