पढ़ाई में जब न लग रहा हो मन

When you don't feel like studying

डॉ विजय गर्ग

हर छात्र के जीवन में ऐसे दौर आते हैं जब किताब खुली होती है, आँखें पन्नों पर होती हैं, लेकिन मन कहीं और भटक रहा होता है। यह स्थिति आलस्य नहीं, बल्कि मानसिक थकान, दबाव या एकरसता का संकेत होती है। सवाल यह नहीं कि मन क्यों नहीं लग रहा, बल्कि यह है कि इससे कैसे निपटा जाए।

आज की पढ़ाई केवल याद करने तक सीमित नहीं रही। लगातार परीक्षा, अंक, प्रतिस्पर्धा और तुलना—ये सब मिलकर दिमाग़ पर बोझ डालते हैं। ऐसे में मन का उचटना स्वाभाविक है। कई बार छात्र खुद को दोष देने लगते हैं—“मुझमें अनुशासन नहीं है”, “मैं मेहनती नहीं हूँ”—जबकि असल समस्या तरीका और माहौल होता है।

जब पढ़ाई में मन न लगे, तो सबसे पहले रुकना ज़रूरी है। ज़बरदस्ती पढ़ने से बेहतर है कुछ देर का ब्रेक लेना—हल्की सैर, संगीत, या बस आँखें बंद कर गहरी साँसें। दिमाग़ को भी आराम चाहिए, जैसे शरीर को।

दूसरा कदम है तरीका बदलना। एक ही तरह से पढ़ते रहना ऊब पैदा करता है। कभी लिखकर पढ़िए, कभी किसी को समझाइए, कभी वीडियो या चित्रों की मदद लीजिए। विषय को जीवन से जोड़ने की कोशिश कीजिए—इतिहास केवल तारीख़ें नहीं, कहानियाँ हैं; विज्ञान केवल सूत्र नहीं, जिज्ञासा है।

लक्ष्य बहुत बड़े हों तो मन घबराता है। इसलिए पढ़ाई को छोटे हिस्सों में बाँटिए। “आज पूरा अध्याय” की जगह “आज पाँच पेज” तय कीजिए। छोटे लक्ष्य पूरे होने पर आत्मविश्वास लौटता है, और मन अपने आप जुड़ने लगता है।

सबसे ज़रूरी बात—खुद से बातचीत। यह मान लेना कि हर दिन समान ऊर्जा नहीं होती। कभी-कभी मन का न लगना यह भी बताता है कि हमें अपने डर, दबाव या अपेक्षाओं पर बात करने की ज़रूरत है—किसी दोस्त, शिक्षक या परिवार के सदस्य से।

पढ़ाई कोई मशीन का काम नहीं, यह इंसान की यात्रा है—उतार-चढ़ाव के साथ। जब मन न लगे, तो खुद पर सख़्त नहीं, बल्कि समझदार बनिए। क्योंकि अक्सर मन को ज़ोर से नहीं, प्यार से पढ़ाई की ओर लौटाया जा सकता है।

पढ़ाई में मन कैसे लगाएं? नजदीक आते 2026 के बोर्ड एग्जाम और एंट्रेंस एग्जाम्स के बीच अगर आप भी इस सवाल का जवाब तलाश रहे हैं, तो यहां आपकी समस्या का हल मिल सकता है। इस लेख में ऐसे 5 तरीके बताए गए हैं, जो परीक्षा में नंबर बढ़ाने में आपकी मदद कर सकते हैं।

पढ़ने में मन नहीं लगता। फोकस नहीं कर पाते। किताब खोलकर बैठते तो हैं, लेकिन ध्यान भटकता रहता है। कुछ पढ़ा भी तो वो याद नहीं रहता। दुनियाभर में आधी से ज्यादा जनसंख्या इस परेशानी से जूझती है। बस यहीं कुछ लोग टॉपर बन जाते हैं, कुछ तेज तर्रार होते हुए भी पीछे रह जाते हैं। अब ऐसे में करें तो क्या करें? इस आर्टिकल में इसी मसले पर मदद देने की कोशिश की गई है। ऐसे 5 टिप्स बताए गए हैं, जिन्हें अपनी आदत में शामिल करके आप भी एग्जाम्स में अच्छे नंबर हासिल कर सकते हैं। विभिन्न एजुकेशन एक्सपर्ट्स और काउंसलर्स द्वारा
कभी सोचा है कि जब भी आप पढ़ने बैठते हैं, तो आपका ध्यान भटकाने वाली सबसे बड़ी चीज क्या होती है? आज के दौर में 90% से ज्यादा लोग डिजिटली डिस्ट्रैक्ट होते हैं। यानी फोन, टैब, लैपटॉप या कोई और गैजेट जहां वो किसी भी तरह से इंटरनेट की दुनिया का हिस्सा बन पाते हैं, वो चीजें ध्यान भटकाती हैं और पूरा समय बर्बाद कर देती हैं। गांठ बांध लें कि पढ़ते वक्त अपना फोन या ऐसा कोई भी गैजेट बंद करके अपने रूम से ही बाहर रख देंगे। आपके स्टडी जोन में एंटरटेनमेंट की कोई भी चीज नहीं होनी चाहिए। अगर लैपटॉप/ कंप्यूटर जरूरी है, तो उसपर उस वक्त पढ़ाई से जुड़ी चीजों के अलावा और कोई टैब खुला न हो।

अपनी-अपनी एनर्जी
दिन के 24 घंटे में वो कौन सा समय है जब आप सबसे ज्यादा एनर्जेटिक महसूस करते हैं। सबके लिए ये वक्त अलग-अलग हो सकता है। किसी के लिए सुबह तो किसी के लिए रात का समय पढ़ने के लिए बेहतर हो सकता है। उस टाइम को पहचानें और उस समय वो सब्जेक्ट्स या टॉपिक्स पढ़ें जो आपको मुश्किल लगते हैं। जब सुस्ती लगती हो, तब हल्के विषय उठाएं।

सिलेबस के छोटे हिस्से बनाएं
जल्दी-जल्दी सिलेबस पूरा करने की धुन पलटवार कर सकती है। एक बार में ढेर सारे चैप्टर निपटाने के चक्कर में न रहें। सिलेबस को छोटे-छोटे हिस्सों में बांटें। चैप्टर की जगह, घंटों या पन्नों के आधार पर लक्ष्य तय कर सकते हैं। जैसे- आज घंटेभर में 4 पेज पढ़ना है, या 1 घंटे में 10 सवाल हल करने हैं। अब आप सोचेंगे इससे क्या फायदा होगा? तो समझिए, जब हम छोटे-छोटे लक्ष्य बनाकर उसे पूरा करते जाते हैं, तो सफलता का एहसास होता है। दिमाग और मन में संतोष होता है, जिसके बाद अगले लक्ष्य के लिए पूरी लगन से जुटने का मन करता है।

पैसिव नहीं, एक्टिव रीडिंग करें

पैसिव रीडिंग का मतलब होता है किताब या नोट्स खोलकर बस आंखों से उसे पढ़ते रहना। ये बड़ा बोरिंग काम है। कुछ ही मिनटों में मन ऊबने लगता है। बजाय इसके, एक्टिव रीडिंग शुरू करें। यानी आंखों से पढ़ने के साथ-साथ जरूरी चीजें अंडरलाइन/ हाईलाइट करते जाएं, बोल-बोल कर पढ़ें, साथ-साथ जरूरी प्वाइंट्स नोट करते जाएं या फिर जो पढ़ा उसे बोलकर या लिखकर खुद को या किसी और को समझाएं, विजुअलाइज करें। ये हमारे दिमाग को नई जानकारी बेहतर तरीके से ग्रहण करने और उसे याद रखने में मदद करता है।

    ‘ तकनीक अपनाएं
    गंभीर विद्यार्थी होने का मतलब ये नहीं कि घंटों तक लगातार बैठकर पढ़ते ही रहें। उल्टा ये नुकसानदायक हो सकता है। क्योंकि वैज्ञानिक शोध भी कहते हैं कि एक निश्चित समय के बाद लगातार पढ़ी हुई सारी चीजें दिमाग लंबे समय तक याद नहीं रख सकता। इसका हल है पोमोडोरो टेक्नीक, जो कहता है कि आप 30 मिनट तक पूरी एकाग्रता के साथ पढ़ें। फिर 5 मिनट का ब्रेक लें। 3-4 बार यही साइकल दोहराने के बाद एक 25-30 मिनट का लंबा ब्रेक लें। इससे दिमाग रिलैक्स होता है और बेहतर फोकस में मदद मिलती है।