
ओम प्रकाश उनियाल
देहरादून : राज्य निगम कर्मचारी अधिकारी महासंघ उत्तराखण्ड ने अपने पूर्व निर्धारित कार्यक्रमानुसार दैनिक वेतन, संविदा, विशेष श्रेणी, उपनल, कार्यप्रभारित कार्मिकों के नियमितीकरण शीघ्र करने व निगमों का निजीकरण न किए जाने की मांग को लेकर विधायक निवास ( ट्रांजिट कैम्प), रेसकोर्स में थाली बजाकर सरकार को चेताया।
संघ द्वारा राज्य के प्रत्येक विधायक को ज्ञापन दिए गए। जिसमें अनुरोध किया गया कि राज्य निगम कर्मचारी अधिकारी महासंघ लगातार शासन और सरकार स्तर पर मांग कर रहा है कि माननीय उच्च न्यालय द्वारा उक्त कार्मिकों के नियमितीकरण हेतु आदेश जारी किये गए, लेकिन शासन स्तर से विभागीय प्रमुख को आदेश निर्गत नहीं किये जा रहे हैं। नियमावली बनाने के लिये बनी उप-समिति भी अभी तक निर्णय नहीं ले पा रही है ।
महासंघ द्वारा मांग की गयी शीघ्र नियमितीकरण हेतु नियमावली जारी कर आदेश निर्गत किये जाएं ।
महासंघ द्वारा वन विकास निगम में लौगिंग व डिपो कार्यों हेतु निजी व्यक्ति/ मालदारी व्यवस्था पर कराए जाने के लिये किये गये आदेशों को निरस्त करने की मांग की गयी। महासंघ द्वारा कहा गया कि वन विकास निगम प्रबन्धन कार्मिकों की भर्ती करने के स्थान पर आरक्षित क्षेत्र में निजी ठेकेदारों से काम कराने की तैयारी कर रहा है जिससे हजारों आउटसोर्स कार्मिक बाहर होंगे। वनों का कार्य पूर्व व्यवस्था ( मालदारी ) से होगा जिससे अवैध कटान, व भ्रष्टाचार को पनाह मिलेगी, साथ ही माननीय उच्चतम न्यालय द्वारा (गोडाबर्धन बनाम भारत सरकार) आरक्षित क्षेत्र में निजी संस्थाओं से काम कराने पर उलंघन होगा।
महासंघ का कहना है कि वन विकास निगम प्रबन्धन द्वारा किये गये आदेश जन हित में नहीं है इसलिये इन्हें निरस्त कराते हुए खाली पदों पर नयी नियुक्तियां शीघ्र की जाएं।
ज्ञापन देने में परिवहन निगम से रोडवेज संयुक्त परिषद से प्रान्तीयता अध्यक्ष मेछपाल, क्षेत्रीय अध्यक्ष राकेश पेटवाल, जी एम बी एस से संगठन के अध्यक्ष राजेश रमौल, महामंत्री ओ पी भट्ट, संघ के अध्यक्ष मनमोहन चौधरी, महासचिव बी एम जुयाल, वन निगम कर्मचारी संघ के अध्यक्ष टी एस बिष्ट, महामंत्री दिवाकर शाही, जल संस्थान कर्मचारी संगठन के अध्यक्ष श्याम सिंह नेगी व शिशुपाल रावत संदीप मल्होत्रा, जीबा नन्द भट्ट, के एम बी एन से अरविन्द नेगी, महासंघ के महासचिव बी एस रावत , व विजय खाली समेतअन्य कार्मिक उपस्थित रहे।