नए पुलिस आयुक्त अनुराग कुमार ने आला अधिकारियों के तबादलों में बनाया रिकॉर्ड

New Police Commissioner Anurag Kumar sets a record for the transfer of senior officers

प्रमोद कुमार शर्मा

दिल्ली में नए पुलिस आयुक्त अनुराग कुमार अपनी टीम तैयार करने में जुट गए हैं। यह टीम आने वाले महीने में दिल्ली की कानून व्यवस्था संभालने के साथ- साथ अनुराग कुमार के आयुक्त बनने को भी सार्थक साबित करने में सहायक होगा। अनुराग कुमार ने मातहत अधिकारियों का स्थानांतरण कर रिकार्ड बना लिया है। पदभार संभालने के दो हफ्ते के भीतर ही उन्होंने सबसे पहले 40 थाना प्रभारियों (एसएचओ) और अन्य अधिकारियो का तबादला कर यह संदेश दे दिया कि यह फेरबदल महकमे के सभी बड़े अधिकारी तक जाएगा। इसका परिणाम भी तुरंत दिख गया और फिर पूर्व आयुक्त सतीश गोलचा के समय मौज कर रहे जिला पुलिस उपायुक्त, अतिरिक्त आयुक्त, संयुक्त आयुक्त के बाद विशेष आयुक्त तक के पंख इस कदर काटे गए जिससे उन्हें यह समझ में आ गया कि आयुक्त अनुराग कुमार को यूं ही नहीं केंद्र सरकार ने पूर्व इंटेलिजेंस ब्यूरो (आईबी) के स्पेशल डायरेक्टर से दिल्ली पुलिस का नया आयुक्त (कमिश्नर) नियुक्त कर सबको चौंकाया है।

हालांकि कुमार के इस धड़ाधड़ फेरबदल को पुलिस के पूर्व आला अधिकारी अचंभित करने वाला या संयोग नहीं मान रहे। उनका कहना है कि स्वाभाविक तौर पर पुलिसिया कार्यप्रणाली को बेहतर बनाने और खुद के दिशा निर्देश का पालन अधिकारी मुस्तैदी से करे इसके लिए नए आयुक्त को अपनी टीम बनाना ही चाहिए।

दरअसल केंद्र सरकार के गृह मंत्रालय ने 17 जुलाई को जैसे ही दिल्ली पुलिस के तत्कालीन आयुक्त सतीश गोलचा को रिटायरमेंट से कुछ समय पहले ही पद से हटाकर 1994 बैच के आईपीएस अनुराग कुमार को दिल्ली का नया पुलिस आयुक्त नियुक्त किया, पूरे महकमे में यह चर्चा शुरू हो गई कि इसका कोई खास मतलब है। अनुराग कुमार आईबी में विशेष निदेशक थे और उन्होंने 17 जुलाई, शुक्रवार को ही आनन फानन में कार्यभार संभाला भी लिया। गृह मंत्रालय के सूत्रों ने तो यहां तक बताया कि सतीश गोलचा 17 जुलाई को शुक्रवार की सुबह एक कार्यक्रम में गए थे और लौटते समय उन्हें यह संदेश मिला कि उनकी कुर्सी अनुराग कुमार को दे दी गई और कुछ देर बाद ही उन्हें पद छोड़ना पड़ेगा। सतीश गोलचा का कार्यकाल 2027 में पूरा होने वाला था। पुलिस महकमें में यह चर्चा थी कि अब 2027 तक गोलचा आयुक्त रहेंगे। कहा तो यह भी जा रहा है कि जंतर मंतर पर काकरोज जनता पार्टी तो प्रदर्शन की अनुमति देकर गोलचा ने मुसीबत मोल ले ली। कहा जा रहा है कि गोलचा को यह अंदेशा नहीं था कि प्रदर्शन की अनुमित उन्हें इस कदर भारी पड़ेगी और आयुक्त की कुर्सी गंवानी पड़ेगी।

खैर..अनुराग कुमार ने पदभार ग्रहण करते ही धड़ाधड़ स्थानांतरण शुरू कर दिया। वे इंसपेक्टर (एसएचओ) तक ही नहीं रूके बल्कि अपनी नियुक्त के एक महीने ही हुए कि 18 अगस्त को आठ विशेष आयुक्त (स्पेशल कमिश्नर) को इधर से उधर कर दिया। इसमें गरिमा भटनागर से लेकर मनीष अग्रवाल, अजय चौधरी, डेविड ललसंघा, अतुल कटियार, के जगदीशन, विवेक किशोर और सिंधु पिल्लई शामिल है। इसके साथ ही उन्होंने संयुक्त आयुक्त (ज्वाईंट कमिश्नर) बीनू वंशल, सुमन गोयल, रजनीश गुप्ता, जतिन नारवाल, मिलिंद महादेव डुमरे, दीपक पुरोहित, नुपुर प्रसाद, अजय कृष्ण शर्मा के साथ अतरिक्त आयुक्त मोनिका भारद्वाज, ए काव, संजय भाटिया, दिनेश कुमार गुप्ता, वर्षा शर्मा, प्रतीक्षा गोदारा, जितेंद्र कुमार मीणा, निधि वालसन के साथ उपायुक्त (डीसीपी) ए के लाल, राजा बांठिया, हेमंत तिवारी, विनीत कुमार, मंजीत, निहारिका भट्ट, गीतांजलि खंडेलवाल, सत्यवान गौतम, सचिन सिंघल, तनुश्री, पुखराज कमल गुप्ता, लोकेशवरण, गौरव त्यागी, अंगद मेहता, उत्कर्ष, श्वेता चौहान, आर सुभाष, रजनीश के साथ मनोज मीणा शामिल है।

अनुराग कुमार ने एसीपी और इंसपेक्टर स्तर के ऐसे अधिकारी को भी वातानुकूलित कक्ष से बाहर जाकर काम करने की नसीहत देते हुए धड़ाधड़ स्थानांतरण किए है। जुलाई में पदग्रहण के बाद अगस्त में उन्होंने रिकार्ड ही तोड़ दिया। 18 एसीपी जिनमें सब डिविजन से लेकर अपराध, पुलिस मुख्यालय, दिल्ली पुलिस एकेडमी, स्पेशल ब्रांच, महिला अपराध शाखा, एयरपोर्ट शामिल है। सब डिविजन में तैनात पूर्वी से पश्चमी, उत्तरी से मध्य और द्वारका से पुलिस मुख्यालय में तैनात करने में उन्हें तनिक भी देर नहीं लगी। इसके साथ ही नंदनगरी, लाजपतनगर, कल्याणपुरी, न्यू फ्रेंडस कालोनी, बवाना, चितरंजन पार्क, पीजी सेल, यातायात, पीसीआर, विवेक विहार और पालम व हौजखास के एसीपी को भी इधर से उधर भेजकर यह साफ संदेश दिया है कि बैठे बैठाए पुलिसिया रौब अब सड़क पर भी कानून का पालन नहीं करने वालों पर दिखानी पड़ेगी। यही नहीं पूर्व पुलिस आयुक्त सतीश गोलछा के कार्यकाल में (इस साल जनवरी या उसके बाद) नियुक्त किए गए कई एसएचओ को चंद महीनों में ही हटा दिया गया है। आमतौर पर पहले एसएचओ के बेहतर कामकाज का ट्रैक रिकार्ड देखकर दो साल का कार्यकाल पूरा होने पर ही उनका तबादला किया जाता था। इस अचानक हुए फेरबदल का कोई आधिकारिक कारण स्पष्ट नहीं किया गया है, जिससे महकमे में तरह-तरह के कयास लगाए जा रहे हैं। हाल ही में कुछ महत्वपूर्ण और बड़े थानों महरौली, फतेहपुर बेरी, मयूर विहार, गोविंदपुरी व सीआरपार्क में तैनात पांच एसएचओ को सिक्योरिटी (सुरक्षा) और पीसीआर जैसी नान-फील्ड यूनिट्स में भेज दिया गया है। तबादले के इस आदेश को लेकर पुलिस मुख्यालय में अधिकारियों के बीच मिली-जुली प्रतिक्रियाएं देखने को मिलीं। कुछ अधिकारियों का मानना है कि यह नए आयुक्त की ओर से व्यवस्था में सुधार के लिए एक ‘नई शुरुआत’ है। वहीं, कुछ अधिकारियों ने बार-बार होने वाले इस तरह के फेरबदल को थानों के कार्य-प्रबंधन के लिए अतिरिक्त नुकसान बताया। दिल्ली पुलिस में पिछले कुछ वर्षों से यह देखा जा रहा है कि नया नेतृत्व आने पर पूर्व अधिकारियों के फैसलों को बदला जाता रहा है। पूर्व कमिश्नर संजय अरोड़ा ने राकेश अस्थाना के कई फैसलों को पलट दिया था तभी से यह संदेश भी गया है।

बहरहाल, इस प्रकार महीने भर में ही सौ से ज्यादा इंसपेक्टरों के साथ दजनों एसीपी, डीसीपी और ज्वाईंट कमिश्नर के साथ स्पेशल कमिश्नर के आला तबोदले ने पुलिस मुख्यालय में ही यह चर्चा शुरू है कि कब कौन, कहां, किस जिले और यूनिट में चला जाएगा किसी को पता नहीं है। इसका परिणाम भी सड़क पर दिखने लगा है और जिला पुलिस उपायुक्त से लेकर विशेष आयुक्त अब सड़कों पर नजर आने लगे हैं। काकरोज जनता पार्टी के बाद जाति आधारित आरक्षण के विरोध में जंतर मंतर पर हुए प्रदर्शन स्थल पर आला अधिकारियों की मौजूदगी ने यह साबित कर दिया है।

कुंडली मारे अधिकारी पर गाज गिरना जरूरी
दिल्ली पुलिस महासंघ ने पुलिस आयुक्त अनुराग कुमार के फैसले का स्वागत किया है। महासंघ के अध्यक्ष एसीपी रहे वेदभूषण ने कहा कि दिल्ली पुलिस में सालों से एक ही कुर्सी पर कुडंली मारे पुलिस अधिकारियों का स्थानांतरण बिल्कुल सही है। उन्होंने कहा कि मौजूदा पुलिस आयुक्त दिल्ली पुलिस के आला अधिकारियों की कार्यशैली का भली भांति परिचित है। वे खुद दिल्ली पुलिस में रह चुके हैं लिहाजा उन्हें यह स्वतंत्रता है कि वे अपने हिसाब से प्रशासनिक फेरबदल कर सकते हैं। दिल्ली पुलिस का ट्रांसफर पोस्टिंग को कसने का मतलब है कि पुलिस महकमें को दुरूस्त करना। जिन अधिकारियों की शिकायत उपर मंत्रालय तक होगी उन्हें दूसरी जगह फेंकना वाजिब है। मेरा मानना है कि यह बिल्कुल समय समय पर होना चाहिए जैसा कि इस समय शुरू किया गया है।

वेदभूषण कहते हैं कि पुलिस आयुक्त को अपनी टीम तैयार करना पड़ता है। उन्हें अपनी कार्यप्रणाली के हिसाब से अधिकारियों को रखना पड़ता है। उनके दिशा निर्देश का पालन हो और सरकार से लेकर जनता में यह संदेश जाए कि पुलिस हमारे लिए ही है इसके लिए आयुक्त को कई बार कठोर फैसले लेने पड़ते हैं। मजबूत सुरक्षा व्यवस्था, नीतियों का पालन, रचनात्मक गतिविधियां यह पुलिसिया कार्यशैली का हिस्सा है। लिहाजा मौजूदा पुलिस आयुक्त अनुराग कुमार जिस तरह अधिकारियों पर नजर रख रहे हैं उससे यह मुश्किल नहीं दिखता कि दिल्ली में किसी भी प्रकार की सुरक्षा व्यवस्था में सुस्ती नहीं होगी। आयुक्त के इस ट्रांसपर पोस्टिंग से कनिष्ठ अधिकारियों में भी यह संदेश जाएगा कि जब आला अधिकारी रातो राज बदले जा सकते हैं तो फिर वे किसी खेत की मूली है।

कौन हैं दिल्ली के नए पुलिस कमिश्नर
1994 बैच के एजीएमयूटी कैडर के आईपीएस अधिकारी अनुराग कुमार की नियुक्ति से पहले कैबिनेट की नियुक्ति समिति (एसीसी) ने उन्हें इंटेलिजेंस ब्यूरो से उनके मूल एजीएमयूटी कैडर में वापस भेजने को मंजूरी दी थी। सरकार के आदेश में कहा गया है कि सक्षम प्राधिकारी की मंजूरी के बाद अनुराग कुमार को कार्यभार संभालने की तारीख से अगले आदेश तक दिल्ली पुलिस आयुक्त नियुक्त किया जाता है।
करीब 32 वर्षों के सेवा अनुभव वाले अनुराग कुमार पुलिसिंग, प्रशासन और खुफिया मामलों के विशेषज्ञ माने जाते हैं। इंटेलिजेंस ब्यूरो में अपने कार्यकाल के दौरान उन्होंने राष्ट्रीय सुरक्षा, आतंकवाद-रोधी रणनीति, खुफिया जानकारी जुटाने और विश्लेषण सहित कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां संभालीं। इंजीनियरिंग स्नातक अनुराग कुमार को उत्कृष्ट सेवाओं के लिए 2010 में पुलिस पदक (पुलिस मेडल फार मेरीटोरियस सर्विस) और 2016 में राष्ट्रपति पुलिस पदक (प्रेसीडेंटस पुलिस मेडल फार डिस्टिविंग्स सर्विस) से सम्मानित किया जा चुका है।

दिल्ली पुलिस आयुक्त के रूप में अनुराग कुमार राष्ट्रीय राजधानी में कानून-व्यवस्था और सुरक्षा व्यवस्था की जिम्मेदारी संभालने के साथ दिल्ली में संसद, राष्ट्रपति भवन, प्रधानमंत्री कार्यालय, सुप्रीम कोर्ट और कई देशों के दूतावास स्थित होने के कारण यहां की पुलिस व्यवस्था देश की सबसे महत्वपूर्ण सुरक्षा जिम्मेदारियों में मानी जाती है।