दिल्ली विधानसभा सचिवालय ने पंजाब पुलिस को रिपोर्ट सौंपने लेकिन दिया 3 दिन का समय ; मांगा था 10 दिन का समय

The Delhi Assembly Secretariat granted Punjab Police three days to submit its report, but had requested 10 days

  • विधानसभा अध्यक्ष श्री विजेंद्र गुप्ता ने पंजाब पुलिस की कार्रवाई पर उठाए सवाल; रिपोर्ट जमा करने की समय सीमा घटाई
  • पंजाब पुलिस की हस्तक्षेप को राजनीतिक कदम करार, 15 जनवरी तक रिपोर्ट सौंपने का निर्देश
  • आपत्तिजनक टिप्पणियों पर विवाद: दिल्ली विधानसभा ने अपने अधिकार क्षेत्र का दावा किया, गुरुवार तक रिपोर्ट सौंपी जाए

प्रमोद शर्मा

नई दिल्ली : “पंजाब पुलिस ने दस दिन का समय मांगा है, लेकिन मामले की गंभीरता को देखते हुए दिल्ली विधानसभा सचिवालय ने उन्हें केवल तीन दिन यानी 15 जनवरी तक रिपोर्ट सौंपने का समय दिया है,”, यह बात आज दिल्ली विधानसभा के माननीय अध्यक्ष श्री विजेंद्र गुप्ता ने 6 जनवरी को विपक्ष के नेता द्वारा प्रयोग किए गए अमर्यादित और आपत्तिजनक शब्दों से उत्पन्न हालिया घटनाक्रम पर आयोजित प्रेस वार्ता को संबोधित करते हुए कही। गौरतलब है कि दिल्ली विधानसभा सचिवालय ने पंजाब पुलिस को इस मुद्दे पर अपनी स्थिति स्पष्ट करने के लिए 48 घंटे का समय दिया था , जिसके जवाब में उन्होंने 10 दिन का समय मांगा था।

माननीय अध्यक्ष ने बताया कि दिल्ली विधानसभा सचिवालय द्वारा पंजाब के डीजीपी, स्पेशल डीजीपी (साइबर सेल) तथा जालंधर के पुलिस आयुक्त को नोटिस जारी किए गए हैं। पंजाब पुलिस ने यह दावा किया कि एफआईआर दर्ज करना और फॉरेंसिक जांच कुछ ही घंटों में कर दी गई, किंतु विधानसभा के नोटिस का जवाब देने के लिए दस दिन का समय मांगा गया है। अध्यक्ष ने कहा कि इससे जांच एजेंसी की स्वतंत्रता और निष्पक्षता पर गंभीर प्रश्न उत्पन्न होते हैं। उन्होंने आगे कहा कि मामले की गंभीरता को देखते हुए दिल्ली विधानसभा सचिवालय ने स्पष्ट कर दिया है कि पूर्ण रिपोर्ट प्रस्तुत करने के लिए केवल तीन दिन का समय दिया गया है।

श्री गुप्ता ने ज़ोर देकर कहा कि यह मामला सीधे-सीधे दिल्ली विधानसभा के अधिकार क्षेत्र से संबंधित है और सभी मूल वीडियो एवं दस्तावेज विधानसभा की संपत्ति हैं। उन्होंने यह प्रश्न उठाए कि पंजाब सरकार ने फॉरेंसिक जांच कैसे प्रारंभ की, आदेश किसने और किस आधार पर जारी किए, तथा कौन-सा वीडियो सामग्री जांच के लिए ली गई, जबकि न तो विधानसभा से संपर्क किया गया और न ही कोई दस्तावेज मांगे गए।

अध्यक्ष ने कहा कि घटनाक्रम से प्रतीत होता है कि तथ्यों की स्पष्टता के बजाय भ्रम पैदा करने और जनता को गुमराह करने का प्रयास किया जा रहा है, जबकि लोगों की भावनाएँ पहले ही आहत हो चुकी हैं।

श्री गुप्ता ने बताया कि पंजाब पुलिस ने दस दिन का समय माँगा था, दिल्ली विधानसभा सचिवालय ने इसे अनुचित और मामले को अनावश्यक रूप से विलंब करने का प्रयास मानते हुए केवल तीन और प्रदान किए है। पंजाब पुलिस को निर्देश दिया गया है कि 15 जनवरी तक पूर्ण रिपोर्ट सभी तथ्यों और स्पष्टीकरणों सहित प्रस्तुत की जाए, ताकि आगे की कार्रवाई की जा सके।

इस मामले को कानूनी रूप से संवेदनशील और जनता की भावनाओं से सीधे जुड़ा हुआ बताते हुए विधानसभा अध्यक्ष ने कहा कि घटनाक्रम स्पष्ट रूप से राजनीतिक हस्तक्षेप की ओर संकेत करता है, और यह उन लोगों द्वारा किया जा रहा है जो दिल्ली विधानसभा में विपक्ष की भूमिका में हैं। उन्होंने कहा कि सदन की गरिमा को कमज़ोर करने की किसी भी साज़िश को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

अध्यक्ष ने बताया कि 6 जनवरी की घटना ने सदन के कार्य संचालन को गंभीर रूप से बाधित किया और विपक्ष के नेता के सदन में उपस्थित न होने के कारण लगातार व्यवधान उत्पन्न हुए।

उन्होंने कहा कि 7 जनवरी को सदन की कार्यवाही से संबंधित वीडियो देखने के बाद यह स्पष्ट हुआ कि विपक्ष द्वारा की गई टिप्पणियों से लोगों की भावनाएँ आहत हुई हैं, विशेष रूप से इसलिए कि वे पूज्य गुरुओं के प्रति अश्रद्धा के रूप में देखी गईं। सदस्यों की सर्वसम्मति थी कि विपक्ष के नेता सदन में आएँ और बिना शर्त क्षमा मांगें, किंतु ऐसा नहीं हुआ, जिसके परिणामस्वरूप 6, 7 और 8 जनवरी को कार्यवाही बाधित रही।

श्री गुप्ता ने आगे बताया कि मामले की गंभीरता और भावनात्मक पहलू को देखते हुए 8 जनवरी को निर्णय लिए गए और विपक्ष के ही अनुरोध पर वीडियो सामग्री को फॉरेंसिक साइंस लेबोरेटरी (एफएसएल) को जांच हेतु भेजा गया।

माननीय अध्यक्ष ने पुनः स्पष्ट किया कि इस मामले में फॉरेंसिक जांच कराने का अधिकार केवल दिल्ली विधानसभा को है और विधानसभा पूरी जिम्मेदारी एवं पारदर्शिता के साथ कार्य करेगी, ताकि सच्चाई सामने आए और सदन की गरिमा सुरक्षित रहे।