केन्द्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव का लोकसभा में रेल बजट पर चर्चा का जवाब

Union Railway Minister Ashwini Vaishnav's reply to the discussion on the Railway Budget in the Lok Sabha

  • भारतीय रेलवे देश का विकास इंजन, केन्द्र सरकार रेलवे को अधिक सशक्त बनाने की दिशा में प्रतिबद्ध
  • केन्द्र सरकार का विकास, सुरक्षा और आधुनिकता पर है फोकस

गोपेन्द्र नाथ भट्ट

लोकसभा में रेल मंत्रालय की अनुदान मांगों पर हुई चर्चा का जवाब देते हुए के केन्द्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने भारतीय रेलवे को देश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ बताते हुए सरकार की उपलब्धियों और भविष्य की योजनाओं का विस्तृत खाका प्रस्तुत किया। उन्होंने स्पष्ट किया कि रेलवे केवल परिवहन का साधन नहीं, बल्कि भारत के आर्थिक विकास, रोजगार सृजन और क्षेत्रीय संतुलन का मजबूत आधार बन चुका है।

अपने जवाब में वैष्णव ने कहा कि पिछले कुछ वर्षों में रेलवे क्षेत्र में अभूतपूर्व पूंजी निवेश किया गया है। नई रेल लाइनों के निर्माण, ट्रैक के दोहरीकरण और विद्युतीकरण के कार्यों में तेजी लाई गई है। उन्होंने बताया कि भारतीय रेलवे आज दुनिया के सबसे तेजी से विस्तार करने वाले रेल नेटवर्क में शामिल हो गया है। सरकार का उद्देश्य है कि देश के दूर-दराज के क्षेत्रों को भी बेहतर रेल संपर्क से जोड़ा जाए, जिससे क्षेत्रीय विकास को गति मिले।सुरक्षा के मुद्दे पर मंत्री ने विशेष जोर दिया। उन्होंने कहा कि यात्रियों की सुरक्षा सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है और इस दिशा में कई ठोस कदम उठाए गए हैं। “कवच” जैसी स्वदेशी ट्रेन सुरक्षा प्रणाली को तेजी से लागू किया जा रहा है, जिससे दुर्घटनाओं की संभावना को न्यूनतम किया जा सके। उन्होंने दावा किया कि हाल के वर्षों में रेलवे दुर्घटनाओं में उल्लेखनीय कमी आई है, जो सुरक्षा उपायों की सफलता को दर्शाता है।

आधुनिकता और यात्री सुविधाओं के क्षेत्र में भी रेलवे ने नई ऊंचाइयों को छुआ है। मंत्री ने “वंदे भारत” जैसी अत्याधुनिक ट्रेनों के विस्तार का उल्लेख करते हुए कहा कि यह भारत की तकनीकी क्षमता और आत्मनिर्भरता का प्रतीक है। इसके साथ ही “अमृत भारत स्टेशन योजना” के तहत देशभर के रेलवे स्टेशनों का कायाकल्प किया जा रहा है, जहां यात्रियों को विश्वस्तरीय सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। डिजिटल टिकटिंग, स्वच्छता और बेहतर सेवाओं के माध्यम से यात्रियों के अनुभव को लगातार बेहतर बनाया जा रहा है। माल ढुलाई के क्षेत्र में रेलवे की भूमिका को रेखांकित करते हुए वैष्णव ने कहा कि डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर परियोजनाओं से लॉजिस्टिक्स लागत में कमी आई है और उद्योगों को बड़ा लाभ मिला है। इससे न केवल व्यापार को बढ़ावा मिला है, बल्कि देश की समग्र आर्थिक प्रतिस्पर्धा भी मजबूत हुई है। उन्होंने कहा कि रेलवे का लक्ष्य है कि वह माल ढुलाई के क्षेत्र में अपनी हिस्सेदारी को और बढ़ाए, जिससे सड़कों पर दबाव कम हो और पर्यावरण को भी लाभ मिले।पर्यावरण संरक्षण के मुद्दे पर भी मंत्री ने सरकार की प्रतिबद्धता दोहराई। उन्होंने बताया कि रेलवे तेजी से 100 प्रतिशत विद्युतीकरण की ओर बढ़ रहा है, जिससे कार्बन उत्सर्जन में कमी आएगी। हरित ऊर्जा के उपयोग को बढ़ावा देने और ऊर्जा दक्षता में सुधार के लिए भी कई पहल की जा रही हैं। उन्होंने कहा कि भारतीय रेलवे को “ग्रीन ट्रांसपोर्ट” का वैश्विक मॉडल बनाने का प्रयास किया जा रहा है।

विपक्ष द्वारा उठाए गए सवालों का जवाब देते हुए वैष्णव ने कहा कि सरकार आलोचनाओं को सकारात्मक रूप से लेती है, लेकिन रेलवे में हुए व्यापक सुधारों को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। उन्होंने कहा कि किराया, देरी और सुविधाओं से जुड़े मुद्दों पर लगातार काम किया जा रहा है और आने वाले समय में और सुधार देखने को मिलेंगे। उन्होंने विपक्ष से आग्रह किया कि रेलवे के विकास को राजनीतिक दृष्टिकोण से नहीं, बल्कि राष्ट्रीय हित के नजरिए से देखा जाए। भविष्य की योजनाओं का जिक्र करते हुए रेल मंत्री ने हाई-स्पीड और सेमी-हाईस्पीड रेल नेटवर्क के विस्तार, नई परियोजनाओं और तकनीकी नवाचारों पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि आने वाले वर्षों में भारतीय रेलवे को और अधिक सुरक्षित, तेज और आधुनिक बनाने का लक्ष्य है, ताकि यह 21वीं सदी की जरूरतों के अनुरूप खुद को ढाल सके।

कुल मिलाकर, लोकसभा में दिया गया यह जवाब सरकार की रेलवे नीति का व्यापक दृष्टिकोण प्रस्तुत करता है, जिसमें विकास, सुरक्षा, आधुनिकता और पर्यावरण संतुलन को समान प्राथमिकता दी गई है। यह स्पष्ट संकेत है कि भारतीय रेलवे को देश के विकास इंजन के रूप में और अधिक सशक्त बनाने की दिशा में सरकार प्रतिबद्ध है।