नागोया एशियाई खेलों में की शीर्ष चार खेल शक्तियों में भारत

India among the top four sporting powers at the Nagoya Asian Games

रत्नज्योति दत्ता

आइची-नागोया एशियाई खेलों में 21 स्वर्ण, 27 रजत और 37 कांस्य सहित कुल 85 पदक जीतकर भारत समग्र पदक तालिका में चौथे स्थान पर रहा। भारत ने हांगझोउ एशियाई खेलों में भी चौथा स्थान हासिल किया था।

भारत के शानदार प्रदर्शन के सम्मान में भारतीय ओलंपिक संघ (आईओए) ने खेलों के सर्वश्रेष्ठ पुरुष और महिला खिलाड़ी को सम्मानित करने के लिए दो नए पुरस्कार शुरू किए हैं।

इस संस्करण में भारत से आगे चीन, मेजबान जापान और दक्षिण कोरिया रहे। एशियाई खेलों की आधिकारिक थीम ‘इमैजिन वन एशिया’ थी।

आईओए अध्यक्ष पी.टी. उषा ने सर्वश्रेष्ठ पुरुष खिलाड़ी के लिए राजा रणधीर सिंह पुरस्कार और सर्वश्रेष्ठ महिला खिलाड़ी के लिए जसपाल राणा पुरस्कार शुरू किए हैं। इन पुरस्कारों का नाम भारतीय खेल जगत के दो दिग्गज खिलाड़ियों के नाम पर रखा गया है।

महज 17 वर्ष की तीरंदाज कुमकुम महोद को पहला जसपाल राणा पुरस्कार प्रदान किया गया। एशियाई खेलों में पदार्पण करते हुए उन्होंने तीन पदक जीते, जिनमें दो स्वर्ण शामिल हैं।

अंकिता भक्त और कीर्ति के साथ महोद ने महिलाओं की रिकर्व टीम स्पर्धा में स्वर्ण पदक जीता। इसके साथ ही 1998 के बैंकॉक एशियाई खेलों से लगातार सात बार इस स्पर्धा में चैंपियन रही दक्षिण कोरिया की बादशाहत समाप्त हो गई।

इसके बाद व्यक्तिगत रिकर्व स्पर्धा में भी स्वर्ण जीतकर महोद ने एशियाई खेलों की महिला रिकर्व स्पर्धाओं में दक्षिण कोरिया के लंबे समय से चले आ रहे वर्चस्व को समाप्त किया। साथ ही उन्होंने 2028 लॉस एंजिल्स ओलंपिक के लिए भारत का एक कोटा स्थान भी सुनिश्चित किया।

खेलों के समापन के बाद 4 अक्टूबर को जारी आईओए के बयान में उषा ने कहा, “कुमकुम का जसपाल राणा पुरस्कार की पहली प्राप्तकर्ता होना उचित है, क्योंकि जसपाल ने भी 1994 के एशियाई खेलों में एक प्रतिभाशाली खिलाड़ी के रूप में अपनी पहचान बनाई थी।”

उन्होंने कहा कि दबाव के बीच कुमकुम का संयम और विपरीत परिस्थितियों में अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने की क्षमता भारतीय तीरंदाजी के भविष्य के लिए बेहद उत्साहजनक है।

उषा ने कहा कि भारत के तीरंदाज एक दशक से अधिक समय से सफलता के दरवाजे पर दस्तक दे रहे थे। उन्होंने कुमकुम और उनकी रिकर्व टीम की साथियों के प्रदर्शन को भारतीय तीरंदाजी के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया।

खेलों के सर्वश्रेष्ठ पुरुष खिलाड़ी का राजा रणधीर सिंह पुरस्कार पहलवान सुजीत कलकल को दिया गया। उन्होंने पुरुषों के 65 किग्रा फ्रीस्टाइल वर्ग में स्वर्ण पदक जीता।

सेमीफाइनल में जापान के मौजूदा ओलंपिक चैंपियन कोटारो कियूका को हराने के बाद 23 वर्षीय कलकल ने फाइनल में ताजिकिस्तान के अब्दुलमाजिद कुदियायेव के खिलाफ शानदार वापसी की। एक समय 2-9 से पीछे चल रहे कलकल ने अंतिम क्षणों में जोरदार वापसी करते हुए 10-9 से जीत दर्ज की।

इसके साथ ही एशियाई खेलों में 65 किग्रा वर्ग में भारत की सफलता का सिलसिला भी जारी रहा। इससे पहले 2014 में योगेश्वर दत्त और 2018 में बजरंग पूनिया ने इस वर्ग में स्वर्ण पदक जीता था।

उषा ने कहा, “कुश्ती भारत का खेल है और सुजीत के इस प्रदर्शन को आने वाले कई वर्षों तक याद किया जाएगा।”

आईओए ने बताया कि आने वाले दिनों में एक समारोह में महोद और कलकल को औपचारिक रूप से सम्मानित किया जाएगा।

दोहा अगला पड़ाव

4 अक्टूबर को आइची-नागोया एशियाई खेलों का समापन हुआ। समारोह में एशियाई खेलों का ध्वज औपचारिक रूप से कतर को सौंपा गया। इसके साथ ही 2030 के दोहा एशियाई खेलों के लिए उलटी गिनती शुरू हो गई।

समापन समारोह नागोया सिटी मिजुहो पार्क एथलेटिक स्टेडियम में आयोजित किया गया। इसी स्टेडियम में 19 सितंबर को एशियाई खेलों का उद्घाटन समारोह भी हुआ था।