रविवार दिल्ली नेटवर्क
यूपी राइज- 2026 इवेंट के दो अवार्ड तीर्थंकर महावीर यूनिवर्सिटी के डेंटल कॉलेज एंड रिसर्च सेंटर की झोली में, डेंटल कॉलेज की वाइस प्रिंसिपल प्रो. अंकिता जैन की टीम- ओरल केयर इन्नोवेटर्स अव्वल, टीम का डिजाइन 25 हजार रुपये की सम्मान राशि और ट्रॉफी से सम्मानित, डेंटल कॉलेज की ही सॉकेट सर्वर टीम रही फर्स्ट रनर अप, दोनों टीमों ने जीवीसी श्री मनीष जैन से भी की शिष्टाचार मुलाकात
तीर्थंकर महावीर यूनिवर्सिटी, मुरादाबाद के डेंटल कॉलेज एंड रिसर्च सेंटर ने इन्नोवेशन की दिशा में एक बड़ी उपलब्धि हासिल की है। डेंटल कॉलेज की वाइस प्रिंसिपल प्रो.अंकिता जैन ने ऑटो टंग क्लीनर- वाटर पॉवर्ड टंग क्लीनिंग डिवाइस का डिजाइन तैयार किया है। यह वाटर पॉवर्ड टंग क्लीनिंग डिवाइस पानी के नियंत्रित दबाव के सिद्धांत पर काम करेगा। आमतौर पर पारंपरिक टंग क्लीनर का उपयोग करते समय जीभ छिलने या कटने का खतरा बना रहता है। यह नया उपकरण बिना किसी नुकसान के जीभ की सतह पर जमा बैक्टीरिया, प्लाक और सफेद परत को आसानी से साफ कर देगा। इस डिवाइस डिजाइन की ईजाद में प्रो. अंकिता जैन के संग एमडीएस की छात्रा डॉ. तुलिका सक्सेना भी भूमिका रही है। उल्लेखनीय है, यूपी राइज- 2026 इवेंट में यह डिजाइन 25 हजार रुपये की सम्मान राशि और ट्रॉफी से सम्मानित हो चुका है। जजों के पैनल ने इस ऑटो टंग क्लीनर की उपयोगिता, कम लागत और व्यावसायिक संभावनाओं को देखते हुए इसकी टीम ओरल केयर इन्नोवेटर्स को अव्वल घोषित किया। डेंटल कॉलेज की ही टीम- सॉकेट सर्वर फर्स्ट रनर अप रही है। वाइस प्रिंसिपल प्रो. अंकिता जैन समेत दोनों टीम मेंबर्स ने जीवीसी श्री मनीष जैन से उनके कार्यालय में शिष्टाचार भेंट की। साथ ही प्रो. अंकिता जैन ने अपने कॉलेज की इन उपलब्धियों का उल्लेख किया। इस मौके पर वीसी प्रो. वीके जैन की भी गरिमामयी मौजूदगी रही।
प्रो. अंकिता जैन का कहना है, यह डिवाइस मुंह की दुर्गंध और फंगल संक्रमण सरीखी समस्याओं को दूर करने में बेहद कारगर सिद्ध होगी। प्रो. अंकिता बताती है, करीब एक साल पहले यह आइडिया मरीजों से बात करते-करते मिला। उदाहरण के तौर पर पेशेंट के मुंह से दुर्गंध आना, जुबान का गंदा रहना और खाने का स्वाद महसूस न करने के कारणों के बारे में पूछा तो पता चला, पारंपारिक टंग क्लीनर की वजह से जीभ छिल जाती है। कभी-कभी ब्लड़ भी रिसने लगता है। उल्टी भी आ जाती है। पेशेंट को इन सभी दुश्वारियों से मुक्ति मिल जाए, इसके लिए पॉवर्ड टूथ ब्रुश की तरह वाटर पॉवर्ड टंग क्लीनर तैयार किया जाए। प्रो. जैन ने प्राकृतिक उपचार, आधुनिक मेडिकल डिवाइसेज और ओरल केयर पर 72 से अधिक अंतर्राष्ट्रीय शोध पत्र प्रकाशित करने के संग-सग 3 प्रमुख पेटेंट अपने नाम किए हैं। आईसीएमआर, नई दिल्ली से मान्यता प्राप्त शोध परियोजनाओं और 1,390 से अधिक अंतर्राष्ट्रीय साइटेशन भी उनकी झोली में हैं। दूसरी ओर फर्स्ट रनर अप- सॉकेट सर्वर टीम ने ऐसा शोध पत्र प्रस्तुत किया, जिसमें मरीजों को दांत निकालते समय दर्द और इंजरी से निजात दिलाई जा सके। इस टीम में बीडीएस फाइनल ईयर के स्टुडेंट्स- समर्पिता गाबा और आशिका जैन शामिल हैं।





