डॉ. इशरत फातिमा ने पेरिस अंतरराष्ट्रीय मंच पर डिजिटल तकनीक और मानसिक स्वास्थ्य पर शोध प्रस्तुत किया

Dr. Ishrat Fatima presented research on digital technology and mental health at Paris International Forum

रविवार दिल्ली नेटवर्क

आईआईएमटी विश्वविद्यालय की शोधकर्ता ने फ्रांस में आयोजित HERF 2026 में प्रयागराज और गाजियाबाद के प्रवासी रेहड़ी-पटरी विक्रेताओं पर डिजिटल बदलाव से जुड़े तनाव का अध्ययन प्रस्तुत किया।

नई दिल्ली: आईआईएमटी विश्वविद्यालय के ग्रेटर नोएडा परिसर से जुड़ी डॉ. इशरत फातिमा ने डिजिटल तकनीक के प्रवासी रेहड़ी-पटरी विक्रेताओं के मानसिक स्वास्थ्य पर प्रभाव से संबंधित अपना शोध प्रस्तुत किया। यह प्रस्तुति 1 से 3 अक्टूबर 2026 तक फ्रांस स्थित पेरिस स्कूल ऑफ बिजनेस में आयोजित हेल्थ इन एंटरप्रेन्योरशिप रिसर्च फोरम (HERF 2026) में दी गई।

उनका शोध इस बात की पड़ताल करता है कि डिजिटल भुगतान प्रणालियों, तकनीक-आधारित कारोबारी प्रक्रियाओं और बदलते ग्राहक व्यवहार को अपनाने के दौरान रेहड़ी-पटरी विक्रेताओं पर किस तरह का मनोवैज्ञानिक दबाव पड़ सकता है। उत्तर प्रदेश के प्रयागराज और गाजियाबाद के विक्रेताओं पर केंद्रित यह अध्ययन डिजिटल अर्थव्यवस्था के तेजी से विस्तार के साथ उभरने वाली मानवीय और सामाजिक चुनौतियों को सामने लाता है।

अंतरराष्ट्रीय मंच पर डॉ. फातिमा की भागीदारी को पेरिस स्कूल ऑफ बिजनेस द्वारा जारी प्रमाणपत्र के माध्यम से मान्यता दी गई। उनकी प्रस्तुति ने स्वास्थ्य, उद्यमिता और डिजिटल बदलाव के बीच संबंधों पर चल रही व्यापक अकादमिक चर्चा में योगदान दिया।

रेहड़ी-पटरी विक्रेताओं में डिजिटल बदलाव से जुड़े तनाव पर शोध

डॉ. फातिमा के शोध का शीर्षक “Algorithmic Anxiety on the Roadside: Digitalization Stress and Mental Health Among Migrant Street Vendors in Prayagraj and Ghaziabad” है। इसमें अनौपचारिक आर्थिक गतिविधियों से जुड़े लोगों की डिजिटल तकनीक पर बढ़ती निर्भरता और उनके मानसिक स्वास्थ्य के बीच संबंधों का अध्ययन किया गया है।

रेहड़ी-पटरी विक्रेता अक्सर सीमित वित्तीय संसाधनों के साथ काम करते हैं और दैनिक आय, ग्राहकों की मांग तथा कारोबार की निरंतरता से जुड़ी अनिश्चितताओं का सामना करते हैं। जैसे-जैसे डिजिटल प्रणालियां व्यावसायिक गतिविधियों का हिस्सा बन रही हैं, नई तकनीकों को अपनाना कुछ कामगारों के लिए अतिरिक्त चुनौतियां पैदा कर सकता है।

शोध में डिजिटल बदलाव से मिलने वाले आर्थिक और परिचालन लाभों के साथ-साथ इन अनुभवों को समझने की आवश्यकता पर जोर दिया गया है। यह अध्ययन इस बात पर ध्यान आकर्षित करता है कि तकनीक-आधारित बदलाव छोटे और अनौपचारिक कारोबार पर निर्भर लोगों के जीवन को किस तरह प्रभावित करते हैं।

अध्ययन के केंद्र में प्रयागराज और गाजियाबाद

यह अध्ययन उत्तर प्रदेश के प्रयागराज और गाजियाबाद के प्रवासी रेहड़ी-पटरी विक्रेताओं पर केंद्रित है। इन दोनों शहरों में रेहड़ी-पटरी कारोबार स्थानीय आर्थिक गतिविधियों का महत्वपूर्ण हिस्सा है।

अनौपचारिक क्षेत्र में काम करने वाले विक्रेताओं के लिए भुगतान के तरीकों, ग्राहकों से जुड़ने के माध्यमों और कारोबारी प्रक्रियाओं में बदलाव उनके रोजमर्रा के कामकाजी हालात को प्रभावित कर सकता है। डिजिटल बदलाव के मनोवैज्ञानिक पहलू को समझना तकनीकी परिवर्तन की अधिक व्यापक तस्वीर तैयार करने के लिए महत्वपूर्ण है।

इस संदर्भ में डिजिटल बदलाव से जुड़े तनाव और मानसिक स्वास्थ्य का अध्ययन करके डॉ. फातिमा के शोध ने तकनीकी अपनाने के उस पहलू को सामने रखा है, जिस पर अक्सर कम ध्यान दिया जाता है। यह विषय अकादमिक शोधकर्ताओं, नीति-निर्माताओं और अधिक समावेशी डिजिटल प्रणालियों के लिए काम करने वाले हितधारकों के लिए महत्वपूर्ण है।

HERF 2026 में स्वास्थ्य और उद्यमिता से जुड़े शोध पर चर्चा

पेरिस स्कूल ऑफ बिजनेस द्वारा आयोजित हेल्थ इन एंटरप्रेन्योरशिप रिसर्च फोरम 2026 ने स्वास्थ्य और उद्यमिता से संबंधित शोध के लिए अंतरराष्ट्रीय अकादमिक मंच उपलब्ध कराया।

डॉ. फातिमा की प्रस्तुति ने इन विषयों को अनौपचारिक अर्थव्यवस्था से जुड़े कामगारों के अनुभवों से जोड़ा। उनके शोध में तकनीकी प्रगति और आर्थिक विकास पर चर्चा के साथ मानसिक स्वास्थ्य तथा कामकाजी परिस्थितियों को ध्यान में रखने की आवश्यकता रेखांकित की गई है।

डिजिटल उपकरणों के बढ़ते उपयोग ने कारोबार और उद्यमियों के लिए नए अवसर पैदा किए हैं। हालांकि, विभिन्न समूहों के सामने आने वाली चुनौतियों को समझना यह सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक है कि डिजिटल बदलाव का लाभ समाज के व्यापक वर्ग तक पहुंच सके।

अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारतीय शोध को पहचान

HERF 2026 में डॉ. फातिमा की भागीदारी ने भारतीय शहरी समुदायों पर केंद्रित शोध को अंतरराष्ट्रीय अकादमिक मंच तक पहुंचाया। आईआईएमटी विश्वविद्यालय के ग्रेटर नोएडा परिसर का प्रतिनिधित्व करते हुए उन्होंने तकनीक, आजीविका और मानसिक स्वास्थ्य के बीच संबंधों पर आधारित अध्ययन प्रस्तुत किया।

उनकी भागीदारी डिजिटल बदलाव के सामाजिक प्रभावों पर केंद्रित शोध की प्रासंगिकता को भी रेखांकित करती है, विशेष रूप से उन कामगारों के संदर्भ में जिनके अनुभवों को तकनीकी प्रगति पर होने वाली मुख्यधारा की चर्चाओं में अपेक्षाकृत कम स्थान मिलता है।

पेरिस स्कूल ऑफ बिजनेस द्वारा जारी प्रमाणपत्र ने फोरम में उनकी भागीदारी को औपचारिक मान्यता दी। उनका शोध विषय डिजिटल तकनीक, प्रवासी रेहड़ी-पटरी विक्रेताओं के कामकाजी जीवन और अनौपचारिक अर्थव्यवस्था में मानसिक स्वास्थ्य पर आगे अकादमिक चर्चा की संभावनाएं प्रस्तुत करता है।

यह अध्ययन डिजिटल बदलाव को केवल दक्षता और आर्थिक अवसरों के दृष्टिकोण से देखने के बजाय, उन लोगों पर इसके संभावित प्रभावों को समझने की आवश्यकता पर जोर देता है जो इन परिवर्तनों के साथ स्वयं को ढाल रहे हैं।