अशोक भाटिया
उत्तर प्रदेश में चाइनीज मांझे को लेकर योगी सरकार ने कड़ा रुख अपनाया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने निर्देश दिए हैं कि चाइनीज मांझे से होने वाली मौत को अब हादसा नहीं, बल्कि हत्या माना जाएगा। इस फैसले के बाद प्रदेश भर में चाइनीज मांझे की बिक्री और भंडारण के खिलाफ विशेष अभियान शुरू हो गया है।मुख्यमंत्री के आदेश के बाद पुलिस और प्रशासन को संयुक्त रूप से छापेमारी कर कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए हैं। उल्लेखनीय है कि उत्तर प्रदेश में चाइनीज मांझा पहले से ही प्रतिबंधित है, इसके बावजूद कई स्थानों पर इसकी खुलेआम बिक्री हो रही थी। इसव मान लेना चाहिए कि जब जागे तब हुआ सवेरा . क्योकि जानलेवा चाइनीज मांझे का कहर थमने का नाम नहीं ले रहा था । उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, राजस्थान समेत कई इलाकों में कई वर्षों से मांझे की वजह से कई हादसे होते रहते हैं। हाल के दिनों में लखनऊ में एक बाइक सवार की मौत समेत कई गंभीर हादसे सामने आए हैं, जिनमें धारदार चाइनीज़ मांझे से लोगों का गला कट गया। महाराष्ट्र के वाशिम जिले की बात करें जहां चाइनीज मांझे की वजह से 57 साल के एक व्यक्ति का गला कट गया। दरअसल वो बाइक से अपने घर लौट रहे थे। इसी दौरान खंडोबा मंदिर के पास सड़क पर लटक रहे मांझे की चपेट में आने से उनके गले पर गंभीर चोट आई हैं। जैसे ही शख्स को चोट लगी, उन्होंने तुरंत बाइक रोक दी। उनकी इसी समझदारी की वजह से जान बच गई और एक बड़ी दुर्घटना टल गई।
राजस्थान के बांसवाडा में भी कुछ ऐसा ही हुआ था । मोहन कॉलोनी से निकलते हुए एक बुजुर्ग का पैर चाइनीज मांझे में उलझ गया, जिसकी वजह से वो लड़खड़ाते हुए जमीन पर गिर गए।चाइनीज मांझे की चपेट में आने की वजह से उन्हें गहरी चोट आई। राहगीरों ने उन्हें गंभीर हालत में अस्पताल पहुंचाया। डॉक्टर ने बताया कि पैर की एड़ी में मांझा अंदर तक चला गया जिसकी वजह से घाव ज्यादा गहरा है। वहीं उत्तर प्रदेश के फर्रुखाबाद में भी चाइनीज मांझे ने एक बाइक सवार को अपना शिकार बनाया। रविवार को बाइक से घर लौट रहे युवक की चाइनीज मांझे की वजह से गर्दन कट गई। गनीमत ये रही कि बाइक की स्पीड कम थी, जिससे युवक ज्यादा जख्मी नहीं हुआ। हादसे के तुरंत बाद उसने तुरंत अस्पताल जाकर इलाज करवाया।
पोलिस खुद इन हादसों से बची हुई नहीं है । पिछले साल ही घर आने-जाने के दौरान महाराष्ट्र के मुंबई के डिंडोशी पुलिस में तैनात एक पुलिसकर्मी का गला मांझे से कट गया, जिससे उसकी मौत हो गई इन शिकायतो के बाद ही पिछले दिनों में शहर के कम से कम पांच पुलिस स्टेशनों ने चीनी मांझा बेचते, स्टॉक करते या उपयोग करते हुए पकड़े गए व्यक्तियों के खिलाफ मामले दर्ज किए थे । गौरतलब हो कि इसके पहले को खेरवाड़ी पुलिस के अधिकार क्षेत्र में कांस्टेबल समीर जाधव की जान भी चली गई थी जब वकोला फ्लाईओवर से लटके चीनी मांझे से उनका गला कट गया। तब खेरवाड़ी पुलिस ने आईपीसी की धारा 304-ए के तहत एक अज्ञात व्यक्ति के खिलाफ स्वत: संज्ञान लेते हुए मामला दर्ज किया। इस दुखद घटना के बाद पुलिस ने चीनी मांझा की बिक्री और खरीद में शामिल लोगों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने के अपने प्रयास तेज कर दिए हैं।
चाइनीज मांझा न सिर्फ इंसानों के लिए बल्कि पशु-पक्षियों के लिए भी बहुत खतरनाक है और हर साल सैकड़ों पक्षी इसमें फंसकर अपनी जान गंवा देते हैं। दरअसल पतंगबाजी का मजा लेने वाले बच्चे व बड़े आपस में पतंग को लड़ाकर उसका मजा लेते हैं। पतंग लड़ाने के लिए लोग डोर को कटने से बचाने के लिए मजबूत धागे के लिए चाइनीज मांझे का इस्तेमाल करते हैं। यह मांझा सादे धागे के मुकाबले सस्ता और मजबूत होता है। इस कारण इसकी मांग ज्यादा रहती है। डिमांड के कारण दुकानदार प्रतिबंध के बावजूद भी चोरी छिपे बेचते हैं।
आज भारत समेत दुनिया के कई देशों में पतंगबाजी की प्रतियोगिताएं आयोजित की जाती हैं, लेकिन पतंगबाजी का सबसे पुराना प्रमाण चीन में मिलता है। हान राजवंश के शासनकाल में पतंगों का सैन्य उपयोग भी होता था। वहां के सैन्य कमांडरों ने दुश्मन सेना की स्थिति और दूरी का पता लगाने के लिए पतंगों का भी इस्तेमाल किया। कहा जाता है कि पतंगबाजी भी चीन के रास्ते भारत पहुंची है।
अब आपके मन में भी यह सवाल उठ रहा होगा कि आखिर यह मांझा इतना खतरनाक क्यों है और एक पतला धागा लोगों की जान कैसे ले सकता है? इसका कारण यह है कि पतंगबाजी के लिए इस्तेमाल किया जाने वाला सामान्य मांझा कपास का बना होता है, लेकिन चीनी मांझा नायलॉन और अन्य सिंथेटिक सामग्री से बना होता है। यह मांजा कांच, लोहे के पाउडर और कई अन्य रसायनों के साथ लेपित है। इस वजह से मांझा और भी तीखा और जानलेवा हो जाता है। चाइनीज मांझा साधारण मांझा की जगह स्ट्रेचेबल होता है यानी टूटने की बजाय खिंचता रहता है। इतना ही नहीं चीनी मांझा में धातु के चूर्ण के प्रयोग से यह विद्युत का सुचालक होता है, अर्थात इसमें से करंट प्रवाहित हो सकता है और इसलिए बिजली के झटके का खतरा रहता है, लेकिन इसके खतरों से वाकिफ होने के बावजूद आज बाजार में इसकी काफी मांग है, क्योंकि जब लोग पतंग उड़ाते हैं तो चाहते हैं कि उनकी पतंग न कट जाए और वे दूसरों की ज्यादा से ज्यादा पतंगें काट सकें।
साल 2017 में NGT यानी नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल ने इस मांझा पर पूरी तरह से रोक लगा दी थी। पर्यावरण विभाग के तहत 10 जनवरी 2017 को एक अधिसूचना जारी की गई थी, जिसके अनुसार पतंगबाजी के लिए नायलॉन, प्लास्टिक और किसी भी तरह की सिंथेटिक सामग्री पर पूर्ण प्रतिबंध है। इसके अलावा कांच, धातु या अन्य नुकीली चीजों से बने धागों पर भी पतंग उड़ाने पर रोक लगा दी गई है। नियम के मुताबिक, सूती धागे से बने धागों से पतंग उड़ाई जा सकती है, लेकिन इनमें भी किसी न किसी तरह का धागा होता है, तेज वस्तुओं का प्रयोग नहीं करना चाहिए। इन नियमों का उल्लंघन कड़ी सजा के साथ दंडनीय है। अगर कोई ऐसा करते पाया जाता है तो उसे 5 साल तक की कैद और एक लाख रुपये तक के जुर्माने से भी दंडित किया जा सकता है।
इतने सख्त नियम होने के बावजूद आज देश भर में में चीनी मांझा का कारोबार फलफूलता रहा है। व्यवसायी कानून की धज्जियां उड़ा रहे हैं और इन घातक मांझा को लोगों को बेच रहे हैं, और खरीदने वालों की कोई कमी नहीं है। मांझा के व्यापारी पुलिस को चकमा देने के लिए हाईटेक तरीके अपना रहे हैं और इसके लिए फेसबुक जैसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल कर रहे हैं।
गौरतलब है कि कई राज्यों में राज्य सरकारों ने चाइनीज मांझे पर कई बार बैन लगा चुकी है और प्रशासन को कार्रवाई के आदेश दिए गए हैं। हर साल पंतग के सीजन के दौरान चाइनीज मांझे का जिक्र होता है पर बाद में लोग व शासन इसे भूल जाता है । कई लोगों का मानना है कि यह मांझा चीन से आता है और अब चीनी सामानों का बहिष्कार किया जा रहा है, इसलिए इस पर बैन लगाया गया है।
जानकारों की मानें तो अब मांझा चीन से नहीं बल्कि तेज धार के साथ इंडिया में भी बन रहा है। सूत्रों का कहना है कि मुंबई में मांझे की फैक्ट्रियां नहीं हैं। मुंबई में बाहर से चोरी चुपके लाया जाता है। यह मांझा प्लास्टिक का बना होता है। काफी मजबूत है। चाइनीज मांझे को मेटलिक कोटिंग से तैयार किया जाता है। चाइनीज मांझे की कई वैरायटी बन रही हैं। इसे बनाने में अधिकतर केमिकल और अन्य धातुओं का इस्तेमाल हो रहा है। इनमें शीशा, वज्रम गोंद, मैदा, एल्युमीनियम ऑक्साइड और जिरकोनिया ऑक्साइड शामिल है। इन सभी चीजों के मिक्स होने पर तेज धार वाला चाइनीज मांझा तैयार होता है। यह आसानी से टूटता नहीं है। इसमें ब्लेड जैसी धार होती है। वैसे बाजार में मिलने वाले सभी मांझे घातक होते हैं, लेकिन इनमें चाइनीज मांझा सबसे खतरनाक साबित है ।
पुलिस हर साल समय समय पर मांझे को लेकर नोटिफिकेशन जारी करती है। जहां भी बिक्री होती है, पुलिस एक्शन लेती है। चूंकि पतंग कटने के बाद हवा में उड़ता हुआ मांझा हादसे की वजह बनता है। ऐसे में पुलिस के सामने पतंग उड़ाने वाले का पता करना बड़ी चुनौती होती है। आखिर यह पतंग कहां से कटकर आई है। कौन उड़ा रहा था। अगर किसी को चाइनीज मांझे की बिक्री के बारे में पता चले तो फौरन पुलिस को सूचना देना चाहिए । दरअसल मकर संक्रांति के पहले पतंग उड़ाने में इस्तेमाल होने वाला चायनीज नायलॉन मांझा लगातार सड़क दुर्घटनाओं का कारण बनता जा रहा है। कई जगहों पर प्रशासन इसके इस्तेमाल पर बैन लगाने की मुहिम तो चला रहा है। लेकिन फिर भी दुकानदार इसे बेचने से बाज नहीं आ रहे और लोग इसे खरीद भी रहे हैं। बच्चे इस मांझे का इस्तेमाल कर रहे हैं जो काफी खतरनाक साबित हो सकता है। सिर्फ इंसान ही नहीं बल्कि पक्षी भी चाइनीज मांझे का शिकार बन रहे हैं। ऐसे में जरूरी है कि इस बिक्री पर कड़ी रोक लगाई जाए।





