निर्मल रानी
भारतीय गोदी मीडिया ने पिछले दिनों बहस के लिये जिस सबसे ‘ज्वलंत’ मुद्दे को बहस के लिये ज़रूरी समझा वह था आई पी एल की टीम कोलकाता नाइट राइडर्स (KKR) में एक बांग्लादेशी खिलाड़ी के ख़रीदने पर शाहरुख़ का विरोध और इस पर चर्चा करना। ग़ौरतलब है कि बंगलादेश में छात्रों और जनता के भारी विरोध प्रदर्शनों के बीच शेख़ हसीना की सरकार 5 अगस्त 2024 को गिर गई थी और उन्होंने प्रधानमंत्री पद से इस्तीफ़ा दे दिया था साथ ही वे बंगलादेश छोड़कर भारत आ गयी थीं। उसी समय से बांग्लादेश में अल्पसंख्यक विरोधी हिंसा व प्रदर्शन लगातार हो रहे हैं। कई हिन्दुओं को लक्षित कर जान से मारा जा चुका है। ऐसे में भारतीयों में बंगला देश के विरुद्ध ग़ुस्सा स्वाभाविक है। इसी बीच प्रत्येक वर्ष की भांति इस वर्ष भी इंडियन प्रीमियर लीग (आई पी एल) की विभिन्न टीमों ने अनेक अंतररष्ट्रीय खिलाड़ियों को बोली लगाकर ख़रीदा। ऐसा ही एक बांग्लादेशी तेज़ गेंदबाज था मुस्तफ़िज़ुर रहमान। इस बांग्लादेशी खिलाड़ी को कोलकाता नाइट राइडर्स ने IPL 2026 की नीलामी में रिकार्ड 9.2 करोड़ रुपये की बोली लगाकर ख़रीदा था। यह IPL इतिहास में किसी बांग्लादेशी खिलाड़ी की सबसे ऊंची बोली थी। कोलकाता नाइट राइडर्स अथवा KKR के मुख्य रूप से जो तीन लोग मालिक हैं उनके नाम हैं बॉलीवुड अभिनेता शाहरुख़ ख़ान, अभिनेत्री जूही चावला और उनके पति जय मेहता। गोया यह तीनों ही KKR टीम के सह-मालिक हैं।
परन्तु बी सी सी आई की मर्ज़ी से इस बांग्लादेशी खिलाड़ी मुस्तफ़िज़ुर रहमान का नाम नीलामी पूल में शामिल किये जाने के बावजूद तथा शाहरुख़ के साथ साथ जूही चावला और उनके पति जय मेहता के पास भी KKR का स्वामित्व होने के बावजूद साम्प्रदायिकता में ही प्रसिद्धि तलाशने वाले कुछ पेशेवर क़िस्म के सम्प्रदायकतावादियों द्वारा अपने निशाने पर केवल शाहरुख़ ख़ान को ही लिया गया। हालांकि इस सम्बन्ध में आने वाली ताज़ा ख़बरों के अनुसार अब बीसीसीआईं ने के आर के को बांग्लादेश के इस तेज़ गेंदबाज़ मुस्तफ़िज़ुर रहमान को टीम से अलग करने व इसके बदले किसी दूसरे खिलाड़ी को रखने की अनुमति दे दी है। परन्तु इस विषय पर बी सी सी आई ,जूही चावला व जय मेहता को छोड़कर केवल शाहरुख़ ख़ान के विरोध में इस्तेमाल किये गये शब्दों व उसके पीछे छुपे इरादों ने न केवल एक बार फिर सम्प्रदायवाद आधारित एक बहस को जन्म दे दिया है बल्कि इसी बहाने सोशल मीडिया पर शाह रुख़ व निहायत ही घटिया शब्दों में उनकी आलोचना करने वालों की पारिवारिक पृष्ठभूमि व देश के प्रति उनके योगदान व क़ुर्बानियों की भी तुलनात्मक चर्चा की जाने लगी है।
शाहरुख़ को किसी ने “ग़द्दार” कहा तो किसी ने देशद्रोही बताया जबकि कुछ लोगों ने आई पी एल में KKR बॉयकॉट की बात की। इस विरोध का कारण केवल यही था कि शाहरुख़ ख़ान मुस्लिम हैं और बंगलादेशी खिलाड़ी मुस्तफ़िज़ुर रहमान भी मुस्लिम हैं। जबकि बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख़ हसीना इन दिनों भारत में पनाह लिये हुये हैं। किसी ‘स्वयंभू राष्ट्रवादी ‘को कोई आपत्ति नहीं है। पिछले दिनों बांग्लादेश के इस बिगड़े हिंसक साम्प्रदायिक माहौल के बीच पूर्व प्रधानमंत्री ख़ालिदा ज़िया की मृत्यु पर विदेश मंत्री ने शिरकत की और भारत बांग्लादेश संबंधों को सामान्य बनाने का सन्देश दिया। न किसी ‘धर्मात्मा’ को बुरा लगा न किसी ‘राष्ट्रवादी नेता ‘ को। इन्हें बस सबसे बड़ा अपराधी यदि कोई नज़र आया तो वह शाहरुख़ ख़ान ? वह शाहरुख़ ख़ान जो सैकड़ों करोड़ आयकर का प्रतिवर्ष भुगतान कर देश की अर्थव्यवस्था में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका अदा कर रहे हैं। उन्हें उनके लंबे और शानदार फ़िल्मी कैरियर में कई प्रमुख राष्ट्रीय व अंतर्राष्ट्रीय सम्मान और पुरस्कार मिल चुके हैं। वे बॉलीवुड के सबसे सफल अभिनेताओं में से एक हैं और उन्होंने 15 फ़िल्म फ़ेयर अवॉर्ड्स सहित कई प्रतिष्ठित पुरस्कार जीते हैं। शाहरुख़ को 2025 में सर्वश्रेष्ठ अभिनेता का पुरस्कार मिल चुका है। यह उनका पहला राष्ट्रीय फ़िल्म पुरस्कार है। इसके अलावा उन्हें कई स्क्रीन अवॉर्ड्स, ज़ी सिने अवॉर्ड्स, IIFA अवॉर्ड्स और प्रोड्यूसर्स गिल्ड अवॉर्ड्स हासिल हो चुके हैं।
भारतीय सिनेमा में योगदान के लिए उन्हें देश का सर्व प्रतिष्ठित पद्म श्री पुरस्कार 2005 में भारत सरकार द्वारा दिया जा चुका है। इसी तरह 2007 में फ़्रांस सरकार द्वारा ऑर्ड्रे दे आर्ट्स एट दे लेट्र्स अवार्ड मिला जबकि 2014 में फ्रांस की सबसे ऊँचा नागरिक सम्मान लीजन ऑफ़ ऑनर भी मिल चुका है। उन्होंने 2018 में विश्व आर्थिक मंच द्वारा महिलाओं और बच्चों के अधिकारों के लिए नेतृत्व करने हेतु क्रिस्टल अवॉर्ड प्राप्त किया। जबकि 2011 में बच्चों की शिक्षा के लिए दान कार्य हेतु यूनेस्को का पिरामाइड कॉन मार्नी अवॉर्ड हासिल किया। शाहरुख़ ख़ान को एडिनबरा यूनिवर्सिटी, बेडफ़ोर्डशायर यूनिवर्सिटी, ला ट्रोब यूनिवर्सिटी आदि से डॉक्टरेट की कई मानद मिल चुकी हैं। इसी तरह 2024 में उन्हें लोकर्नो फ़िल्म फ़ेस्टिवल (स्विट्जरलैंड) पार्डो आला कारिएरा का लाइफ़ टाइम अचीवमेंट अवार्ड हासिल हो चुका है।
शाहरुख़ ख़ान ने 2013 में मीर फ़ाउन्डेशन के नाम से एक ग़ैर -लाभकारी समाज सेवी संस्था गठित की हुई है। जिसके माध्यम से वे एसिड अटैक सर्वाइवर्स, शिक्षा, स्वास्थ्य और आपदा राहत,पुनर्वास और व्यावसायिक प्रशिक्षण जैसी कई सामाजिक सेवाओं में सक्रिय योगदान देते रहते हैं। सबसे बड़ी बात यह है कि वे इस काम के लिये ख़ामोशी से और बिना किसी प्रचार व दिखावे के दान करते हैं। उनकी ये सेवाएँ महिलाओं सशक्तिकरण और बच्चों के कल्याण पर केंद्रित हैं। इसी मीर फाउंडेशन ने पंजाब बाढ़ में हज़ारों बाढ़ प्रभावित परिवारों को राहत किट्स, भोजन, स्वच्छ पानी आदि मुहैया कराया और सैकड़ों क्षतिग्रस्त मकानों के पुनर्निर्माण में अपना सहयोग दिया। उनके द्वारा COVID-19 के दौरान स्वास्थ्य उपकरण दान किए गए। केरल व चेन्नई की बाढ़ में आर्थिक सहायता दी गई । शाहरुख़ ख़ान नानावती अस्पताल में अपनी मां के नाम पर कैंसर विभाग चलाते हैं तथा बच्चों के कुपोषण के ख़िलाफ़ अभियान चलाते हैं। बाल साक्षरता और अस्पताल निर्माण में सहयोग करते हैं। वे मेक-ए-विश फ़ाउंडेशन संस्था के माध्यम से बच्चों की इच्छाएं भी पूरी करते हैं।
जहाँ तक शाहरुख़ ख़ान को ग़द्दार या देशद्रोही कहने का प्रश्न है तो ऐसी भाषा का इस्तेमाल करने वाले ज़हरीले लोगों को अपने पारिवारिक संस्कारों की तुलना भी शाहरुख़ ख़ान के पारिवारिक संस्कारों से ज़रूर करनी चाहिये। ग़ौरतलब है कि आज़ाद हिन्द फ़ौज के मेजर जनरल शाहनवाज़ ख़ान शाहरुख़ ख़ान की मां लतीफ़ फ़ातिमा को अपनी बेटी के समान समझते थे। यहाँ तक कि शाहरुख़ के पिता मीर ताज मोहम्मद ख़ान से लतीफ़ फ़ातिमा की शादी भी शाह नवाज़ ख़ान के बंगले में ही हुई थी। यह साबित करता है कि कर्नल शाहनवाज़ ख़ान का शाहरुख़ के परिवार से गहरा आत्मीय रिश्ता था। इसीलिये यह भी कहा जाता है कि शाहरुख़ ख़ान की माँ लतीफ़ फ़ातिमा को आज़ाद हिन्द फ़ौज के मेजर जनरल शाह नवाज़ ख़ान ने गोद लिया था या वे उनके लिए पिता‑तुल्य थे। ऐसे संस्कारों में परवरिश पाने वाले शाहरुख़ खान को ग़द्दार व देशद्रोही जैसी ‘उपाधियाँ ‘ देने वालों को अपने पारिवारिक संस्कारों व देश के प्रति शाहरुख़ की क़ुर्बानियों व सेवाओं की तुलना ज़रूर करनी चाहिए।





