
गोपेन्द्र नाथ भट्ट
विधानसभा में कम से कम कितनी बैठकें होनी चाहिए, इसे लेकर इन दिनों मीडिया में एक बहस चल रही है और इस बहस में पूर्व में रहें पीठासीन अधिकारी भी सम्मिलित हो कर अपने विचार व्यक्त कर रहें है। हाल ही दिल्ली विधानसभा में हुए देश के सभी विधानसभाध्यक्षों के सम्मलेन में देश के गृह मंत्री अमित शाह और लोकसभाध्यक्ष ओम बिरला सहित अन्य कई वक्ताओं ने विधान मंडलों के बाधा रहित संचालन और देश प्रदेश से जुड़े महत्वपूर्ण मसलों और मुद्दों पर चर्चा के लिए विधान मंडलों की अधिक से अधिक बैठकों के आयोजनों की आवश्यकता पर जोर दिया ।
इसी क्रम में राजस्थान विधानसभा के अध्यक्ष वासुदेव देवनानी भी विधानसभा सत्रों की संख्या बढ़ाने के मुखर समर्थक हैं और इस दिशा में व्यापक रूप से सकारात्मक पहल भी कर रहे हैं। देवनानी ने विधानसभा में कई नवाचार भी किए हैं। चाहे वह बैठकों की अवधि हो,सभी दलों से संवाद हो, या तकनीकी सुधार अथवा अन्य विविध क्षेत्रों के नवाचार ही क्यों न हो।
विधानसभाध्यक्ष वासुदेव देवनानी ने कई बार राजस्थान विधानसभा में सदन के सत्र की संख्या बढ़ाने की बात कही है और उन्होंने इस दिशा में पहल भी की है। वे कई बार कह चुके है कि उनकी मंशा संसद की तरह राजस्थान में भी तीन सत्र चलाने की है ताकि सदन के सत्र की सीटिंग बढ़ सके और जनहित के मुद्दों पर अधिक चर्चा और उनका समाधान हो सकें।
वे अपने वक्तव्य के माध्यम से कई बार अपने इस दृष्टिकोण को प्रकट कर कह चुके है कि वर्तमान के विधान मंडलों में बैठकों की संख्या बढ़ाने की ज़रूरत है। उन्होंने यह भी माना है कि राजस्थान विधानसभा में पहले 50 से 60 दिनों तक सत्र होते थे, लेकिन अब यह घटकर लगभग 30 दिनों हो गए है। वे इसे बढ़ाकर 40 से 50 दिनों तक ले जाना चाहते है। उन्होंने इसके लिए एक व्यावहारिक पहल और नवाचार भी किया है और संसद की तर्ज पर राजस्थान में भी हर विधानसभा सत्र से पहले सर्वदलीय बैठकों को प्रारंभ किया है ताकि सभी दलों से सुझाव लेकर सदन के कार्य को सुचारू और सकारात्मक बनाया जा सके। उनका कहना है कि राजस्थान का यह सदन लगभग आठ करोड़ प्रदेशवासियों और नागरिकों की आवाज़ है तथा उसकी कार्य-प्रणाली लोग बारीकी से देखते हैं।
विधानसभाध्यक्ष वासुदेव देवनानी प्रत्येक विधानसभा सत्र के पूर्व विभिन्न तैयारियों जैसे प्रश्नों की लॉटरी, मुद्रण, तकनीकी व्यवस्थाएं, मीडिया सुविधा आदि की स्वयं समीक्षा कर हर कार्य की समयबद्धता भी सुनिश्चित करते है।
साथ ही विधानसभा की कार्यवाही को अधिक पारदर्शी और निष्पक्ष बनाने, वन नेशन वन एप्लिकेशन के तहत विधानसभा में पेपर लेस व्यवस्था, तकनीकी सुधार लागू किए जाने आदि को भी स्वयं देखते है। उदाहरण के लिए राजस्थान विधानसभा में हर विधायक की सीट पर आई पेड़ और उनके निवास पर भी उन्हें कम्यूटर सेवा उपलब्ध करवा सशक्त करना आदि उनके सकारात्मक कदम हैं।
आगामी सोमवार एक सितम्बर से शुरू होने वाले सोलहवीं राजस्थान विधान सभा के चौथे चतुर्थ सत्र की तैयारियों के लिए भी विधानसभाध्यक्ष वासुदेव देवनानी ने शुक्रवार को विधानसभा सचिवालय के वरिष्ठ अधिकारियों की बैठक आयोजित कर विस्तार से उनसे सत्र की तैयारियों की जानकारी ली तथा अधिकारियों को आवश्यक दिशा निर्देश भी दिये।
विधासभाध्यक्ष देवनानी ने बताया कि नेवा वेबसाइट पर विधायकगण ऑनलाइन प्रश्न अपलोड कर रहे है। चतुर्थ सत्र में लगभग 70 प्रतिशत प्रश्न विधान सभा सचिवालय को ऑनलाइन प्राप्त हुए है। सोलहवीं राजस्थान विधान सभा के चतुर्थ सत्र से ध्यानाकर्षण प्रस्ताव, विशेष उल्लेख प्रस्ताव, स्थगन प्रस्ताव और पर्ची संबंधी अधिकांश विधायी प्रक्रियाओं को ऑनलाइन किया गया है। यह सभी प्रस्ताव नेवा प्लेटफार्म पर विधानसभा द्वारा ऑनलाइन ही स्वीकार किये जा रहे है। विधायकगण की विधायी भूमिकाओं में कोई बदलाव नहीं किया गया है। विधायी कार्यों को ऑनलाइन किये जाने की सूचना बुलेटिन के माध्यम से 18अगस्त को विधायक गण को दे दी गई है। देवनानी ने बताया कि विधान सभा में विधायी प्रक्रियाओं की ऑनलाइन व्यवस्था प्रारम्भिक स्तर पर है। ऐसी स्थिति में इस व्यवस्था में कुछ तकनीकी कठिनाइया आ सकती है। इससे विधायकगण परेशानी महसूस ना करें। विधान सभा सचिवालय तथा नेवा की टीम विधायकगण के लिये ऑनलाइन प्रक्रिया की कठिनाईयों को दूर करने के लिये सतत रूप से कक्ष संख्या 733 में उपलब्ध है। विधायकगण ऑनलाइन प्रक्रिया में आने वाली कठिनाइयों को दूर करने के लिये नेवा सेवा केन्द्र में सम्पर्क कर सकते है। देवनानी ने बताया कि विधायक गण द्वारा प्रस्तुत किये जाने वाले प्रस्तावों तथा पर्ची के नियमों और प्रक्रियाओं में किसी प्रकार का कोई बदलाव नहीं किया गया है। विधायी प्रस्तावों को प्रस्तुत करने की प्रक्रिया ही ऑनलाइन की गई है। सुलभ और त्वरित कार्य किये जाने के लिए ऑनलाइन व्यवस्था आज के तकनीकी युग की आवश्यकता है। ऑनलाइन व्यवस्था पर भविष्य के दृष्टिगत कार्य किया जाना नितांत आवश्यक है। इससे कागज और प्रिंटिंग व्यय में बचत होती है। यह व्यवस्था पर्यावरण के अनुकूल भी है।
देवनानी ने बताया कि डिजिटल दुनिया में ऑनलाइन व्यवस्था समय प्रबंधन के साथ वर्चुअल संचार प्लेटफॉर्म पर तकनीकी प्रगति और कार्यों को कुशलतापूर्वक व्यवस्थित करने, वर्कफ़्लो को सुव्यवस्थित करने और दूरस्थ कार्य व्यवस्था को सुविधाजनक बनाने में सहायता करती है। इस व्यवस्था का प्रभावी ढंग से लाभ उठाकर कार्य के समय को कम कर सकते हैं। श्री देवनानी ने कहा कि ऑनलाइन प्रक्रिया की अनेक विशिष्टतायें है, जो इसे पारंपरिक ऑफलाइन प्रक्रिया से अलग बनाती है। इस व्यवस्था से विधायकगण किसी भी स्थान से किसी भी समय प्रक्रिया में भाग ले सकते हैं। बदलते युग में ग्रामीण और दूर-दराज क्षेत्रों में भी इंटरनेट सेवाओं की उपलब्धता से कार्य सुलभ, तीव्र, पारदर्शी, कम लागत के साथ ही सुविधाजनक हो गया है। नेवा प्लेटफार्म पर विधायी संबंधी सभी जानकारियां एक ही प्लेटफार्म पर सुरक्षित है। यह व्यवस्था विधायकगण के लिये विधान सभा संबंधी कार्यों के विश्लेषण करने और रिकॉर्ड रखने में भी आसान है। आगामी चरणों में विधानसभा सत्र से संबंधित कार्य नेवा प्लेटफार्म पर ही संपादित किए जाने की कार्य योजना है । इनमें विधायी कार्य यथा विधेयकों पर संशोधन प्रस्ताव प्राप्त करने तथा बजट मांगों पर कटौती प्रस्ताव प्राप्त करने संबंधी महत्वपूर्ण कार्य भी सम्मिलित होंगे।
इस बीच विधायी जानकारी रखने वाले विशेषज्ञों का कहना है कि विधानसभा में कम से कम कितनी बैठकें होनी चाहिए। इसे लेकर मीडिया में बहस भले ही चले लेकिन, इसका सबसे महत्वपूर्ण पहलू यह ज़रूरी है कि विधान मंडलों की बैठकें निर्बाध रूप से चले और सदन की बैठकों की संख्या अधिकाधिक संख्या में बढ़ाई जाए ताकि न केवल सरकार और कार्यपालिका की जवाबदेही सुनिश्चित कराई जा सके वरन जनहित के अहम विषयों पर सदन में सार्थक बहस और उनका समाधान निकल सके।