मिट्टी में मिला दिए गए माफिया अतीक-अशरफ की फरार पत्नियों पर योगी सरकार का शिकंजा

Yogi government tightens its grip on absconding wives of mafia Atiq-Ashraf who were crushed to death

संजय सक्सेना

उत्तर प्रदेश के अपराध जगत में एक के बाद एक होते घटनाक्रम से यह स्पष्ट होता जा रहा है कि जांच एजेंसियां अब किसी भी फरार अपराधी को बख्शने के मूड में नहीं हैं। बहुचर्चित शाइन सिटी घोटाले में प्रवर्तन निदेशालय के अनुरोध पर भगोड़े आर्थिक अपराधी राशिद नसीम को संयुक्त अरब अमीरात के दुबई शहर में गिरफ्तार किया गया है। यह गिरफ्तारी न केवल हजारों ठगे गए निवेशकों के लिए उम्मीद की किरण लेकर आई है, बल्कि प्रयागराज में वर्षों से फरार चल रहे अन्य खतरनाक अपराधियों के लिए भी एक कड़ा संदेश बन गई है।राशिद नसीम शाइन सिटी समूह का अध्यक्ष बताया जाता है। उस पर आरोप है कि उसने रियल एस्टेट, निवेश योजनाओं और बहुस्तरीय विपणन के नाम पर हजारों निवेशकों से लगभग एक हजार करोड़ रुपये की ठगी की। वह वर्ष 2019 में नेपाल के रास्ते दुबई फरार हो गया था। देश छोड़ने से पहले उसने तीस करोड़ रुपये की रकम गुजरात की एक कंपनी के जरिये विदेश भेज दी थी। जनवरी 2026 में प्रवर्तन निदेशालय ने उसके खिलाफ यूएई अधिकारियों को एक विस्तृत आरोप-पत्र सौंपा था, जिसके बाद उसकी गिरफ्तारी हुई।लखनऊ की विशेष न्यायालय ने उसे भगोड़ा आर्थिक अपराधी घोषित किया था। प्रवर्तन निदेशालय ने उसकी एक सौ सत्ताईस करोड़ रुपये की संपत्ति भी जब्त की है। उसके खिलाफ गैर-जमानती वारंट, लुकआउट सर्कुलर और इंटरपोल का लाल नोटिस भी जारी किया जा चुका था। इस पूरी कार्रवाई को जांच एजेंसियों की बड़ी सफलता के तौर पर देखा जा रहा है।

राशिद नसीम की गिरफ्तारी ने प्रयागराज पुलिस की नींद उड़ा दी है। अब उन तमाम फरारों की तलाश तेज कर दी गई है जो वर्षों से कानून की आंखों में धूल झोंककर छिपते फिर रहे हैं। इनमें सबसे प्रमुख नाम माफिया अतीक अहमद की पत्नी शाइस्ता परवीन और अतीक के भाई अशरफ की पत्नी जैनब फातिमा का है। अतीक की पत्नी शाइस्ता परवीन, अशरफ की पत्नी जैनब फातिमा और अतीक की बहन आयशा नूरी पहले से ही वांछितों की सूची में हैं। इन सभी के बारे में सवाल उठाए जा रहे हैं कि इनकी गिरफ्तारी आखिर कब होगी।अतीक अहमद के भाई अशरफ की पत्नी जैनब फातिमा भी उमेश पाल हत्याकांड की साजिश में शामिल मानी जाती है। उसकी बहन आयशा नूरी ने इस वारदात के बाद अपने घर पर असद और गुड्डू को शरण दी थी, जिसका बंद कैमरे का दृश्य भी सामने आया था। शाइस्ता परवीन प्रयागराज के दामूपुर गांव की रहने वाली है। उसके पिता मोहम्मद हारून एक सेवानिवृत्त पुलिस कांस्टेबल हैं। शाइस्ता के खिलाफ अब तक चार मामले दर्ज हो चुके हैं। उसने कथित रूप से अपने बेटे असद और शूटर गुलाम को उमेश पाल की हत्या के बाद प्रयागराज से भाग जाने के लिए कहा था। पुलिस की एक सिपाही की बेटी का इस तरह माफिया की दुनिया में उतरना और फिर खुद कानून से भागते फिरना, यह कहानी समाज के उस पतन की तस्वीर है जो संगत और परिस्थितियों के बदलाव से इंसान को कहां से कहां ले जाती है।

उत्तर प्रदेश पुलिस ने शाइस्ता परवीन का नाम वांछितों की सूची में डाल दिया है और उसके बारे में जानकारी देने वाले को पचास हजार रुपये के इनाम की घोषणा भी की गई है। लखनऊ में एक बेनामी संपत्ति की सौदेबाजी से मिलने वाली बारह करोड़ रुपये की रकम को जैनब और शाइस्ता तक पहुंचाना एक वकील का मकसद था। यह भी पता चला कि इस रकम की मदद से दोनों विदेश भागने की फिराक में थी.उमेश पाल हत्याकांड के बाद से माफिया अतीक अहमद की पत्नी शाइस्ता परवीन पुलिस की पकड़ से बाहर है। उनकी और जैनब फातिमा की तलाश में देर रात प्रयागराज के कई इलाकों में पुलिस ने घर-घर तलाशी चलाई। एक समय शाइस्ता परवीन की उपस्थिति उड़ीसा में होने के संकेत मिले थे, जिसके बाद विशेष कार्यबल ने वहां की पुलिस को सतर्क किया और एक दल ने जाकर जांच भी की। लेकिन बावजूद इसके वह पुलिस के हाथ नहीं आई।

अब राशिद नसीम की दुबई से गिरफ्तारी के बाद प्रयागराज पुलिस नए जोश के साथ मैदान में उतर गई है। सूत्रों के अनुसार, पुलिस शाइस्ता परवीन और जैनब फातिमा को औपचारिक रूप से अत्यंत वांछित की सूची में शामिल करने की तैयारी कर रही है, जिससे उनकी तलाश को और अधिक संगठित एवं प्राथमिकता वाली मुहिम का रूप दिया जा सके। यह कदम इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि इस सूची में शामिल होने के बाद अन्य राज्यों की पुलिस भी और सक्रियता से इन महिलाओं की तलाश में जुट जाएगी।

उमेश पाल की हत्या के बाद से शाइस्ता परवीन और जैनब फरार हैं। कई बार उनके प्रयागराज पहुंचने की सूचनाएं मिलीं, जिसके आधार पर पुलिस ने माफिया अतीक अहमद के करीबियों के घरों पर छापेमारी भी की, लेकिन देर तक चली तलाशी के बाद भी दोनों का कोई पता नहीं चल सका। जांच एजेंसियों का मानना है कि राशिद नसीम की गिरफ्तारी से एक संदेश जाएगा कि अब विदेश में बैठकर भी कानून से मुक्ति नहीं मिल सकती। जब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर फरार बैठा एक आर्थिक अपराधी दुबई की सड़कों से उठाया जा सकता है, तो देश के भीतर छिपे अपराधियों की गिरफ्तारी तो और भी संभव है। प्रयागराज पुलिस के लिए यह गिरफ्तारी एक प्रेरणा बन गई है। अब देखना यह है कि वह दिन कब आएगा जब शाइस्ता परवीन, जैनब फातिमा और अन्य फरार अपराधी कानून के कठघरे में खड़े होंगे और उमेश पाल समेत अन्य पीड़ितों के परिजनों को वास्तविक न्याय मिलेगा।