रविवार दिल्ली नेटवर्क
देहरादून : भराड़ीसैंण (गैरसैंण) में विधानसभा सत्र के पांचवे दिन की कार्यवाही में मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि उत्तराखण्ड को हाल के वर्षों में वित्तीय प्रबंधन, राजकोषीय अनुशासन तथा सुशासन के क्षेत्र में राष्ट्रीय स्तर पर अग्रणी राज्य के रूप में मान्यता प्राप्त हुई है। राज्य सरकार द्वारा पारदर्शी वित्तीय नीतियों, संसाधनों के प्रभावी उपयोग तथा दीर्घकालिक आर्थिक दृष्टि के साथ किए गए कार्यों के सकारात्मक परिणाम सामने आ रहे हैं। मुख्यमंत्री ने बताया कि हाल ही में नीति आयोग द्वारा प्रकाशित एफएचआई-2026 (रिपोर्ट 2023-24) में उत्तराखण्ड के वित्तीय प्रबंधन की सराहना की गई है। इस रिपोर्ट में उत्तराखण्ड को उत्तर-पूर्वी एवं हिमालयी राज्यों की श्रेणी में दूसरा स्थान प्राप्त हुआ है। यह उपलब्धि राज्य की राजस्व वृद्धि, व्यय की गुणवत्ता में सुधार, घाटा प्रबंधन तथा ऋण प्रबंधन में अपनाई गई सुदृढ़ नीतियों का परिणाम है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि वित्तीय अनुशासन के क्षेत्र में उत्तराखण्ड ने निरंतर बेहतर प्रदर्शन किया है। अरुण जेटली फाइनेंशियल मैनेजमेंट रिपोर्ट में भी उत्तराखण्ड को विशेष दर्जा प्राप्त हिमालयी राज्यों में अरुणाचल प्रदेश के बाद दूसरा स्थान प्राप्त हुआ है, जो राज्य की मजबूत वित्तीय व्यवस्था और उत्तरदायी शासन प्रणाली को दर्शाता है।
मुख्यमंत्री ने यह भी बताया कि महालेखाकार से प्राप्त रिपोर्ट के अनुसार उत्तराखण्ड सरकार ने फिसकल रिस्पॉंसिबिलिटी एंड बजट मैनेजमेंट में निर्धारित मानकों का पूर्णतः पालन किया है। राज्य ने राजस्व अधिशेष की स्थिति को बनाए रखा है तथा राजकोषीय घाटा भी सकल राज्य घरेलू उत्पाद की निर्धारित सीमा के भीतर रखा गया है।
उन्होंने कहा कि राज्य सरकार का लक्ष्य उत्तराखण्ड को आर्थिक रूप से और अधिक सशक्त बनाते हुए विकास की गति को तेज करना है। इसके लिए सरकार वित्तीय अनुशासन के साथ-साथ बुनियादी ढांचे, सामाजिक क्षेत्र तथा रोजगार सृजन से जुड़े क्षेत्रों में संतुलित निवेश कर रही है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार पारदर्शिता, जवाबदेही और सुशासन के सिद्धांतों पर कार्य करते हुए उत्तराखण्ड को आर्थिक रूप से सुदृढ़, आत्मनिर्भर और विकसित राज्य बनाने के लिए निरंतर प्रयासरत है।
कानून व्यवस्था को लेकर सरकार की जीरो टॉलरेंस नीति के तहत सख्त कार्रवाई की गई
राज्य में कानून व्यवस्था को लेकर सरकार की जीरो टॉलरेंस नीति के तहत सख्त कार्रवाई की गई है। अवैध खनन से संबंधित एक ऑडियो सामने आने के बाद मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी के निर्देश पर हरिद्वार जनपद की इकबालपुर पुलिस चौकी में तैनात पूरे स्टाफ को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है।
इकबालपुर क्षेत्र में अवैध खनन से जुड़े मामले में पुलिसकर्मियों की भूमिका संदिग्ध पाए जाने पर यह कार्रवाई की गई। मामले की गंभीरता को देखते हुए SSP हरिद्वार द्वारा तत्काल निर्णय लेते हुए चौकी प्रभारी सहित पूरी चौकी के छह पुलिसकर्मियों को निलंबित कर दिया गया है तथा मामले की विस्तृत जांच SP देहात को सौंपी गई है।
निलंबित किए गए पुलिसकर्मियों में SI नवीन सिंह चौहान (चौकी प्रभारी इकबालपुर), HC विरेन्द्र शर्मा, HC हरेन्द्र, कांस्टेबल विपिन कुमार, कांस्टेबल देवेश सिंह तथा कांस्टेबल प्रदीप शामिल हैं।
मुख्यमंत्री ने स्पष्ट कहा है कि राज्य में अवैध खनन, भ्रष्टाचार या किसी भी प्रकार की अनियमितता को किसी भी स्थिति में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने कहा कि कानून व्यवस्था बनाए रखने की जिम्मेदारी जिन अधिकारियों पर है, यदि वही अपने कर्तव्यों में लापरवाही या अनुचित गतिविधियों में संलिप्त पाए जाते हैं तो उनके खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाएगी।
मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि मामले की निष्पक्ष और त्वरित जांच सुनिश्चित की जाए तथा दोषी पाए जाने पर कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाए।





