टीएमयू में कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग के छात्रों को सौर ऊर्जा का सघन प्रशिक्षण

Intensive training in solar energy to the students of College of Engineering at TMU

रविवार दिल्ली नेटवर्क

तीर्थंकर महावीर यूनिवर्सिटी के कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग के इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग विभाग की ओर से छह सप्ताह के प्रशिक्षण प्रोग्राम में सोलर पैनल की स्थापना, सिस्टम डिजाइनिंग और रखरखाव का दिया व्यावहारिक ज्ञान

तीर्थंकर महावीर यूनिवर्सिटी, मुरादाबाद के कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग के इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग विभाग की ओर से सोलर एनर्जी टेक्नोलॉजी एंड एप्लीकेशन पर छह सप्ताह की वर्कशॉप में सौर ऊर्जा के मूल सिद्धांतों, सोलर फोटोवोल्टिक- पीवी तकनीक, सौर सेल एवम् पैनलों की कार्यप्रणाली, इन्वर्टर, बैटरी, चार्ज कंट्रोलर सरीखे उपकरणों की उपयोगिता पर विस्तार से चर्चा की गई। केन्द्र सरकार के सूक्ष्म, लघु एवम् मध्यम उद्यम मंत्रालय- एमएसएमई की पहल के तहत इलेक्ट्रॉनिक्स सर्विस एंड ट्रेनिंग सेंटर- ईएसटीसी, हल्द्वानी की ओर से हुई वर्कशॉप में ईएसटीसी के वरिष्ठ प्रशिक्षक श्री आदित्य चौधरी ने कहा, घरेलू और व्यावसायिक भवनों में रूफटॉप सोलर सिस्टम, कृषि क्षेत्र में सौर जल पंप, सोलर स्ट्रीट लाइटिंग और बड़े सौर ऊर्जा संयंत्रों का उपयोग लगातार बढ़ रहा है। ऐसे में सौर प्रणालियों की स्थापना, संचालन और रखरखाव में दक्ष तकनीकी विशेषज्ञों की मांग भी महत्वपूर्ण हो गई है। स्टुडेंट्स को सौर ऊर्जा तकनीक के विभिन्न पहलुओं की जानकारी देते हुए कहा, ऑन ग्रिड सौलर सीधे हमारे एरिया के बिजली ग्रिड से जुड़ा होता है। हमारे उपयोग के अतिरिक्त बिजली सरकारी ग्रिड में सप्लाई हो जाती है। इस सिस्टम में बैटरी की जरूरत नहीं पड़ती है। यह ऑफ ग्रिड की तुलना में सस्ता होता है। हाइब्रिड सिस्टम दोनों का मिलाजुला रूप है। इसमें बैटरी और ग्रिड दोनों जुड़े होते हैं। उल्लेखनीय है, प्रशिक्षण के बाद सभी प्रतिभागियों की लिखित परीक्षा हुई, सफल प्रतिभागियों को एमएसएमई की ओर से सर्टिफिकेट्स भी दिए जाएंगे।

वरिष्ठ प्रशिक्षक श्री चौधरी ने बताया, सोलर सिस्टम में टॉपकान, मोनोक्रिस्टलाइन, पॉलीक्रिस्टलाइन, थिनफिल्म टाइप और बाईफेसियल सोलर पैनल प्रयोग किए जाते हैं। आमतौर पर टॉपकान और मोनोक्रिस्टलाइन की दक्षता अधिक होती है। सौर प्रणालियों की कार्यक्षमता बढ़ाने के लिए समय-समय पर सोलर पैनल की साफ-सफाई बेहद जरूरी है। धूल की परत जमने से इसकी क्षमता कम हो जाती है। सोलर पैनल की स्थापना के समय इस बात को ध्यान में रखना चाहिए कि सूर्य की किरणें ज्यादा समय तक सीधे पैनल पर ही पड़े, जिससे ज्यादा विद्युत का उत्पादन हो सके। प्रशिक्षण में ऊर्जा संरक्षण, पर्यावरणीय स्थिरता और पारंपरिक ऊर्जा स्रोतों पर निर्भरता कम करने में सौर ऊर्जा की भूमिका के बारे में भी विस्तार से चर्चा हुई। साथ ही स्टुडेंट्स को सौर प्रणालियों की कार्यक्षमता बढ़ाने, ऊर्जा उत्पादन को प्रभावित करने वाले कारकों और बैटरी के माध्यम से ऊर्जा भंडारण की उपयोगिता के बारे में जानकारी दी गई। समापन समारोह में सीओई के वाइस प्रिंसिपल प्रो. प्रभात कुमार की उल्लेखनीय मौजूदगी रही। कार्यक्रम में समन्वयक डॉ. शुभेंद्र प्रताप सिंह, डॉ. देबांजन रॉय, डॉ. राघवेंद्र तिवारी, श्री शशांक मिश्रा, श्री मयूर अग्रवाल के संग-संग कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग के छात्र-छात्राएं मौजूद रहे। संचालन श्री उमेश कुमार सिंह ने किया।