छात्राओं को मिला तनाव से निपटने का मंत्र

Students got mantra to deal with stress

छात्राओं के लिए तनाव प्रबंधन की नई राह

मुंबई (अनिल बेदाग) : आज के प्रतिस्पर्धी और डिजिटल दौर में जहाँ उपलब्धियाँ जितनी तेज़ हैं, दबाव उतना ही गहरा होता जा रहा है। खासतौर पर युवा पीढ़ी के लिए। पढ़ाई, करियर की अनिश्चितता, सामाजिक अपेक्षाएँ और लगातार ऑनलाइन रहने की मजबूरी ने मानसिक स्वास्थ्य को एक अहम मुद्दा बना दिया है। ऐसे समय में अगर युवाओं को सही मार्गदर्शन, संवेदनशील संवाद और वैज्ञानिक समझ मिल जाए, तो तनाव बोझ नहीं बल्कि संभाली जा सकने वाली प्रक्रिया बन सकता है। इसी सोच के साथ सेंट पॉल्स इंस्टिट्यूट ऑफ कम्युनिकेशन एजुकेशन फॉर विमेन में आयोजित तनाव प्रबंधन सत्र ने छात्राओं के मन और मस्तिष्क को नई स्पष्टता दी।

सेंट पॉल्स इंस्टिट्यूट ऑफ कम्युनिकेशन एजुकेशन फॉर विमेन की 100 से अधिक छात्राओं ने गुरुवार, 5 फरवरी 2026 को मुंबई के होली फैमिली हॉस्पिटल, बांद्रा (पश्चिम) द्वारा आयोजित एक ज्ञानवर्धक और संवादात्मक तनाव प्रबंधन सत्र में भाग लिया। इस विशेष सत्र का नेतृत्व प्रसिद्ध मनोचिकित्सक डॉ. नीति सप्रू और डॉ. अदिति उदेशी ने किया, जिन्होंने आज की युवा पीढ़ी के सामने उभरती मानसिक स्वास्थ्य चुनौतियों पर गहन प्रकाश डाला।

यह सत्र केवल व्याख्यान तक सीमित नहीं रहा, बल्कि छात्राओं के अनुभवों, सवालों और भावनाओं को केंद्र में रखते हुए एक खुला और भरोसेमंद संवाद स्थापित किया गया। शैक्षणिक दबाव, सामाजिक तुलना, भविष्य की चिंताएँ और डिजिटल ओवरलोड जैसे मुद्दों को सरल भाषा और व्यावहारिक उदाहरणों के माध्यम से समझाया गया।

डॉ. नीति सप्रू ने तनाव को लेकर प्रचलित भ्रांतियों को तोड़ते हुए कहा, “तनाव कोई कमजोरी नहीं है; यह आधुनिक जीवनशैली की एक स्वाभाविक प्रतिक्रिया है। जब हम तनाव को समझना सीखते हैं, तब हम अपने जीवन स्तर और शैक्षणिक प्रदर्शन दोनों में सकारात्मक बदलाव ला सकते हैं।” वहीं डॉ. अदिति उदेशी ने जेन ज़ी की विशिष्ट मानसिक चुनौतियों पर प्रकाश डालते हुए कहा, “आज की युवा पीढ़ी जिस तरह के दबावों से गुजर रही है, वे पहले की पीढ़ियों से अलग हैं। इन चुनौतियों की सही पहचान और समय पर सहयोग युवाओं को अधिक संतुलित और स्वस्थ जीवन की ओर ले जा सकता है।”

कार्यक्रम का सबसे सशक्त पहलू रहा छात्राओं की सक्रिय भागीदारी और खुलापन। कई छात्राओं ने अपने अनुभव साझा किए, सवाल पूछे और यह महसूस किया कि मानसिक स्वास्थ्य पर बात करना न तो कमजोरी है और न ही वर्जित। यह सत्र छात्राओं के लिए न केवल जागरूकता का माध्यम बना, बल्कि उन्हें यह भरोसा भी दिया कि सही मार्गदर्शन और समय पर हस्तक्षेप से वे शैक्षणिक और व्यक्तिगत जीवन की चुनौतियों का सामना आत्मविश्वास, स्पष्टता और भावनात्मक मजबूती के साथ कर सकती हैं।