पानी के स्थाई समाधान के लिए पश्चिम राजस्थान में मिले अथाह पानी के दोहन के लिए कोई ठोस कदम उठाएंगी सरकार?

Will the government take any concrete steps to exploit the vast amount of water found in western Rajasthan for a permanent solution to the water problem?

गोपेन्द्र नाथ भट्ट

देश के सबसे बड़े भू भाग वाले विशाल प्रदेश राजस्थान के वाशिंदों की नजर इन दिनों केन्द्र और राजस्थान सरकार द्वारा पेश किए जाने वाले आम बजट पर टिकी हुई हैं। राजस्थान के मुख्यमंत्री भजन लाल शर्मा इन दिनों समाज के हर वर्ग से बजट पर उनके सुझाव और सलाह लेने के लिए मशविरा कर रहे हैं । इस सिलसिले में मुख्यमंत्री शर्मा ने बुधवार को जयपुर में आयोजित विभिन्न कार्यक्रमों में राजस्थान की सबसे पहली जरूरत पानी को ही बताया है और कहा है कि उनकी सरकार ने प्रदेश में पानी के संकट के लिए समाधान के लिए एक रोडमेप बनाया है और इस दिशा में तेजी से आगे बढ़ा जा रहा हैं।

इसी दौरान केन्द्रीय जलशक्ति मंत्री सी.आर. पाटिल ने जयपुर के सांगानेर में वर्षा जल संचयन से जुड़े एक कार्यक्रम में भाग लेते हुए घोषणा की है कि वह दिन दूर नहीं जब प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में राजस्थान सबसे अधिक पानी वाला राज्य होगा। उन्होंने कहा कि भजनलाल सरकार प्रदेश को जल के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने के लिए गंभीर प्रयास कर रही हैं। केंद्रीय मंत्री पाटिल ने बताया कि राज्य में पानी की किल्लत को दूर करने के लिए प्रधानमंत्री मोदी ने राज्य को संशोधित पीकेसी लिंक परियोजना (एकीकृत ईआरसीपी) के रूप में एक बड़ा तोहफा दिया है। करीब 70 हजार करोड़ रुपये लागत की इस परियोजना में राज्य सरकार पर मात्र 10 प्रतिशत वित्तीय भार ही आएगा और 90 प्रतिशत अंशदान केन्द्र सरकार देगी। यमुना जल समझौते से प्रदेश के शेखावाटी क्षेत्र की जल समस्या का भी स्थायी समाधान हो जाएगा।

पाटिल ने कहा कि राजस्थान के लोगों से अधिक पानी के महत्व को कोई नहीं समझ सकता है। पहले के समय में राजस्थानी लोग जहां भी जाते थे वहां प्याऊ बनवाते थे लेकिन अब प्याऊ की जगह धरती की प्यास बुझाने के लिए वाटर रिचार्ज स्ट्रक्चर बनवाने की जरूरत है ताकि हर गांव का पानी गांव में, हर खेत का पानी खेत में और हर घर का वर्षा जल घर में ही जमीन में उतर सके। कर्मभूमि से मातृभूमि अभियान प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अनूठी संकल्पना ‘कैच द रेन’ से प्रेरित है। इस अभियान में राजस्थान में वर्ष 2027-28 तक 45 हजार रैन वाटर रिचार्ज स्ट्रक्चर बनाए जाने हैं,जो वर्षा का पानी संग्रहित कर भूमिगत पानी के स्तर को बढ़ाएंगे। देश भर में 10 लाख रैन वाटर रिचार्ज बोर के लक्ष्य के साथ चलाया जा रहा यह अभियान जन भागीदारी से जन आंदोलन में परिवर्तित होता जा रहा है। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा की पहल पर राजस्थान के उद्यमियों और भामाशाहों को इस अभियान में जोड़ने के लिए सराहनीय कार्य किया जा रहा है।

कार्यक्रम में मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने कहा कि राजस्थान में जल संसाधनों की सीमितता को देखते हुए वर्षा जल को व्यर्थ बहने से रोकना और संरक्षित करना आवश्यक है। इस अभियान में प्रवासी राजस्थानियों की मदद ली जा रही है तथा आमजन भी जल की एक-एक बूंद के महत्व को समझते हुए जल संचय में जुड़े, इस उद्देश्य से शुरू किया गया ‘कर्मभूमि से मातृभूमि’ अभियान अब गति पकड़ रहा है। मुख्यमंत्री शर्मा ने एक अन्य कार्यक्रम में कहा कि पानी की कमी के चलते ही प्रदेश के मारवाड़ी देश और दुनिया के अन्य भागों में जाने को मजबूर हुए थे लेकिन अब परिस्थितियों बदल रही हैं और हमारा प्रयास है कि प्रदेश में पानी की समस्या का स्थाई समाधान हों ताकि आम लोगों को जल संकट से छुटकारा मिल सके।

उल्लेखनीय है कि भूजल और सतही जल की कमी के कारण राजस्थान के अधिकांश ब्लॉक डार्क जॉन मे है और गर्मियों में पानी की कमी के कारण प्रदेश के कई हिस्सों में विशेष रेलगाड़ियों और टैंकरों से नागरिकों को पेयजल की आपूर्ति करनी पड़ती हैं। इन विषम हालातों के मद्दे नजर ही प्रदेश की हर सरकार राजस्थान को विशेष राज्य का दर्जा देकर विशेष केन्द्रीय अनुदान देने की मांग करती आ रही हैं। आजादी के बाद पश्चिम राजस्थान में फैले विशाल थार रेगिस्तान के वाशिंदों की दिक्कतों को ध्यान में रख भारत सरकार की मदद से विश्व की सबसे बड़ी राजस्थान नहर परियोजना का काम हाथ में लिया गया था तथा बाद में नाम परिवर्तन के साथ ही इस इन्दिरा गाँधी नहर परियोजना का कार्य पूरा होने से उत्तर पश्चिम राजस्थान का एकदम हुलिया ही बदल गया है तथा उन मरुस्थलीय सूखे इलाकों में अन्न केभंडार पैदा होने लगे हैं। साथ ही इन इलाकों में धरती ने हरियाली का आवरण भी ओढ़ लिया हैं। इसी मध्य राजस्थान के रेगिस्तान में तेल गैस और पानी के अथाह भंडार मिलना भी राजस्थान के लिए एक बहुत बड़ा शुभ संकेत हैं। हाल ही राज्य के जैसलमेर जिले के मोहनगढ़ में ट्यूबवेल खुदाई के दौरान जमीन से अथाह जल का फव्वारा फूटने के बाद अब चौंकाने वाला यह खुलासा हुआ हैं कि रेत के समंदर की इस धरती से पानी के साथ-साथ गैस का भी रिसाव हुआ है, जिससे यहां के भूगर्भ में गैस के अथाह भंडार होने के संकेत भी मिल रहे हैं।

माना जा रहा है कि गैस के दबाव की वजह से ही पानी का फव्‍वारा फूट पड़ा था और आस-पास के खेत तालाब बन गए थे।

यहां तक नलकूप खोद रहा ट्रक भी पानी में समा गया था। राजस्थान में बाड़मेर- सांचौर बेसिन क्षेत्र करीब 3111 वर्ग किमी में फैला हुआ है। यहां वर्ष 2004 में देश की सबसे बड़ी तेल खोज मंगला क्षेत्र में हुई थी और इसके बाद वहां 38 तेल कुओं से तेल उत्पादन हो रहा है। यहां प्रतिदिन 1.75 लाख बैरल से अधिक तेल उत्पादित हो रहा है जो 2025-26 तक रिफाइनरी बनने तक 5.5 लाख बैरल तक पहुंच जाएगा। इस क्षेत्र में क्रूड ऑयल 750 से 2000 मीटर तक की गहराई पर मिला है। राजस्थान के थार के रेगिस्तान में तेल और गैस के बाद रेगिस्तान इलाके माडपुरा बरवाला के पास छोटे सागर के रूप में पानी का अथाह भंडार मिला है। वैज्ञानिकों के अनुसार बाड़मेर से जालौर तक भूगर्भीय विस्तार वाले इस 4,800 खरब लीटर के पानी के भंडार की सबसे बड़ी चुनौती इसका खारापन है। यदि केंद्र सरकार का जलशक्ति मंत्रालय इसको मिशन के रूप में हाथ में ले तो खाड़ी देशों की तरह पानी की लवणीयता खत्म कर इस इलाके की 10 लाख की आबादी को हजारों सालों तक पानी की आपूर्ति की जा सकती है।

देखना है राजस्थान और भारत सरकार अपने आने वाले आम बजट में राजस्थान में पानी की कमी के स्थाई समाधान के लिए पश्चिम राजस्थान में मिले पानी के इन अथाह भंडारों के दोहन के लिए कोई ठोस कदम उठाएंगी?