सपा सांसद बर्क ने पुरातत्व विभाग की विश्वसनीयता पर उठाया सवाल

SP MP Burke raised questions on the credibility of Archeology Department

अजय कुमार

लखनऊ : उत्तर प्रदेश के जिला संभल की विवादित जामा मस्जिद की रंगाई पुताई की अनुमति हाईकोर्ट से नहीं मिलने पर समाजवादी पार्टी के सांसद जियाउर्रहमान बर्क ने कहा है कि मस्जिद में रंगाई-पुताई की बात कोई बड़ी चीज नहीं है. मस्जिद या किसी भी दूसरे धार्मिक स्थल पर एक रुटीन के अनुसार रंगाई पुताई होती है. हम कानून और कोर्ट को मानने वाले लोग हैं. हाईकोर्ट द्वारा जो कमेटी बनाई गई थी, अगर उसमें हाईकोर्ट ने अपना प्रतिनिधि भेजा होता तो रिपोर्ट इस तरह आने के बजाय सही आती. सभी लोग अच्छी तरह से जानते हैं कि एएसआई किसके कहने पर करती है काम?गौरतलब हो कि संभल जामा-मस्जिद की रंगाई-पुताई को लेकर हाईकोर्ट में एक याचिका दायर की गई थी. लेकिन हाईकोर्ट ने मामले में भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) की रिपोर्ट को संज्ञान में लेते हुए रंगाई-पुताई की अनुमति नहीं दी. हालांकि कोर्ट ने साफ-सफाई की अनुमति जरूर दी है. खैर सांसद महोदय का गुस्सा अपनी जगह है,लेकिन यह कोई नई बात नहीं है। अयोध्या में भी यही होता था। रामलला टाट में रहते थे और उनका फटा टाट बदलने तक से सुप्रीम कोर्ट तक से अनुमति की जरूरत पड़ जाती थी। टाट ही नहीं कपड़े,प्रसाद भोग लगाने तक के लिये कोर्ट कहचरी के चक्कर लगाना पड़ते थे।

बता दें यूपी सरकार द्वारा संभल की जामा मस्जिद को लेकर दिए गए हलफनामे में मस्जिद सरकारी जमीन पर बने होने का दावा किया है. बर्क ने सरकार के हलफनामे पर भी सवाल उठाया है. उन्होंने कहा कि ये बेवकूफी की बात है. हमारे धर्म में साफ कहा गया है कि जमीन को खरीद कर ही मस्जिद बनाई जा सकती है. सरकार के पास इसके कोई सबूत नहीं हैं. लेकिन इस तरह की बात कह कर लोगों को गुमराह करना ठीक नहीं है. जामा मस्जिद अपनी जगह पर बिल्कुल ठीक है.

ज्ञातव्य हो कि पिछले साल नवंबर में संभल की शाही जामा मस्जिद में सर्वेक्षण के दौरान हिंसा भड़क गई थी. इस मामले में दर्जनों लोगों की गिरफ्तारी हुई थी. हालांकि, अभी भी कई लोग फरार हैं. पुलिस लंबे समय से उनकी तलाश में जुटी है. बीते दिनों पुलिस ने फरार उपद्रवियों की फोटो सार्वजनिक जगहों पर चस्पा करते हुए, लोगों से उनके बारे में जानकारी मांगी थी. अभी तक संभल हिंसा में शामिल 76 आरोपियों को पुलिस गिरफ्तार करके जेल भेज चुकी है. अब पुलिस सीसीटीवी फुटेज के आधार पर ऐसे उपद्रवियों की पहचान में जुटी हुई है जो कि 24 नवंबर 2024 की हिंसा में शामिल थे. हिंसा की जांच के लिए गठित एसआईटी टीम के द्वारा संभल शहर के कई इलाकों में उपद्रवियों के पोस्टर फोटो के साथ चस्पा किए गए हैं. सार्वजनिक स्थानों पर लगाए गए पोस्टर में साफ तौर पर लिखा गया है कि 24 नवंबर 2024 की हिंसा में यह व्यक्ति शामिल था जिसकी पहचान नहीं हो पाई है. इनका नाम और पता बताने वाले को इनाम दिया जाएगा. जिस किसी व्यक्ति को इसके बारे में जानकारी मिले तो वह संभल पुलिस के नंबरों पर सूचित करें.

दरअसल, संभल की जामा मस्जिद को लेकर हिन्दू और मुस्लिम पक्ष के बीच विवाद चल है। हिन्दू पक्ष जामा मस्जिद के मंदिर होने का दावा कर रहा है। तत्पश्चात, जिले की सिविल कोर्ट के आदेश के बाद 19 नवंबर को संभल की इस मस्जिद का सर्वे भी किया गया है, जिसके बाद प्रदेश में सांप्रदायिक सियासत एक बार फिर गरमा गई है। हिंदू पक्ष दावा कर रहा है कि जामा मस्जिद प्राचीन हरिहर मंदिर थी, जहां पर कलियुग में विष्णु के दशावतारों में से एक कल्कि का अवतार होने वाला है। वहीं, मुस्लिम पक्ष इस दावे को सिरे से खारिज कर रहा है। मुस्लिम पक्ष का कहना है कि मस्जिद में हिंदू मंदिर होने के कोई सबूत नहीं हैं।