अंतर्राष्ट्रीय इस्सयोग समाज का भव्य गुरु पूर्णिमा महोत्सव सम्पन्न,हजारों साधकों ने अर्पित की श्रद्धा,सौ से अधिक जिज्ञासुओं को मिली शक्तिपात- दीक्षा
विनोद सिंह तकियावाला
जयपुर : गुरु केवल ज्ञान देने वाला व्यक्ति नहीं, बल्कि चेतना को जागृत करने वाला दिव्य माध्यम है।जब गुरु और शिष्य के बीच आत्मिक निकटता स्थापित हो जाती है,तब शब्द गौण हो जाते हैं और अंतर्मन स्वयं संवाद करने लगता है।गुरु की कृपा से शिष्य के भीतर सुप्त आध्यात्मिक शक्तियाँ जागृत होती हैं और उसका जीवन नई दिशा प्राप्त करता है।इन्हीं आध्यात्मिक भावों के बीच जगतपुरा स्थित वृंदावन पैलेस में अंतर्राष्ट्रीय इस्सयोग समाज के तत्वावधान में गुरु पूर्णिमा महोत्सव अत्यंत श्रद्धा,भक्ति और आध्यात्मिक उल्लास के साथ सम्पन्न हुआ।देश-विदेश से आए हजारों इस्सयोगी साधक-साधिकाओं ने सद्गुरुमाता माँ विजया के श्रीचरणों में श्रद्धा-सुमन अर्पित कर आशीर्वाद प्राप्त किया। इस अवशर पर संस्था की अध्यक्ष एवं ब्रह्मनिष्ठ सद्गुरुमाता माँ विजया ने कहा कि गुरु और शिष्य के बीच जब वास्तविक निकटता स्थापित हो जाती है,तब संवाद के लिए शब्दों की आवश्यकता नहीं रहती।चेतना स्वयं जागृत होकर सूक्ष्म स्तर पर संवाद स्थापित करती है।एक समर्थ गुरु अपने शिष्य के मन को पढ़ लेता है और उसके विचार दिव्य लय में प्रवाहित होने लगते हैं।उन्होंने कहा कि गुरु के निकट बैठना भी साधना का महत्वपूर्ण अंग है।आध्यात्मिक शक्तियाँ दिखाई नहीं देतीं,किंतु उनका प्रभाव अत्यंत व्यापक और गहरा होता है।प्रत्येक साधक को प्रतिदिन प्रातःकाल कम-से-कम एक घंटे की आंतरिक साधना अवश्य करनी चाहिए।नियमित साधना से मन शांत और स्थिर होता है।मन की चंचलता समाप्त होते ही आत्मिक शक्तियाँ जागृत होने लगती हैं और जीवन सकारात्मक परिवर्तन की ओर अग्रसर हो जाता है।संस्था के संयुक्त सचिव डॉ. अनिल सुलभ ने बताया कि महोत्सव का शुभारम्भ दिव्य ओंकार,अखण्ड भजन-कीर्तन और गुरु वंदना के साथ हुआ। संस्था के सचिव कुमार सहाय वर्मा एवं संयुक्त सचिव (मुख्यालय) ई. उमेश कुमार ने समस्त इस्सयोगियों की ओर से प्रतिनिधि यजमान के रूप में गुरु-पूजन किया,जबकि दिल्ली से पधारे वरिष्ठ इस्सयोगी आचार्य दीनानाथ शास्त्री ने वैदिक विधि-विधान से पूजन सम्पन्न कराया।सद्गुरुमाता के आगमन पर पूरा सभागार भक्तिमय वातावरण से गूंज उठा।नृत्य, मंगलगीत और पुष्पवर्षा के बीच उनका भव्य स्वागत किया गया। स्थानीय संयोजकों डॉ. प्रशांत एन. सुरभझाला,विनोद राय,मृदुला राय एवं मीनल अग्रवाल ने स्वागत उद्बोधन प्रस्तुत किया कनाडा,अमेरिका, ओमान,रूस तथा भारत के विभिन्न राज्यों से आए साधकों ने अपने आध्यात्मिक अनुभव साझा करते हुए बताया कि इस्सयोग ने उनके जीवन में आत्मविश्वास, शांति और आध्यात्मिक जागरण का नया प्रकाश भर दिया है।संध्याकाल आयोजित विशेष सत्र में सद्गुरुमाता माँ विजया ने सौ से अधिक नव-जिज्ञासु महिला एवं पुरुष साधकों को इस्सयोग की सूक्ष्म साधना के लिए ‘शक्तिपात-दीक्षा’ प्रदान की। दीक्षा के उपरांत साधकों ने इसे अपने आध्यात्मिक जीवन का नया आरम्भ बताया।आज के इस महोत्सव में विश्व शांति और मानव कल्याण के उद्देश्य से आधे घंटे की सूक्ष्म ब्रह्माण्ड-साधना तथा सर्वधर्म प्रार्थना का आयोजन भी किया गया।इस्सयोगी कलाकारों द्वारा प्रस्तुत सांस्कृतिक कार्यक्रमों ने पूरे वातावरण को आध्यात्मिक ऊर्जा से भर दिया।रात्रि में महाप्रसाद वितरण के साथ यह दिव्य आयोजन सम्पन्न हुआ।समारोह में संस्था की संयुक्त सचिव संगीता झा,छोटे भैया संदीप कुमार गुप्ता,बिहार की पूर्व सांसद रमा देवी महोत्सव में संस्था की संयुक्त सचिव संगीता झा, छोटे भैया संदीप कुमार गुप्ता, बिहार की पूर्व सांसद रमा देवी, लक्ष्मी प्रसाद साहू, नीना दूबे गुप्ता, शिवम् झा, सरोज गुटगुटिया, प्रणव गुप्ता, अनंत कुमर साहू, वंदना वर्मा, श्रीप्रकाश सिंह, डा जेठानंद सोलंकी, डा द्राशनिका पटेल, सिमी रवि समुंदर, उर्वशी समुंदर, कपिलेश्वर मण्डल, सुशील प्रजापति,डा मनोज राज, सविता अनिल,किरण प्रसाद, वीरेंद्र राय,अमित लालू, पीयूष कुमार,विद्योतमा, डा अजीत ममता जमुआर, डा कौशलेंद्र सहित देश-विदेश से आए अनेक पदाधिकारी,स्वयंसेवक और हजारों श्रद्धालुओं की गरिमामयी उपस्थिति रही।





