एडवोकेट जयदेव राठी
AI तकनीकी प्रगति या पर्यावरणीय संकट?
कृत्रिम बुद्धिमत्ता आज की दुनिया में एक क्रांतिकारी तकनीक के रूप में उभर रही है। स्वचालित संवाद प्रणालियों से लेकर बहुभाषी सहायकों तक, ये डिजिटल उपकरण हमारे दैनिक जीवन का अभिन्न हिस्सा बन गए हैं। लेकिन इस तकनीकी क्रांति की एक छिपी हुई कीमत है — विशाल पैमाने पर पानी और ऊर्जा की खपत, जो पर्यावरण के लिए गंभीर चुनौतियां पैदा कर रही है। जब लाखों लोग प्रतिदिन इन स्वचालित प्रणालियों का उपयोग करते हैं, तो इसके पर्यावरणीय प्रभाव उतने ही सूक्ष्म हैं जितने खतरनाक।
कृत्रिम बुद्धिमत्ता की बढ़ती मांग ने आंकड़ा भंडारण केंद्रों की संख्या और आकार में अभूतपूर्व वृद्धि की है। वर्तमान में विश्वभर में लगभग 11,000 ऐसे केंद्र संचालित हैं और इनकी जल खपत चौंकाने वाली है। एक मध्यम आकार का आंकड़ा भंडारण केंद्र प्रतिदिन लगभग 3 लाख गैलन पानी की खपत करता है, जो करीब 1,000 परिवारों की वार्षिक आवश्यकता के बराबर है। लेकिन जब बात बड़े केंद्रों की आती है, तो यह आंकड़ा और भी चौंकाने वाला हो जाता है — प्रतिदिन 50 लाख गैलन तक, जो 10,000 से 50,000 लोगों के एक छोटे शहर की जरूरत के बराबर है।
अमेरिका में 2024 में इन आंकड़ा भंडारण केंद्रों ने प्रतिदिन लगभग 44.9 करोड़ गैलन पानी का उपयोग किया, जो सालाना 163.7 अरब गैलन के बराबर है। टेक्सास राज्य में स्थिति और भी चिंताजनक है। ह्यूस्टन उन्नत शोध केंद्र और ह्यूस्टन विश्वविद्यालय के एक अध्ययन के अनुसार, टेक्सास में ये केंद्र 2025 में 49 अरब गैलन पानी का उपयोग करेंगे, और यह आंकड़ा 2030 तक बढ़कर 399 अरब गैलन तक पहुंच सकता है। कैलिफोर्निया के रिवरसाइड विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों का अनुमान है कि प्रत्येक 100 शब्दों की स्वचालित संगणना क्वेरी लगभग 519 मिलीलीटर पानी का उपयोग करती है — एक बोतल के बराबर। यह मात्रा भले ही मामूली लगे, लेकिन जब दुनियाभर में अरबों लोग प्रतिमिनट इन प्रणालियों को अनुरोध भेजते हैं, तो यह एक विशाल जल संकट का रूप ले लेती है। एम्स्टर्डम के मुक्त विश्वविद्यालय के एक हालिया शोध के अनुसार, 2025 में केवल कृत्रिम बुद्धिमत्ता प्रणालियों का जल पदचिह्न 312.5 से 764.6 अरब लीटर तक पहुंच सकता है — यह विश्वभर में बोतलबंद पानी की वार्षिक खपत के बराबर है।
पानी की खपत के साथ-साथ, इन आंकड़ा भंडारण केंद्रों की ऊर्जा खपत भी चिंता का विषय है। एक पारंपरिक केंद्र 10,000 से 25,000 घरों जितनी बिजली का उपयोग करता है। लेकिन नए कृत्रिम बुद्धिमत्ता-केंद्रित विशालकाय भंडारण केंद्र एक लाख या उससे अधिक घरों जितनी बिजली खर्च करते हैं। उदाहरण के लिए, एक प्रमुख तकनीकी कंपनी का लुइसियाना में प्रस्तावित महाकाय आंकड़ा केंद्र पूरे न्यू ऑरलियन्स शहर से दोगुनी बिजली खपत करेगा, जबकि व्योमिंग में योजनाबद्ध एक अन्य केंद्र पूरे राज्य के सभी घरों से अधिक बिजली का उपयोग करेगा।
अंतर्राष्ट्रीय ऊर्जा अभिकरण के अनुसार, 2024 में इन केंद्रों ने विश्वभर में लगभग 415 टेरावाट-घंटे बिजली की खपत की, जो वैश्विक बिजली खपत का लगभग 1.5 प्रतिशत है। यह थाईलैंड जैसे देश की वार्षिक ऊर्जा खपत के बराबर है। अनुमान है कि यह आंकड़ा 2030 तक बढ़कर 945 टेरावाट-घंटे हो जाएगा — जो जापान की वर्तमान बिजली मांग के बराबर है। अमेरिका में स्थिति विशेष रूप से गंभीर है। एक प्रतिष्ठित प्रौद्योगिकी समीक्षा के विश्लेषण के अनुसार, 2024 में अमेरिकी आंकड़ा भंडारण केंद्रों ने लगभग 200 टेरावाट-घंटे बिजली का उपयोग किया। शोधकर्ताओं का अनुमान है कि 2028 तक केवल कृत्रिम बुद्धिमत्ता-विशिष्ट उद्देश्यों के लिए बिजली की खपत 165 से 326 टेरावाट-घंटे प्रति वर्ष तक बढ़ जाएगी, जो अमेरिका के 22 प्रतिशत घरों को सालाना बिजली देने के बराबर है।
ऊर्जा खपत का सीधा परिणाम कार्बन उत्सर्जन में वृद्धि है। वर्तमान में ये केंद्र बिजली की खपत से लगभग 18 करोड़ टन कार्बन द्विऑक्साइड का अप्रत्यक्ष उत्सर्जन करते हैं। एम्स्टर्डम के मुक्त विश्वविद्यालय के शोध के अनुसार, 2025 में केवल कृत्रिम बुद्धिमत्ता प्रणालियों का कार्बन पदचिह्न 3.26 से 7.97 करोड़ टन कार्बन द्विऑक्साइड उत्सर्जन के बीच हो सकता है — जो न्यूयॉर्क शहर के कार्बन पदचिह्न के बराबर है। 2024 में अमेरिका में उपयोग की जाने वाली बिजली की कार्बन सघनता अमेरिकी औसत से 48 प्रतिशत अधिक थी। इसका मुख्य कारण यह है कि अमेरिका में 60 प्रतिशत बिजली अभी भी जीवाश्म ईंधन — कोयला और प्राकृतिक गैस — से आती है।
एक प्रमुख खोज इंजन कंपनी के कार्बन उत्सर्जन में पिछले पांच वर्षों में 48 प्रतिशत की वृद्धि हुई है, जबकि एक अन्य सॉफ्टवेयर दिग्गज में 2020 से 23.4 प्रतिशत की वृद्धि देखी गई है। दोनों कंपनियों ने कृत्रिम बुद्धिमत्ता और क्लाउड अभिकलन को इस वृद्धि का मुख्य कारण बताया है। शोधकर्ताओं का अनुमान है कि एक बड़े भाषा मॉडल को प्रशिक्षित करने में लगभग 500 मीट्रिक टन कार्बन द्विऑक्साइड का उत्सर्जन हुआ — यह न्यूयॉर्क से सैन फ्रांसिस्को तक 438 बार कार चलाने के बराबर है।
इन वैश्विक आंकड़ों के पीछे स्थानीय समुदायों की वास्तविक कहानियां छिपी हैं। अमेरिका के जॉर्जिया राज्य के न्यूटन जिले में एक सामाजिक मंच कंपनी का आंकड़ा केंद्र प्रतिदिन 5 लाख गैलन पानी खपत करता है — जो पूरे जिले की जल खपत का 10 प्रतिशत है। ओरेगन राज्य के द डेल्स नगर में एक खोज इंजन कंपनी के केंद्रों ने 2021 में शहर की कुल जल खपत का 29 प्रतिशत उपयोग किया, जबकि यह क्षेत्र पहले से ही सूखे की मार झेल रहा है।
समस्या को और जटिल बनाने वाली बात यह है कि अधिकांश तकनीकी कंपनियां अपने पर्यावरणीय प्रभाव के बारे में पूरी जानकारी सार्वजनिक नहीं करतीं। 2016 की एक रिपोर्ट में पाया गया कि एक-तिहाई से भी कम आंकड़ा भंडारण केंद्र संचालक जल खपत को दर्ज करते हैं। कंपनियां अक्सर “कार्बन तटस्थता” का दावा करती हैं — स्वच्छ ऊर्जा प्रमाणपत्र खरीदकर — जबकि उनके वास्तविक स्थानीय उत्सर्जन अप्रकाशित रहते हैं। शोध से पता चलता है कि उनका वास्तविक कार्बन पदचिह्न रिपोर्ट किए गए आंकड़ों से 662 प्रतिशत तक अधिक हो सकता है।
इस गंभीर स्थिति के बावजूद, कुछ आशाजनक समाधान उभर रहे हैं। द्रव-निमज्जन शीतलन और बंद-परिपथ शीतलन प्रणालियां पानी की खपत को 70 प्रतिशत तक कम कर सकती हैं। एक प्रमुख तकनीकी कंपनी ने पिछले वर्ष में प्रति अनुरोध ऊर्जा उपयोग में 33 गुना और कार्बन पदचिह्न में 44 गुना कमी की है। 2024 में अमेरिकी सांसदों ने एक “कृत्रिम बुद्धिमत्ता पर्यावरणीय प्रभाव अधिनियम” प्रस्तुत किया, जो राष्ट्रीय मानक संस्थान को कृत्रिम बुद्धिमत्ता के पर्यावरणीय प्रभाव के मानक विकसित करने का आदेश देता है। कुछ नगर प्रशासनों ने भी सख्त नियम स्थापित किए हैं और इन केंद्रों की निरंतर निगरानी अनिवार्य की है।
कृत्रिम बुद्धिमत्ता निस्संदेह भविष्य की तकनीक है, लेकिन इसे टिकाऊ तरीके से विकसित करना आवश्यक है। एक प्रतिष्ठित पर्यावरण शोध पत्रिका में प्रकाशित अध्ययन चेतावनी देता है कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता सर्वर उद्योग 2030 तक अपने शून्य-कार्बन लक्ष्यों को पूरा नहीं कर पाएगा, जब तक कार्बन प्रतिसंतुलन और जल पुनर्स्थापना तंत्र पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया जाता। यह समय की मांग है कि तकनीकी कंपनियां, सरकारें, और समुदाय मिलकर एक ऐसा रास्ता खोजें, जहां कृत्रिम बुद्धिमत्ता की प्रगति पर्यावरण की कीमत पर न हो। पारदर्शिता, जवाबदेही, और तकनीकी नवाचार के माध्यम से हम इस तकनीक की शक्ति का उपयोग कर सकते हैं, जबकि हमारे ग्रह को भी संरक्षित रख सकते हैं।
अंतर्राष्ट्रीय ऊर्जा अभिकरण के अनुसार, यदि सही नीतियां और प्रौद्योगिकियां अपनाई जाएं, तो कृत्रिम बुद्धिमत्ता के अनुप्रयोग 2035 तक 1,400 मिलियन टन कार्बन द्विऑक्साइड उत्सर्जन में कमी ला सकते हैं — जो आंकड़ा भंडारण केंद्रों के उत्सर्जन से तीन गुना अधिक होगी। लेकिन इसके लिए तत्काल और समन्वित कार्रवाई की आवश्यकता है। प्रश्न यह नहीं है कि क्या हम इस तकनीक का विकास करेंगे, बल्कि यह है कि हम इसे कैसे विकसित करेंगे — और क्या हम इसे इस तरह करेंगे कि आने वाली पीढ़ियों के लिए एक रहने योग्य ग्रह छोड़ सकें। क्योंकि अंततः, एक स्वस्थ पर्यावरण के बिना, कोई भी तकनीकी प्रगति निरर्थक है।





