शराब के दो पैग, लंबी उम्र का राज या भ्रम

Two pegs of alcohol, the secret of longevity or an illusion?

संजय सक्सेना

प्रसिद्ध गीतकार और स्टोरी राइटर जावेद अख्तर ने हाल ही में एक टीवी बहस में शराब के दो पैग को लंबी आयु से जोड़कर खूब सुर्खियां बटोरी थीं। उन्होंने कहा कि रात के भोजन से पहले दो पैग पीने वाले लोगों की उम्र सबसे ज्यादा होती है। अमेरिकी सर्वे का हवाला देते हुए उन्होंने दावा किया कि भोजन के साथ सीमित शराब पीने से स्वास्थ्य को लाभ मिलता है। अख्तर ने शराब को दवा से तुलना की, जिसमें समस्या मात्रा से तय होती है। जून में रेडियो पर भी उन्होंने इसी तरह दो पैग को फायदेमंद बताया था। आम बातचीत में भी लोग कहते हैं कि थोड़ी शराब दिल को मजबूत बनाती है। इसको लेकर काफी विवाद भी हुआ था, लेकिन क्या इसमें सच्चाई है? चिकित्सा जगत इसे कैसे देखता है? विभिन्न अध्ययनों से क्या सामने आया है, इस पर नजर डालने से जो तस्वीर उभरकर आती है, वह शराब के शौकीनों का उत्साह बढ़ाने वाली नहीं नजर आती है।

गौरतलब है, देश-दुनिया में लंबे समय से शराब को लेकर दोहरी धारणा चली आ रही है। एक ओर लोग कहते हैं कि थोड़ी मात्रा में यह फायदेमंद होती है, दूसरी ओर डॉक्टर चेतावनी देते हैं कि यह जहर है। जावेद अख्तर का बयान इसी पुरानी बहस को फिर हवा देता है। वे कहते हैं कि अतिसेवन ही समस्या है, जैसे धर्म या कोई आदत ज्यादा होने पर नुकसान पहुंचाती है। लेकिन विज्ञान क्या कहता है? पुराने अध्ययनों ने कभी-कभी सीमित शराब को दिल की बीमारियों से जोड़ा। उदाहरण के लिए, लाल शराब में पाए जाने वाले तत्वों को धमनियों को साफ करने वाला माना गया। एक पुराना अमेरिकी सर्वे, जिसका जिक्र अक्सर होता है, बताता था कि रोजाना एक-दो ड्रिंक लेने वालों में हृदय रोग का खतरा कम रहता है। फ्रांसीसी विरोधाभास को भी याद किया जाता है, जहां शराब पीने वाले लोगों में दिल की बीमारियां कम पाई गई। इन दावों ने कई लोगों को आकर्षित किया। लेकिन हाल के वर्षों में चिकित्सा अनुसंधान ने इन धारणाओं को पलट दिया है।

विश्व स्वास्थ्य संगठन ने साफ कहा है कि कोई भी मात्रा सुरक्षित नहीं है। एक प्रमुख अध्ययन, जिसमें लाखों लोगों पर नजर रखी गई, ने पाया कि शराब बिल्कुल न पीने वालों की तुलना में थोड़ी शराब लेने वालों में भी कैंसर, स्ट्रोक और अन्य बीमारियों का जोखिम बढ़ जाता है। अमेरिकी चिकित्सा संघ ने भी पुराने निष्कर्षों को खारिज कर दिया। वे कहते हैं कि पहले जो फायदा दिखा, वह वास्तव में धूम्रपान न करने या स्वस्थ जीवनशैली अपनाने वाले लोगों के कारण था। शराब पीने वाले अक्सर अन्य बुरी आदतों से दूर रहते हैं, इसलिए उनका स्वास्थ्य बेहतर लगता था। लेकिन जब शोधकर्ताओं ने इन कारकों को अलग किया, तो शराब का कोई लाभ नजर नहीं आया। एक वैश्विक सर्वे में सामने आया कि रोजाना दो पैग लेने वालों में लीवर की क्षति, उच्च रक्तचाप और मानसिक स्वास्थ्य समस्याएं बढ़ जाती हैं।

बहरहाल, दो पैग का मतलब क्या है? आमतौर पर यह 60 मिलीलीटर व्हिस्की या दो छोटे गिलास होती है। पुराने अध्ययनों ने इसे पुरुषों के लिए एक ड्रिंक माना। लेकिन महिलाओं के लिए यह आधी मात्रा ही सुझाई जाती थी, क्योंकि उनका शरीर विषाक्त पदार्थ धीरे तोड़ता है। फिर भी, नए शोध बताते हैं कि अल्कोहल कैंसरकारी पदार्थ बनाता है। यह डीएनए को नुकसान पहुंचाता है, जिससे मुंह, गले, लीवर और स्तन कैंसर का खतरा बढ़ता है। एक ब्रिटिश अध्ययन में पाया गया कि हल्के पीने वालों में भी कैंसर के मामले 10 से 15 प्रतिशत ज्यादा होते हैं। हृदय पर असर को लेकर भी भ्रम है। पहले सोचा गया कि शराब कोलेस्ट्रॉल को नियंत्रित करती है। लेकिन अब साबित हो चुका है कि यह अनियमित दिल की धड़कन पैदा करती है और स्ट्रोक का कारण बनती है।

भारत में स्थिति और जटिल है। यहां शराब की खपत तेजी से बढ़ रही है। ग्रामीण इलाकों में भी युवा इसे फैशन मानने लगे हैं। सरकारी आंकड़े बताते हैं कि शराब से जुड़ी मौतें हर साल बढ़ रही हैं। चिकित्सक कहते हैं कि भारतीयों का लीवर एंजाइम अल्कोहल को कम सहन करता है। इसलिए दो पैग भी घातक साबित हो सकते हैं। एक भारतीय अध्ययन में पाया गया कि हल्के पीने वाले मधुमेह रोगियों में इंसुलिन प्रतिरोध बढ़ जाता है। महिलाओं में मासिक धर्म चक्र बिगड़ता है। बच्चों और किशोरों पर असर तो और भयानक है, जो भविष्य की पीढ़ी को कमजोर बनाता है। जावेद अख्तर जैसे बुद्धिजीवी अपने अनुभव से बात करते हैं। वे खुद शराब छोड़ चुके हैं और अतिसेवन की भयावहता बयान करते हैं। लेकिन उनका दो पैग वाला दावा वैज्ञानिक रूप से कमजोर है।

विभिन्न सर्वे इसकी पुष्टि करते हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन का 2023 का रिपोर्ट कार्ड साफ है शराब से कोई स्वास्थ्य लाभ नहीं। लैंसेट जर्नल के विशाल अध्ययन में 195 देशों के आंकड़े लिए गए। नतीजा यही निकला कि शराब की कोई सुरक्षित सीमा नहीं। अमेरिका के रोग नियंत्रण केंद्र ने भी कहा कि थोड़ी शराब लेने वालों में भी मृत्यु दर ज्यादा है। एक स्कैंडिनेवियाई सर्वे ने पाया कि नशा न करने वाले सबसे स्वस्थ रहते हैं। ये निष्कर्ष जावेद अख्तर के दावे से उलट हैं। वे अमेरिकी सर्वे का हवाला देते हैं, लेकिन हाल के सर्वे उसी देश से इसे नकारते हैं। डॉक्टर सलाह देते हैं कि शराब छोड़ना ही सबसे अच्छा है। व्यायाम, संतुलित भोजन और पानी ज्यादा पीना वास्तविक लंबी उम्र का राज है। फिर भी लोग दो पैग को जश्न का हिस्सा बनाए रखते हैं।

सामाजिक दबाव और विज्ञापनों ने इसे सामान्य बना दिया। लेकिन चिकित्सा सलाह यही है कि इससे दूर रहें। जावेद अख्तर का बयान विचारोत्तेजक है, पर सच्चाई यह है कि शराब स्वास्थ्य के लिए हानिकारक ही होती है। कोई फायदा नहीं, केवल नुकसान। इसे पूरी तरह त्याग कर ही सच्ची सेहत हासिल की जा सकती है।