उत्तराखण्ड में चाय उत्पादन एवं टी-टूरिज्म : रोजगार को मिलेगा बढ़ावा

Tea Production and Tea Tourism in Uttarakhand: A Boost to Employment

ओ पी उनियाल

प्रकृति ने समूची धरा पर अपना ऐसा रंग बिखेरा हुआ है जिसे देखे बगैर मन को सुकून नहीं मिलता। हर कोने पर प्रकृति का अलग-अलग रूप-रंग खिला हुआ मिलेगा। बस जरूरत है नजर दौड़ाने की। यदि आपको कुछ दिन शांत वादियों में प्रकृति के बीच ठहरने का अवसर मिले और नए-पुराने पर्यटनक, ऐतिहासिक एवं धार्मिक स्थल देखने की उत्कंठा हो तो शायद आप इस अवसर को हाथ से नहीं निकलने देंगे। आपके मन के भीतर प्रकृति की छटा को निहारने की ललक तब तक बार-बार उद्वेलित होती रहेगी जब तक उससे मिलन न हो। प्रकृति के बिखरे इस रूप ने ही पर्यटन उद्योग को जन्म दिया है।

हिमालय के आंचल में पसरा उत्तराखण्ड एक ऐसा राज्य है जहां पर हर प्रकार का पर्यटन है। प्राकृतिक, साहसिक, धार्मिक एवं आध्यात्मिक, ऐतिहासिक, सांस्कृतिक एवं विरासत, वन्यजीव, पारिस्थितिक एवं ग्रामीण पर्यटन, जो कि राज्य की अर्थव्यवस्था मजबूत करने के साथ-साथ युवाओं को रोजगार उपलब्ध करा रहा है। राज्य में एक ऐसा पर्यटन उद़्योग भी उभर रहा है जिसकी अपनी अलग ही पहचान होगी।
चाय शब्द तो सबने सुना ही होगा। एक छोटा सा शब्द, लेकिन हरेक की जुबान पर चढ़ा हुआ। चाय की चुस्कियों के आनंद का तो जवाब ही नहीं। घर-घर से लेकर रेहड़ी-खोखे, ढाबे और पांच तारा होटल तक अपना निरंतर सफर करती हुयी, हरेक के मन पर अपनी छाप छोड़ती आ रही है। चाय के शौकीनों के लिए तो यह पेय अमृत समान है। मौसम कोई-सा हो बस चाय का साथ नहीं छूटना चाहिए। कड़कड़ाती ठंड में तो हर कोई इसका दीवाना बन ही जाता है।

प्रदेश में चाय उत्पादन एवं ‘टी-टूरिज्म’ को बढ़ावा देने तथा उत्तराखंड की चाय को राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एक नई पहचान दिलाने के लिए सरकार हरसंभव प्रयास कर रही है।

वर्तमान में प्रदेश के 9 पर्वतीय जनपदों के करीब 1500 हेक्टेयर क्षेत्र में चाय बागान विकसित हैं, जिनसे प्रतिवर्ष 7 लाख किलोग्राम हरी चाय पत्तियों का उत्पादन किया जा रहा है। कौसानी, घोड़ाखाल और चंपावत की तरह अन्य राजकीय उद्यानों को भी पायलट प्रोजेक्ट के रूप में टी-टूरिज्म से जोड़ने तथा चाय की गुणवत्ता, ब्रांडिंग व बेहतर मार्केटिंग पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। पहाड़ों में चाय उत्पादन को बेहतर करने के साथ-साथ सरकार टी-टूरिज्म को बढ़ावा देने के लिए संकल्पबद्ध है, जिससे न केवल रोजगार के अवसर बढ़ेंगे बल्कि पहाड़ों की अर्थव्यवस्था भी मजबूत होगी।