अशोक भाटिया
जम्मू-कश्मीर का राज्य का दर्जा 2019 में खत्म कर दिया गया और उसे केंद्र शासित प्रदेश बना दिया गया। तब से जम्मू-कश्मीर के नेताओं ने सड़क से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक केंद्र सरकार से लड़ाई लड़ी है, ताकि इसका पूरा राज्य का दर्जा वापस मिल सके। हालांकि, अभी तक पूरा राज्य का दर्जा नहीं मिला है। इस बीच, पूरे राज्य का दर्जा मिलने की संभावना को लेकर अहम संकेत मिल रहे हैं। केंद्रीय कानून और न्याय राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) अर्जुन राम मेघवाल ने दोहराया कि इस मामले पर जल्द ही फैसला आ सकता है। उनका यह बयान ऐसे समय में आया है जब घाटी में राजनीतिक दल लंबे समय से पूर्ण राज्य का दर्जा बहाल करने की मांग कर रहे हैं। कानून मंत्रालय द्वारा आयोजित एक क्षेत्रीय कार्यक्रम में शामिल हुए मेघवाल ने पत्रकारों से बात करते हुए इस मुद्दे को बेहद संवेदनशील बताया था । उन्होंने कहा कि चूंकि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने लोकसभा में कहा है कि जम्मू-कश्मीर अपने अधिकार वापस पाएगा, इसलिए ऐसा जरूर होगा। इसे एक प्रक्रिया बताते हुए उन्होंने कहा कि लोगों को इस बारे में जल्द ही फैसला सुनने को मिल सकता है।
जम्मू और कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला के अनुसार कि राज्य सरकार लगातार केंद्र सरकार के संपर्क रहा है और बातचीत चल रही है। उन्होंने कहा कि जब तक राज्य का दर्जा बहाल नहीं हो जाता, लोग संतुष्ट नहीं होंगे। उन्होंने यह भी माना कि इस प्रोसेस में उम्मीद से ज़्यादा समय लगा है। केंद्रीय मंत्री के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए, उमर अब्दुल्ला ने कहा कि लोग लंबे समय से “अच्छी खबर” का इंतज़ार कर रहे हैं और उम्मीद है कि इसमें बहुत देर नहीं होगी। उन्होंने कहा कि यह उम्मीद डेढ़ साल से बनी हुई है और सरकार को जल्द ही कोई फैसला लेना चाहिए।
गौरतलब है कि मोदी सरकार ने 5 अगस्त 2019 को जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 को खत्म करने के साथ-साथ प्रदेश का पूर्ण राज्य का दर्जा खत्म करते हुए उसे दो केंद्र शासित प्रदेशों (जम्मू-कश्मीर और लद्दाख) में बांट दिया था। इसके बाद से लगातार जम्मू-कश्मीर का पूर्ण राज्य दर्जा बहाल करने की मांग उठाई जाती रही। अब अगर छह साल बाद जम्मू-कश्मीर का पूर्ण दर्जा बहाल भी कर दिया जाता है तब भी विशेष राज्य वाला पुराना रुतबा हासिल नहीं हो सकेगा?
इसके पूर्व पीएम मोदी और केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से रविवार को मुलाकात की थी । इसके बाद से चर्चा चल पड़ी थी कि सरकार कोई बड़ा कदम उठाने जा रही है, लेकिन क्या फैसला लेगी, ये तस्वीर अब तक साफ नहीं थी । 5 अगस्त 2019 को मोदी सरकार ने अनुच्छेद 370 को खत्म कर ऐतिहासिक कदम उठाया था।
अब छह साल के बाद क्या फिर जम्मू-कश्मीर से जुड़े मुद्दे पर मोदी सरकार कुछ बड़ा फैसला लेने जा रही है? ऐसे में कयास लगाए जा रहे हैं कि जम्मू-कश्मीर को सरकार फिर से पूर्ण राज्य का दर्जा दे सकती है। दस महीने पहले ही जम्मू-कश्मीर को पूर्ण राज्य का दर्जा देने के प्रस्ताव को उपराज्यपाल ने मंजूरी दे रखी है और मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला की कैबिनेट ने प्रस्ताव पास कर उपराज्यपाल के जरिए केंद्र सरकार को भेज रखा है, जिस पर फैसला मोदी सरकार को लेना बाकी है ।
बताया जाता है कि पूर्ण राज्य के दर्जे के लिए केंद्र सरकार को जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन अधिनियम में बदलाव करने के लिए संसद का रास्ता अपनाना होगा। इसीलिए उमर अब्दुल्ला की अगुवाई वाली सरकार, केंद्र से राज्य के लिए दर्जा बहाली की मांग कर रही है। मोदी सरकार ने जिस तरह से संसद के जरिए धारा 370 को समाप्त किया था और जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन अधिनियम, 2019 के तहत जम्मू-कश्मीर राज्य को दो केंद्र शासित प्रदेशों में पुर्नगठित किया गया था। उसी तरह से सरकार को पूर्ण राज्य के दर्जे के लिए संसद में एक कानून पारित कर पुनर्गठन अधिनियम में बदलाव करना होगा। यह बदलाव संविधान की धारा 3 और 4 के तहत करने होंगे।
जम्मू-कश्मीर का पूर्ण राज्य का दर्जा देने के लिए लोकसभा और राज्यसभा में नए कानूनी बदलावों का अनुमोदन जरूरी होगा, यानी संसद से इस प्रस्ताव को मंजूरी मिलना जरूरी है। मंजूरी के बाद इसे राष्ट्रपति के पास भेजा जाएगा। उनकी मंजूरी के बाद जिस दिन राष्ट्रपति इस कानूनी बदलाव की अधिसूचना जारी करेंगे, उसी तारीख से जम्मू-कश्मीर को पूर्ण राज्य का दर्जा मिल जाएगा।
जम्मू और कश्मीर एक केंद्र शासित प्रदेश है, जिसका अर्थ है कि इसका प्रशासन सीधे केंद्र सरकार के अधीन है। जम्मू-कश्मीर की अपनी विधानसभा है, लेकिन पूर्ण राज्य की तुलना में उसे कम शक्तियां हासिल हैं। केंद्र शासित प्रदेशों में पुलिस और कानून-व्यवस्था केंद्र सरकार के अधीन रहती है। इसके अलावा जमीन का अधिकार भी केंद्र सरकार के पास होता, जिसे उपराज्यपाल के जरिए सरकार नियंत्रित करती है। उमर अब्दुल्ला लंबे समय से जम्मू कश्मीर को पूर्ण राज्य का दर्जा देने की मांग कर रहे हैं। इसके अलावा जम्मू-कश्मीर के दूसरे नेता भी लगातार यह मांग उठा रहे हैं।
जम्मू-कश्मीर को पूर्ण राज्य का दर्जा देने का अधिकार पूरी तरह से केंद्र सरकार के पास है। केंद्र की मोदी सरकार भी कह चुकी है कि समय आने पर जम्मू कश्मीर का पूर्ण राज्य दर्जा बहाल कर दिया जाएगा। केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह कई मंचों से कह चुके हैं कि उचित समय पर जम्मू-कश्मीर के पूर्ण राज्य का दर्जा बहाल कर दिया जाएगा, लेकिन यह सार्वजनिक मंच पर नहीं बताया जा सकता कि यह कब होगा। ऐसे में साफ है कि मोदी सरकार जम्मू-कश्मीर का पूर्ण राज्य का दर्जा देने के पक्ष में है, लेकिन समय-सीमा तय नहीं है।
हाल ही में पीएम मोदी ने उमर अब्दुल्ला की तारीफ करते हुए कहा था कि जम्मू-कश्मीर और देश के बाकी हिस्सों को पर्यटन के जरिए जोड़ने की यह कोशिश सराहनीय है। पिछले दिनों ऑल जम्मू-कश्मीर शिया एसोसिएशन के अध्यक्ष इमरान रजा अंसारी ने दिल्ली में अमित शाह से मुलाकात की थी । इस दौरान उन्होंने केंद्र शासित प्रदेश के लोगों से जुड़े कुछ जरूरी मुद्दे उठाए। उन्होंने आतंकवाद से प्रभावित परिवारों के पुनर्वास की बात भी कही। इसके चलते अनुमान लगाया जा रहा है कि जम्मू-कश्मीर को लेकर मोदी सरकार कोई बड़ा फैसला ले सकती है।
जम्मू-कश्मीर के राज्य बहाली मोदी सरकार करती है तो फिर कई चीजें बदल जाएंगी। जम्मू-कश्मीर की विधानसभा को पब्लिक ऑर्डर यानी सार्वजनिक व्यवस्था और समवर्ती सूची के मामलों में कानून बनाने के अधिकार मिलेंगे।सरकार कोई वित्तीय बिल पेश करती है तो इसके लिए उसे उपराज्यपाल की मंजूरी लेने की जरूरत नहीं होगी।एंटी करप्शन ब्यूरो और अखिल भारतीय सेवाओं पर राज्य सरकार का पूरा नियंत्रण हो जाएगा यानी राज्य में अधिकारियों के ट्रांसफर और पोस्टिंग राज्य सरकार के हिसाब से होंगे, उस पर उपराज्यपाल का नियंत्रण नहीं रहेगा।
राज्य की बहाली से आर्टिकल 286, 287, 288 और 304 में बदलाव से व्यापार, टैक्स और वाणिज्य के मामलों में राज्य की सरकार को सभी अधिकार हासिल हो जाएंगे। केंद्र शासित प्रदेश में विधायकों की संख्या के 10 फीसदी मंत्री बनाए जा सकते हैं, राज्य का दर्जा बहाल होने से मंत्रियों की संख्या का यह बंधन भी खत्म हो जाएगा और विधायकों की संख्या के 15 फीसदी तक विधायक मंत्री बनाए जा सकेंगे।केंद्र शासित प्रदेशों में पुलिस और कानून-व्यवस्था केंद्र सरकार के अधीन रहती है, लेकिन अगर पूर्ण राज्य का दर्जा मिल जाता है, तो यह जिम्मेदारी पूरी तरह राज्य सरकार के हाथ में आ जाएगी, जिससे राज्य सरकार सीधे कानून व्यवस्था से जुड़े फैसले ले सकेंगे। भूमि और राजस्व से जुड़े मामलों का नियंत्रण केंद्र सरकार के पास होता है, लेकिन जब किसी प्रदेश को पूर्ण राज्य का दर्जा मिलता है, तो यह अधिकार राज्य सरकार के पास चला जाता है। इससे राज्य की स्वायत्तता और स्वतंत्रता में बढ़ोतरी होती है। पूर्ण राज्य बनने पर उपराज्यपाल की भूमिका घट जाती है और राज्यपाल की नियुक्ति होती है, जो मुख्यतः औपचारिक भूमिका निभाते हैं, जैसा कि अन्य राज्यों में होता है।
साथ ही जम्मू-कश्मीर में कुछ ऐसे क्षेत्र हैं, जहां राज्य सरकार की शक्तियां पहले जैसी नहीं लागू हो सकेंगी। जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन अधिनियम, 2019 के तहत, केंद्र की सरकार को कुछ विशेष शक्तियां प्राप्त हैं, जो राज्य सरकार की शक्तियों को सीमित कर सकती हैं। सुरक्षा और कानून व्यवस्था केंद्र सरकार के अधीन हो सकती है, जिससे राज्य सरकार की शक्तियां सीमित रहेंगी। इसके अलावा राज्य सरकार की वित्तीय शक्तियों पर कुछ प्रतिबंध हो सकते हैं, जैसे कि कुछ वित्तीय निर्णयों के लिए केंद्र सरकार की मंजूरी की आवश्यकता होगी। प्रदेश की कुछ नीतिगत निर्णय जो पहले राज्य सरकार के अधीन थे, अब केंद्र सरकार के अधीन हो सकते हैं, जिससे राज्य सरकार की शक्तियां सीमित हो सकती हैं। इसके अलावा राज्य में पहले विधान परिषद की व्यवस्था थी, जो राज्य सरकार चाहकर भी बहाल नहीं पर पाएगी। इसका फैसला केंद्र सरकार के पास होगा और केंद्र सरकार के फैसले को राज्य सरकार सूबे में लागू करने से नहीं रोक पाएगी। भारतीय संविधान के सभी प्रावधानों को जम्मू-कश्मीर पर लागू करने से राज्य सरकार रोक नहीं पाएगी।





