नई फिल्म नीति के बाद उत्तराखण्ड देश के भीतर फिल्म शूटिंग के प्रमुख डेस्टिनेशन के तौर पर अपनी जगह बना रहा है

Following the new film policy, Uttarakhand is establishing itself as a major destination for film shooting within the country

ओ पी उनियाल

उत्तराखण्ड प्राकृतिक सुंदरता के लिए तो जाना ही जाता है साथ ही देवभूमि के रूप में भी। यहां की संस्कृति, बोली-भाषा, खान-पान, रहन-सहन व नए-नए स्थलों को फिल्मों के माध्यम से जितना अधिक प्रस्तुत किया जाएगा उतना ही ऐसी फिल्मों के प्रति उत्तराखंडियों का ही नहीं अपितु गैर-उत्तराखंडियों का भी रुझान बढ़ेगा। यहां फिल्मों की शूटिंग होने से पर्यटन को भी बढ़ावा मिलेगा और रोजगार बढ़ेगा। हालांकि, जिन-जिन भी फिल्मों की यहां शूटिंग हुई है उनकी भी पर्यटन को बढ़ाने में प्रभावी भूमिका रही है। किसी भी बोली-भाषा की फिल्म हो उसका महत्व उस क्षेत्र के लिए काफी होता है लेकिन सुंदर दृश्यों का फिल्मांकन उससे अधिक महत्व रखता है।

उत्तराखण्ड की प्राकृतिक खूबसूरती अब फिल्मों के पर्दे तक ही सीमित नहीं है, बल्कि नई फिल्म नीति के बाद उत्तराखण्ड देश के भीतर फिल्म शूटिंग के प्रमुख डेस्टिनेशन के तौर पर अपनी जगह बना रहा है। राज्य की फिल्म नीति और शूटिंग के लिए उपलब्ध सुविधाओं का असर निवेश के आंकड़ों में भी दिखाई दे रहा है। यही कारण है कि पांच साल से कम समय में उत्तराखण्ड में फिल्म शूटिंग के जरिए 1,759 करोड़ रुपये का कारोबार दर्ज किया जा चुका है।

मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी का कहना है कि उत्तराखण्ड की प्राकृतिक सुंदरता और भौगोलिक परिस्थितियां फिल्म शूटिंग के लिए उपयुक्त हैं। सरकार का प्रयास है कि राज्य में फिल्म निर्माण को बढ़ावा मिले और स्थानीय स्तर पर रोजगार एवं आर्थिक गतिविधियों का विस्तार हो। सरकार शूटिंग अनुमति प्रक्रिया को सरल बनाने के साथ ही फिल्म निर्माताओं को आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराने पर लगातार काम कर रही है।

उत्तराखण्ड में फिल्म शूटिंग को बढ़ावा देने के लिए लागू की गई नई फिल्म नीति-2024 ने राज्य को शूटिंग लोकेशन से आगे फिल्म निर्माण के समग्र केंद्र के रूप में विकसित करने का आधार तैयार किया है। नीति में फिल्म शूटिंग के लिए सिंगल विंडो व्यवस्था, विभिन्न प्रोत्साहन और अनुदान, फिल्म पुरस्कार, प्रशिक्षण एवं छात्रवृत्ति के साथ ही पोस्ट-प्रोडक्शन सुविधाओं का भी प्रावधान किया गया है। नई फिल्म नीति में निर्माताओं के लिए शूटिंग प्रक्रिया को आसान बनाने के साथ स्थानीय प्रतिभाओं को अवसर देने पर भी जोर है।
नीति के तहत पात्र फिल्मों को अनुदान भी दिया जा रहा है। वित्तीय वर्ष 2021-22 से 2025-26 तक 52 फिल्मों को अनुदान मिला है। इनमें हिंदी के साथ गढ़वाली, कुमाऊंनी, जौनसारी और उत्तराखण्ड की अन्य भाषाओं में बनी फिल्में शामिल हैं। अकेले 2025-26 में 25 फिल्मों को अनुदान दिया गया। वहीं 2019-20 से 2025-26 तक प्रदेश में 1,440 से अधिक फिल्मों की शूटिंग और एनओसी से जुड़ी गतिविधियां दर्ज की गई हैं।

फिल्म नीति के तहत पहली बार उत्तराखण्ड फिल्म पुरस्कार-2024 एवं 2025 का आयोजन भी किया जा रहा है। इसके जरिए प्रदेश में निर्मित या फिल्मांकित फिल्मों के साथ स्थानीय बोलियों और भारतीय भाषाओं की फिल्मों, कलाकारों, तकनीशियनों और अन्य रचनात्मक प्रतिभाओं को सम्मानित किया जाएगा। राष्ट्रीय स्तर पर भी उत्तराखण्ड को फिल्म-अनुकूल राज्य के रूप में पहचान मिल चुकी है।