प्रो. श्याम सुंदर भाटिया
अल्ट्रा वॉरियर की ओर से आयोजित प्रतिष्ठित नैनीताल ट्रेल अल्ट्रा मैराथन में मुरादाबाद के प्रसिद्ध लंबी दूरी के धावक ज़ैनुल आबिदीन उर्फ़ मुरादाबाद एक्सप्रेस का शारीरिक क्षमता और मानसिक दृढ़ता का शानदार प्रदर्शन
अल्ट्रा वॉरियर की ओर से आयोजित प्रतिष्ठित नैनीताल ट्रेल अल्ट्रा मैराथन में मुरादाबाद के प्रसिद्ध लंबी दूरी के धावक ज़ैनुल आबिदीन उर्फ़ मुरादाबाद एक्सप्रेस ने अपनी शारीरिक क्षमता और मानसिक दृढ़ता का शानदार प्रदर्शन किया है। उन्होंने कैंची धाम के अत्याधिक चुनौतीपूर्ण पहाड़ी मार्ग पर आयोजित 30 किलोमीटर की कठिन अल्ट्रा दौड़ को महज 5 घंटे 09 मिनट में सफलतापूर्वक पूरा किया है। इस दौड़ के लिए निर्धारित 6 घंटे 30 मिनट की कट-ऑफ समय-सीमा से ज़ैनुल ने 1 घंटा 21 मिनट पहले ही लक्ष्य हासिल कर लिया। कैंची धाम का यह पहाड़ी मार्ग खड़ी चढ़ाई, ढलान, ऊबड़-खाबड़ रास्तों और विषम परिस्थितियों के लिए जाना जाता है, जिसने धावकों के धैर्य और क्षमता की कड़ी परीक्षा ली। इन कठिन चुनौतियों के बावजूद ज़ैनुल आबिदीन ने अद्भुत आत्मविश्वास और निरंतर गति बनाए रखते हुए दौड़ पूरी की।
इस उपलब्धि पर ज़ैनुल आबिदीन ने कहा, पहाड़ी मार्गों पर लंबी दूरी की दौड़ केवल गति की परीक्षा नहीं होती, बल्कि यह मानसिक मजबूती, धैर्य और प्रकृति के साथ तालमेल बिठाने की कला है। कैंची धाम के खूबसूरत और चुनौतीपूर्ण मार्ग पर 30 किलोमीटर की दूरी तय करना मेरे लिए बेहद यादगार अनुभव रहा। उन्होंने कहा, इस तरह की मैराथन का मुख्य उद्देश्य युवाओं और आम जनमानस को नियमित व्यायाम, दौड़ और स्वस्थ जीवनशैली अपनाने के लिए प्रेरित करना है। उल्लेखनीय है, ज़ैनुल आबिदीन लंबे समय से देश के विभिन्न हिस्सों में आयोजित मैराथन के जरिए युवाओं को स्वास्थ्य और फिटनेस के प्रति जागरूक कर रहे हैं।
गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड झोली में
25 दिसंबर 2021 को जैनुल ने मुरादाबाद में जनता के सामने मैनुअल ट्रेडमिल पर लगातार 12 घंटे तक दौड़ लगाकर 66 किलोमीटर की दूरी तय की। ऐसा करके उन्होंने एक अमेरिकी धावक के 65 किलोमीटर के पिछले रिकॉर्ड को तोड़कर गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में अपना नाम दर्ज कराया।
दो बार इंडिया बुक ऑफ रिकॉर्ड्स
लंबी दूरी के धावक ज़ैनुल आबिदीन असाधारण सहनशक्ति के कारण दो बार इंडिया बुक ऑफ रिकॉर्ड्स में भी अपना नाम दर्ज करा चुके हैं।
सामाजिक सरोकार की खातिर दौड़
मुरादाबाद एक्सप्रेस सिर्फ मेडल जीतने के लिए नहीं, बल्कि विभिन्न सामाजिक मुद्दों, सेना के सम्मान और पर्यावरण के प्रति जागरूकता फैलाने के लिए दौड़ते हैं।
स्वर्णिम त्रिकोण दौड़
ज़ैनुल आबिदीन ने दिल्ली से आगरा, आगरा से जयपुर और वापस जयपुर से दिल्ली तक की दौड़ एसिड अटैक पीड़ित महिलाओं की मदद और जागरूकता के लिए लगाई।
नमामि गंगे और रामगंगा स्वच्छता
आजादी की 75वीं वर्षगांठ पर उन्होंने प्रयागराज से मुरादाबाद तक हाथ में तिरंगा लेकर 555 किलोमीटर की दौड़ लगाई, जिसका उद्देश्य रामगंगा और गंगा नदी की स्वच्छता के प्रति लोगों को जागरूक करना रहा।
अल्ट्रा मैराथन में जीत
ज़ैनुल ने जिम कॉर्बेट अल्ट्रा रन- 33 किमी जैसी कई प्रसिद्ध प्रतियोगिताओं में प्रथम स्थान हासिल कर अपने मुरादाबाद शहर का नाम रोशन कर चके हैं।
मोटापे से फिटनेस तक
शायद आपको यकीन न आए, लेकिन हकीकत यही है, ज़ैनुल आबिदीन ने शुरुआत में केवल अपने बढ़ते वजन और मोटापे को कम करने के लिए दौड़ना शुरू किया था। धीरे-धीरे यह शौक उनके जीवन का सबसे बड़ा जुनून बन गया और वह एक प्रोफेशनल लॉन्ग-डिस्टेंस एथलीट बन गए।





