मुंबई (अनिल बेदाग): बेहतर सेहत और संतुलित जीवनशैली की चाहत के बीच भारतीय उपभोक्ताओं में पोषण को लेकर जागरूकता तो बढ़ रही है, लेकिन रोजमर्रा की थाली में इसका असर अब भी सीमित है। पेप्सिको इंडिया और यूरोमॉनिटर इंटरनेशनल के अध्ययन में सामने आया है कि शहरी भारत में प्रोटीन और फाइबर का पर्याप्त सेवन आज भी एक बड़ी चुनौती बना हुआ है।
दिल्ली, मुंबई, बेंगलुरु, कोलकाता और कोच्चि के 1,250 लोगों पर किए गए अध्ययन के अनुसार, 70 प्रतिशत लोग रोजाना 41 ग्राम से कम प्रोटीन का सेवन करते हैं, जबकि 61 प्रतिशत लोग जरूरी मात्रा से कम फाइबर लेते हैं। दिलचस्प बात यह है कि पोषण के प्रति जागरूकता के बावजूद सही जानकारी का अभाव भी इस समस्या को बढ़ा रहा है। अध्ययन में 60 प्रतिशत लोगों ने प्रोटीन के महंगे होने और 57 प्रतिशत ने सुविधाजनक विकल्पों की कमी को बड़ी बाधा बताया। पेप्सिको इंडिया की डॉ. अंकिता मारवाह ने कहा, “केवल जागरूकता पर्याप्त नहीं है। जरूरी है कि पोषण संबंधी विश्वसनीय जानकारी को रोजमर्रा के व्यावहारिक विकल्पों में बदला जाए।”
वहीं, यूरोमॉनिटर इंटरनेशनल के दिलीप राधाकृष्ण ने कहा, “पोषण पर बातचीत केवल जागरूकता बढ़ाने तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि लोगों को उनकी वास्तविक पोषण संबंधी जरूरतें भी समझानी चाहिए।” अध्ययन का संदेश स्पष्ट है—बेहतर पोषण के लिए सही जानकारी के साथ किफायती, भरोसेमंद और आसानी से उपलब्ध खाद्य विकल्प भी जरूरी हैं।




