रावेल पुष्प
1.
दीप जले हर द्वार पर, कटे तमस का जाल।
मन के भीतर भी जले,हर बशर हो निहाल॥
2.
दीपावली का पर्व है, खुशियों का विस्तार।
दीन-दुखी के घर जलें, दीप-दीप अपार॥
3.
राम अयोध्या लौटकर, ले आए नव उल्लास।
हर मन में दीपक जले, हर मुख पर हो हास॥
4.
दीप कहे मत बाँट तू,मत कर तू तकरार।
एक ज्योति से जगमगे, सारा यह संसार॥
5.
बंदी छोड़ दिवस कहे, बंधन हों सब दूर।
न्याय, दया, स्वाधीनता, मानवता का नूर॥
6.
ग्वालियर से मुक्त हुए, बावन राजे साथ।
गुरु हरगोबिंद ने रचा,दिया हाथ को हाथ॥
7.
अपना हित ही धर्म नहीं, परहित सबसे श्रेष्ठ।
गुरु ने जग को दे दिया, त्याग-प्रेम का बेस्ट॥
8.
एक दिया आज़ाद हो, तो रौशन सौ द्वार।
दुख के बंधन टूटते,जगत करे सत्कार॥
9.
आया बंदी छोड़ दिवस,तो चलो अमृतसर
है जगमग स्वर्ण मंदिर,किरपा मिले भर-भर
10.
तेल जले तो दीप हो, बाती दे उजियार।
मन जले यदि प्रेम में, मिटे घृणा-अंधकार॥
11.
दीपावली और दिवस, दोनों दें संदेश।
प्रेम-प्रकाश से बने, सुंदर अपना देश॥
12.
जिसके घर में दीप हो, उसके मन में दान।
जिसके मन में प्रेम हो, उसका जग कल्याण।





