अमेरिका-इजरायल-ईरान के युद्ध की बढ़ती समय सीमा से विश्व-युद्ध मे बदल सकता युद्ध, बड़ी अर्थव्यवस्थाओं को बड़ा खतरा

The increasing deadline for the US-Israel-Iran war could escalate into a global war, posing a significant threat to major economies

संदीप त्यागी

15 दिनों से चला आ रहा युद्ध, भीषण होता जा रहा है, ईरान की हटधर्मिता से अमेरिका- इजरायल ही नहीं, अन्य देश भी सधी हुई युद्ध नीति से अचंभित है, जबकि दूसरी और अमेरिका अपनी ही चालो में फसकर रह गया है, उनकी सभी योजनाओं के विफल होने से अमेरिका युद्ध में खुद फसा आ रहा हैँ, वेनेजुएला की तरह ईरान को अपने अधिकार क्षेत्र लाने मे कामयाब होने के लिए युद्ध की शरुआत में ईरान के नहीं विश्व के शिया मुश्लिम नेता ख़ामनेई की हत्या कर दी गईं, इस हत्या से पुरे विश्व के शिया मुश्लिमों मे रोष है भारत भी इस रोष से बच नहीं पाया, भारत के लखनऊ, रांची और कश्मीर जैसे शहरों में लोग खामनेई हत्या के विरोध मे बड़ी संख्या मे सड़को पर उतरे।

अभी तक इतिहास में मिडिल ईस्ट में सबसे ज्यादा अधिक हमले हुए है.. अमेरिका के अनुसार ईरान अपने अस्तित्व के आखिर मे है, लेकिन ईरान की लड़ाई की नीति ने खाड़ी देशो उन सभी देशो (जहाँ अमेरिका सैनिक अड्डे है) पर बम् बारी कर सभी को अचंभीत ही नहीं किया बल्कि अमेरिका को भी चेताया, बढ़ते युद्ध में आने वाले समय में परमाणु हथियारों का उपयोग भी किया जा सकता है।

इस युद्ध के कारण में विश्व में कच्चे तेल के बढ़ते दामों से पुरे विश्व में महगाई बढ़ने के आसार बढ़ रहे है यही ईरान की नीति भी है कि विश्व में बढ़ते कच्चे तेल के बढ़ते दामों का ठीकरा अमेरिका पर फोड़ उसे दोषी ठहरा सके।

भारत सरकार अपनी सफल कूटनीति से और विदेश मंत्रालय की सक्रियता से अपने मूल के लोगो को खाड़ी देशो से निकाल स्वदेश वापसी कराकर एक फिर अपने को साबित किया है, भीषण युद्ध के बीच भारत कच्चा तेल ही नहीं एल पी जी और पी इन जी लाने मे भी सफलता हासिल की है, जबकि भारत के पास अपनी क्षमता के अनुसार 70 दिन का भंडार उपलब्ध है।।
लेकिन भविष्य की चुनोतियों को नकारा नहीं जा सकता है, खाड़ी देशो मे खाद्य पदार्थो की बढ़ती कीमतें वहा की अर्थव्यवस्था के लिए खतरा बनती जा रही है।

भारत का विपक्ष इस समय आपदा मे अवसर ढूंढने की तलाश में है, समय की गंभीरता को नकाराते हुए, पूरे विपक्ष के भिन्न भिन्न नेताओं के द्वारा दिए गए ब्यान सरकार को कमजोर साबित करने की कोशिश कर देश की आंतरिक सुरक्षा के लिए खतरा बनने की कोशिश कर रहे, विपक्ष के नेताओं के अमर्यादित बयानों से अमेरिका ईरान के युद्ध से दुखी लोगो को उकसाकर देश को ग्रहयुद्ध जेसे हालात पैदाकार विपदा में धकेलने का प्रयास कर रहे है, भविष्य में देश में आतंकवादी घटनाओ और पंथ विशेष संघर्ष जैसे हालातो से नकारा नहीं जा सकता है, भारत को अपनी राष्ट्रीय सीमाओं के साथ अपनी आंतरिक सुरक्षा के लिए सचेत व सजग रहने की आवश्यकता हैं ।

अगर जल्द यह युद्ध नहीं रुका तो विश्व अन्य देश भी इसकी जद्द में आने से अछूते नहीं रहेंगे, युक्रेन- रसिया 4 साल से युद्ध लड़ ही रहे है, पाकिस्तान- अफगानिस्तान एक दूसरे पर निरंतर बमबारी कर रहे है, उत्तरी कोरिया – पश्चामी कोरिया पे 2 बार मिशाइल छोड़ चुका है, वही चाइना और ताईवान आमने सामने आ चुके हैँ।

चाइना के दबाव मे पाकिस्तान से हमले को भी भारत को अनदेखा नहीं किया जा सकता है।