निर्मल रानी
पूरे विश्व में इन दिनों मुसलमानों की इबादत का पवित्र महीना ‘रमज़ान ‘ पूरी श्रद्धा व आस्था के साथ मनाया जा रहा है। इस बात से सभी भलीभांति परिचित हैं कि धार्मिक नियमों व रीति रिवाजों का अनुपालन करने वाले मुस्लिम समुदाय के लोग रमज़ान के पूरे महीने के दौरान दिन भर रोज़ा (व्रत ) रखते हैं और सारा दिन खाना पानी कुछ भी ग्रहण नहीं करते। सूर्योदय से पूर्व सहरी खाकर सूर्यास्त के बाद इफ़्तारी कर रोज़दार लोग अपना रोज़ा खोलते हैं। इस दौरान मुस्लिम समाज के लोग मस्जिदों या अपने अपने घरों में इबादत भी करते हैं। भारत में प्रत्येक वर्ष रमज़ान के दौरान हिन्दू, मुस्लिम और सिख समुदायों के बीच एकता की कई हृदयस्पर्शी व प्रेरणादायक मिसालें देखने को मिलती हैं। ऐसी मिसालें निश्चित रूप से हमारे देश के भाईचारे, आपसी सहयोग और मुहब्बत का प्रतीक हैं। कहीं हिन्दू तो कहीं सिख रोज़ा इफ़्तार करते हैं। तो कहीं मंदिर में इफ़्तारी कर मुस्लिम भाइयों को कोई पंडित जी रोज़ा खुलवाते हैं। कहीं मुस्लिम लोग क़ुरआन की तरावीह (नमाज़ -इबादत ) छोड़ कर पड़ोसी हिन्दू भाई के घर में लगी आग बुझाने पहुँच जाते हैं तो कहीं हिन्दू भाई बहन रोज़ा रखकर मुहब्बत का पैग़ाम देते हैं। जस्टिस मारकण्डे काटजू सहित देश के अनेक ग़ैर मुस्लिम बुद्धिजीवी रमज़ान के दौरान प्रतीकात्मक रूप से रोज़ा रखकर साम्प्रदायिक सद्भाव का सन्देश देते हैं।
उदाहरण के तौर पर राजस्थान के बाड़मेर और जैसलमेर जैसे सीमावर्ती ज़िलों में एक हिन्दू परिवार के सदस्य माह -ए – रमज़ान में पांच रोज़े रखते हैं। इसी तरह महाराष्ट्र के नांदेड़ ज़िले के एक गांव में 40-50 हिन्दू रोज़ा रखते हैं और नियमानुसार सहरी व इफ़्तार ग्रहण करते हैं। इन हिन्दू रोज़दारों का कहना है कि यह उनके परिवारों की सदियों पुरानी परंपरा है। इसी तरह राजस्थान के सीकर ज़िले के कांवट गांव में हिन्दू-सिख परिवार मस्जिद में 15 दिनों तक इफ़्तार की दावत दे कर श्रद्धा,सद्भाव व प्रेम का सन्देश देते हैं। राजस्थान के कांवट में सिख परिवार भी हिन्दुओं संग मिलकर रोज़दारों को भोजन कराते हैं। हिन्दू-मुस्लिम सौहार्द का ज्वलंत उदाहरण चेन्नई के मायलापुर स्थित सूफ़ीदर मंदिर में देखने को मिलता है। यहाँ गत 40 वर्षों से रोज़ा रखने वालों के लिए इफ़्तार तैयार किया जाता है। यहाँ के पंडित और स्वयंसेवक मुस्लिम रोज़दार भाइयों को इफ़्तार कराकर उन्हें रोज़ा खुलवाते हैं। इसी तरह उत्तर प्रदेश के इटावा के अमर सिंह शाक्य जैसे हिन्दू 22 वर्षों से पूरे 30 रोज़े रखते आ रहे हैं । उधर उत्तर प्रदेश के रामपुर में ही इस बार मुस्लिमों ने रोज़ा रखते हुए अपने हिन्दू साथियों के साथ मिलकर होली भी मनाई। बेशक ऐसे आयोजन व गतिविधियां विभिन्न आस्थाओं के बीच आपसी विश्वास को बढ़ाती हैं।
पिछले दिनों उत्तर प्रदेश में बुलंदशहर के कोतवाली नगर क्षेत्र के मोहल्ला फ़ैसलाबाद में रात के समय एक हिन्दू व्यक्ति के घर में रखे गैस सिलेंडर से भीषण आग लग गयी। उस समय पास की एक मस्जिद में अनेक मुस्लिम भाई रोज़ा इफ़्तार के बाद तरावीह की नमाज़ अदा कर रहे थे। वे सभी पड़ोस से अचानक उठने वाले शोर शराबे से व्याकुल हुये। सभी मुस्लिम भाइयों ने नमाज़ तरावीह छोड़ दी और फ़ौरन एक साथ मौक़े पर पहुंचकर न केवल आग बुझाने में मदद की बल्कि मस्जिद से पानी का भी पूरा उपयोग कर आग बुझाने में सफलता हासिल की। इन सबकी की मदद से ही आग पर क़ाबू पा लिया गया और बड़ा हादसा टल गया। इस इंसानियत भरी मिसाल ने हिन्दू-मुस्लिम भाईचारे को और मज़बूत किया। जहाँ मुस्लिम भाइयों ने अपनी इस सेवा को ही सच्ची इबादत बताया वहीँ हिन्दू पीड़ित परिवार ने भी यह कहा कि ‘हम मुस्लिम भाइयों की इस इंसानियत को कभी नहीं भूलेंगे’।
देश के विभिन्न भागों से रमज़ान के दौरान इस वर्ष साम्प्रदायिक सद्भाव की और भी अनेक ख़बरें सुनने व देखने को मिलीं। जम्मू-कश्मीर के श्रीनगर में सिख युवाओं ने लाल चौक पर रोज़दारों को शरबत व पानी पिलाया तथा खजूर आदि वितरित कर उनके लिये इफ़्तार का प्रबंध किया। इसी तरह पंजाब के जीजी इंस्टीट्यूट में हिन्दू, मुस्लिम, सिख भाइयों ने एक साथ मिलकर रोज़ा इफ़्तार किया इसके बाद सभी ने सामूहिक रूप से नमाज़ अदा कर देश में अमन शांति व भाईचारे की दुआ माँगी। इन दिनों दिल्ली की रहने वाली नेहा भारती सोशल मीडिया के माध्यम से काफ़ी लोकप्रिय हो रही हैं। वे पिछले 4 वर्षों से लगातार रमज़ान के पूरे महीने पुरानी दिल्ली की जामा मस्जिद के बाहर रोज़दारों के लिए इफ़्तार का इंतज़ाम कर रही हैं। वह हर दिन लगभग लगभग 300 से 350 रोज़दारों को इफ़्तार कराती हैं। नेहा भारती की श्रद्धा को इस बात से भी समझा जा सकता है कि वे इफ़्तार का सामान(पकवान ) अपने घर पर अपने हाथों से ही तैयार करती हैं और शाम को उसे लेकर स्वयं जामा मस्जिद पहुंचती हैं और रोज़दारों में वही इफ़्तारी पूरी श्रद्धा व सद्भाव के साथ वितरित करती हैं। नेहा के साथ उनके परिवार के सदस्य और अनेक मित्र भी इन सब में उनकी सहायता करते हैं। पूरे रमज़ान के दौरान वह रोज़ाना इफ़्तारी में अलग अलग तरह के पकवान बनाती हैं ताकि रोज़ इफ़्तार करने वालों को अलग अलग तरह के पकवान मिल सकें । नेहा के अनुसार यह पवित्र काम उन्हें ख़ुशी व सुकून देता है और वह इसे लोगों के बीच भाईचारे और मोहब्बत का संदेश फैलाने का माध्यम मानती हैं। वह चाहती हैं कि अधिक से अधिक युवा ऐसे कामों से जुड़ें और समाज में सद्भाव का माहौल मज़बूत हो।
हालाँकि देशभर में विभिन्न राजनैतिक दलों के नेता व तमाम प्रमुख लोग साम्प्रदायिक सद्भाव का प्रदर्शन करने के लिये रमज़ान में सांकेतिक रोज़ा इफ़्तार पार्टी का आयोजन कर मीडिया में सुर्ख़ियां बटोर कर अपने दायित्व की इतिश्री समझते हैं। परन्तु हमारे देश में साम्प्रदायिक शक्तियों की सक्रियता के बावजूद देश भर में स्वभाविक रूप से एक दूसरे धर्मों का सम्मान करने उनके त्योहारों व रीति रिवाजों में शामिल होने का वह जज़्बा मौजूद है जिसे कोई भी दल,सत्ता,संगठन या विचारधारा कभी भी समाप्त नहीं कर सकते। यही सद्भावपूर्ण वातावरण यह प्रमाणित करने के लिये काफ़ी है कि यह देश राम-कृष्ण -रहीम -नानक – कबीर – व चिश्ती जैसे महान संतों व फ़क़ीरों का देश है और इसका स्वभाव हमेशा ऐसा ही रहेगा।





