अजय कुमार
उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में अब साल भर से कम समय बचा है। चुनाव की आहट ने नेताओं के चेहरों पर बेसब्री और भाषा में तीखापन दिखने लगा है। दादरी में सपा की रैली हो चुकी है और अब बीजेपी 13 को रैली करने जा रही है। मुजफ्फरनगर और दादरी दोनों जगह 2022 विधानसभा चुनाव में भाजपा ने सीधी जीत दर्ज की, लेकिन समाजवादी पार्टी भी आगे की लड़ाई जीतने का दावा कर रही है। मुजफ्फरनगर विधानसभा क्षेत्र में भाजपा के कपिल देव अग्रवाल ने 49.6 फीसदी वोट के साथ रालोद के सौरभ से लगभग 18 हजार वोटों के अंतर से जीत दर्ज की, जबकि सपा इस चुनाव में तीसरे स्थान पर थी। इसके बावजूद 2024 लोकसभा चुनाव में सपा ने मुजफ्फरनगर लोकसभा सीट पर करीब 25 हजार वोट से भाजपा को हरा दिया, जो दिखाता है कि क्षेत्र में जाट-किसान वोट भाजपा से थोड़ा फिसलकर सपा की ओर बढ़ रहा है।
दादरी विधानसभा क्षेत्र में 2022 में भाजपा के तेजपाल सिंह नगर ने सपा के राज कुमार को 1.38 लाख वोट के विशाल अंतर से हरा दिया, जो यहां भाजपा की मजबूत स्थिति को दर्शाता है। हालांकि अखिलेश यादव की हालिया जनसभा और गुर्जर-दलित एकता के नारे यहां सपा के प्रयास को दर्शाते हैं कि वह गुर्जर वोट को भाजपा से अलग करने की कोशिश कर रही है। इसके बावजूद दादरी में भाजपा की मजबूत जड़ें और बड़ा जीत का अंतर दिखाता है कि यहां पार्टी की राजनैतिक स्थिति अभी आक्रामक और अधिक दृढ़ बनी हुई है, जबकि सपा जनसभाओं और आंदोलन के जरिये मतदान समीकरण बदलने की कोशिश में है।
पश्चिमी उत्तर प्रदेश के किसान, जाट और दलित बहुल 18 जिलों में 2022 विधानसभा चुनावों ने राजनीतिक समीकरणों को नया मोड़ दिया था। यहां समाजवादी पार्टी ने अप्रत्याशित उछाल के साथ सबसे अधिक सीटें हासिल कीं, जबकि भारतीय जनता पार्टी को भारी नुकसान झेलना पड़ा। दादरी में अखिलेश यादव की हालिया जनसभा और मुजफ्फरनगर में 13 अप्रैल को होने वाली भाजपा की बड़ी रैली इसी क्षेत्रीय गोलबंदी का हिस्सा बन रही है। मुजफ्फरनगर, शामली, बागपत, मेरठ, गाजियाबाद, गौतमबुद्धनगर, बुलंदशहर, हापुड़, सहारनपुर, मुजफ्फरनगर, बिजनौर, अमरोहा, मथुरा, आगरा, फिरोजाबाद, मैनपुरी, एटा और कासगंज जैसे इन जिलों में कुल 84 विधानसभा सीटें हैं। 2022 में सपा ने 35 सीटें जीतीं, जो 2017 के मुकाबले करीब दोगुनी हैं। भाजपा को मात्र 22 सीटें मिलीं, जबकि उसके सहयोगी राष्ट्रीय लोक दल को सात और अपना दल को तीन सीटें हाथ लगीं। बहुजन समाज पार्टी चार सीटों तक सिमट गई।
जाट बहुल जिलों जैसे मुजफ्फरनगर में सपा ने छह में से चार सीटें जीत लीं, जबकि भाजपा को महज एक मिली। बागपत में भी सपा ने तीन सीटें हथिया लीं। किसान आंदोलन का असर साफ दिखा, जहां जाट वोट सपा की ओर खिसके। दलित बाहुल्य क्षेत्रों में भी सपा ने 10 से अधिक सीटें ले लीं, खासकर मेरठ और बुलंदशहर में। भाजपा को गौतमबुद्धनगर और आगरा जैसे शहरी इलाकों में कुछ राहत मिली, लेकिन ग्रामीण इलाकों में हार का सामना करना पड़ा। यह प्रदर्शन पश्चिमी यूपी को सपा का गढ़ बनाने का संकेत देता है। भाजपा अब मुजफ्फरनगर रैली से जाट, किसान और दलित वोटों को फिर से एकजुट करने की कोशिश कर रही है। 2027 के विधानसभा चुनावों से पहले यह गोलबंदी निर्णायक साबित हो सकती है।





