दीर्घकालिक स्थाई परिणाम का बजट
प्रमोद भार्गव
नए आम बजट से उम्मीद की जा रही थी कि यह आयकर की सारिणी में छूट और पांच राज्यों में होने वाले विधानसभा चुनावों के मद्देनजर लोकलुभावन बजट होगा।लेकिन यह बजट इसके विपरीत आत्मनिर्भरता के लिए उद्योग केंद्रित बजट है।जिसके स्थाई और रोजगार देने वाले परिणाम आने में थोड़ा समय लगेगा।इस बजट की उम्मीदों में तमाम आर्थिक उथल-पुथल और भू-राजनीतिक तनावों के बावजूद अगले वित्त वर्ष में भारत के तीसरी बड़ी अर्थव्यवस्था बन जाने की बुनयाद रख दी है।इस समय भारत उद्योग,प्रौद्योगिकी और दवाओं के कच्चे माल के लिए चीन पर निर्भर है, किंतु यह बजट कालांतर में चीन को चुनौती बनने वाला है। क्योंकि इस बजट में दुर्लभ खनिजों के उत्खनन को बढ़ावा देने के द्वार खोले जा रहे हैं।
अमेरिका की निगाहें वेनेजुएला के तेल,डेनमार्क के ग्रीनफील्ड और आर्कटिक के दुर्लभ खनिजों पर टिकी हैं।चीन और रूस आर्कटिक क्षेत्र में खनिज उत्खनन में लग गए हैं। भारत की अर्थव्यवस्था की रीढ़ खनिज के साथ कृषि भी है। अतएव ईयू से जो संधि हुई है, उसके तहत भारत को स्टील, एल्युमिनियम, सीमेंट, पेपर, ग्लास,तेल रिफाइनरी और खाद के निर्यात का लाभ मिलेगा। इस दृष्टि से भारत भूमि को कुदरत ने अटूट प्राकृतिक संपदा दी हुई है। इस संपदा का उत्खनन और उसका उपयोग देश के लोगों के लिए हो, इस नजरिए से दुर्लभ खनिजों के उत्खनन के लिए बजट में ओडिशा, केरल और आंध्रप्रदेश के बीच गलियारा बनाए जाने के लिए 10 हजार करोड़ रुपए का प्रावधान किया गया है।इसके अंतर्गत राष्ट्रीय जलमार्ग भी बनाए जाएंगे।साथ ही वस्त्र,खेलकूद सामग्री,जैविक दवाओं,कंटेनर,इलेक्ट्रॉनिक्स, के उत्पादन को बढ़ावा दिया गया है।रसायन पार्क विकसित होंगे।सेमीकंडक्टर मिशन दो की शुरुआत की जाएगी।चूंकि सरकार कृत्रिम बुद्धिमत्ता को बढ़ावा देने के उपाय निरंतर कर रही है, इस हेतु सेमीकंडक्टर की उपलब्धता जरूरी है।इस दृष्टि से यह उत्पादन और निर्माण के ढांचागत विकास को स्थापित करने का महाबजट है।
दुर्लभ खनिजों के उत्खनन की सुविधा हेतु संसद के मॉनसून सत्र में माइंस और मिनरल्स संशोधन विधेयक पहले ही पारित हो चुका है। इस नए कानून से व्यवसायियों को लीज पर खनन करने के लिए बिना किसी अतिरिक्त शुल्क के लीथियम, कोबाल्ट, निकल, हीरा जैसे दुर्लभ खनिजों के उत्खनन की सुविधा भी मिल गई है। भारत इन खनिजों के लिए अब तक चीन पर निर्भर था, लेकिन चीन ने इनके निर्यात पर रोक लगा दी थी। यही वे खनिज हैं, जो क्वांटम कंप्यूटर, इलेक्ट्रिक कारों की बैटरी और अंतरिक्ष उपकरणों में काम आते हैं। हालांकि ट्रंप द्वारा लगाए गए अनर्गल टैरिफ के बाद चीन ने भारत को उपरोक्त खनिज देने का वादा किया हुआ है।हालांकि ईयू से समझौते के बाद दुर्लभ खनिजों के आयात-निर्यात का दायरा विस्तृत हो गया है।भारत ने अब खनिज क्षेत्र में आत्मनिर्भरता का अभियान चलाया हुआ है। क्योंकि भारत की धरती पर इस नजरिए से प्रचुर मात्रा में धरती के गर्भ में हर तरह के खनिज मौजूद हैं। इसीलिए भारत अब अपनी शर्तों पर विकसित देशों के साथ व्यापार भी करेगा। इस बजट से इस व्यापार को मजबूती मिलेगी।
ओडिशा, केरल,आंध्र,राजस्थान,जम्मू-कश्मीर और मध्यप्रदेश की धरती के गर्भ में खनिजों का खजाना भरा पड़ा है। इसके दोहन के लिए उद्योगपति बेरकरार हैं।लेकिन पर्यावरणीय अड़चनों के कारण पूंजीनिवेश से बचते हैं। लेकिन अब माइंस और मिनरल्स संशोधन विधेयक पारित हो जाने से उद्योगपति निवेश के लिए आगे आएंगे। मध्यप्रदेश की धरती हीरा और सोना तो उगलती ही है, तांबे और चूने का यहां सबसे ज्यादा उत्पादन होता है। कटनी में चूने के भंडार हैं। शडहोल और उमरिया में कोयला एवं बॉक्साइड, छिंदवाड़ा में कोयला, बैतूल में ग्रेफाइड और सतना में सिमेंट के भंडार भरे पड़े हैं।मध्यप्रदेश में ईंधन खनन के लिए 12 क्षेत्र चिन्हित किए हैं। कोयला आधारित 37 प्रतिशत मीथेन का उत्पादन प्रदेश में हो रहा है। जबलपुर में सोने के नए भंडार मिले हैं। ग्रेफाइट सहित 30 दुर्लभ खनिज तत्वों की खोज की गई है। इनके उत्खनन व प्रसंस्करण के बाद लीथियम और लौह अयस्क के लिए सीधी में एक क्षेत्र चिन्हित कर दिया गया है।
इसके अलावा बजट में जैविक औषधीय दवाओं के उत्पादन के लिए 40 हजार करोड़ रुपए का प्रावधान है।बायोफार्मा के क्षेत्र में भारत को वैश्विक हब बनाया जाएगा।सरकार आयुर्वेद दवाओं के निर्माण को बढ़ावा देगी।इन दवाओं का निर्माण इसलिए जरूरी है, क्योंकि ये रोग को जड़ से दूर करती हैं।सात द्रुत गति के रेल गलियारे बनेंगे।पटना और वाराणसी में जहाजों की मरम्मत के कारखाने खुलेंगे।छोटे नगरों में तीर्थस्थल विकसित होंगे।इस उपाय से छोटे नगरों में धार्मिक पर्यटन बढेगा।इससे स्थानीय लोगों को धर्म संबंधी रोजगार मिलेंगे।एक जिला,एक उत्पाद योजना को बढ़ावा दिया गया है।साफ है यह बजट अन्य आम बजटों से एकदम अलग है।इसमें मतदाता को लुभाने और आयकरदाताओं को संतुष्ट करने का कोई प्रावधान नहीं है।यह युवाओं की आत्मनिर्भरता और रोजगार के लिए उद्योग केंद्रित बजट है,जिसके स्थाई और फलदायी परिणाम धीमी गति से आएंगे।जो देश की अर्थव्यवस्था को न केवल मजबूती देंगे, बल्कि देश को विश्व की तीसरी अर्थव्यवस्था बनाने का काम करेंगे।





