हनुमान जी के प्राण ही रामकथा है – कथा व्यास अरविन्द भाई ओझा

The life of Hanuman ji is the story of Rama - Katha Vyas Arvind Bhai Ojha

दीपक कुमार त्यागी

वसुंधरा, गाजियाबाद : साईं मन्दिर वसुंधरा में चल रही हनुमत कथा में हनुमान जन्म का उत्सव धूमधाम से मनाया गया, अंजनी मां के हुयो लाल भजन पर झूम झूम कर भक्तो ने जन्म की बधाईयाँ गाई ।

हनुमान जन्म की कथा पर बोलते हुए कथा व्यास अरविन्द भाई ओझा ने कहा कि हनुमान जी प्रभु चरित सुनिबे के रसिया हैं क्योंकि उनके प्राणों में राम कथा बसती है राम कथा से अलग उनका अस्तित्व नहीं है। हनुमान जी का जन्म भले ही माता अंजना और केसरी के यहां हुआ हो पर हनुमान जी का प्रगटीकरण ही रामकथा से हुआ है इसलिए प्रभु श्रीराम और जानकी को वे अपने माता पिता कहते हैं।

माता जानकी ने हनुमान जी को अजर अमर होने का वरदान दिया तो हनुमान जी चिरंजीवी हो गए और प्रभु श्रीराम ने आशीर्वाद देते हुए कहा कि जबतक धरती पर रामकथा रहेगी तब तक तुम यहीं धरती पर रह कर भक्तों का कल्याण करते रहोगे ।

अगर हम चाहते हैं कि प्रभु की कृपा प्राप्त होती रहे तो हमें राम जी का गुणगान गाते रहना चाहिए।

हनुमत जन्म पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने कहा कि भगवान शिव ने ही हनुमान जी के रूप में जन्म लिया है इसलिए उनके जीवन में हमे शिव के समान सरलता , सहजता व सजगता ( क्रोध ) तीनो दिखाई देते है |

मां का स्थान जीवन में सबसे श्रेष्ठ है क्योंकि परमात्मा ने स्त्री को एक गुण ममता रूपी जो प्रेम दिया है जिसके कारण कोई भी स्त्री जननी भले ही न बन पाए पर हर स्त्री मां बन सकती है इसलिए भगवान श्री राम अपनी मां ( जननी ) और जन्मभूमि दोनों को बहुत प्यार करते है और हमे संदेश देते है कि हमे भी अपने गाँव को तीर्थ समझना चाहिए • हनुमान जी का जन्म संसार के मनुष्यों की बुराइयों को सुधारने के लिए हुआ और भगवान श्री राम का जन्म संसार के मनुष्यों को भवसागर से तारने के लिए हुआ है इसलिए हनुमान जी सुधारते है और श्री राम तारते है ।

हम अगर अपने जीवन में भक्ति प्राप्त करना चाहते है तो हमे अपनी बुद्धि, बल, पद व परिवार के झूठे अभिमान को त्याग कर भगवान की शरण में आना चाहिए क्योंकि जहाँ जहाँ अभिमान होता है वहाँ भगवान नहीं आते ।

आज कथा में अशोक, दिवाकर मिश्रा, बाल कृष्ण शर्मा, क्षेत्रपाल, स्वीटी रैना, सुमन तिवारी, बीना शर्मा व अर्चना सोनकर उपस्थित रहे।