विनोद सिंह ‘तकियावाला’
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने आज अपने गृह राज्य गुजरात की धरती बड़ोदरा से देश के बुनियादी ढाँचे और रेल कनेक्टिविटी के विकास का एक नया अध्याय जोड़ा। बड़ोदरा में आयोजित कार्यक्रम में 35 हजार करोड़ रुपये से अधिक की विभिन्न विकास परियोजनाओं का लोकार्पण, उद्घाटन, राष्ट्र को समर्पण और शिलान्यास किया गया। इनमें रेल, माल ढुलाई, सड़क, कनेक्टिविटी और क्षेत्रीय विकास से जुड़ी अनेक महत्वपूर्ण परियोजनाएँ शामिल हैं।
बड़ोदरा की धरती से होने वाला यह कार्यक्रम इसलिए भी महत्वपूर्ण रहा क्योंकि इसकी सबसे बड़ी कड़ी देश के वेस्टर्न डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर से जुड़ी है। प्रधानमंत्री ने इसके तीन महत्वपूर्ण खंड राष्ट्र को समर्पित किए। कुल 326 रूट किलोमीटर लंबे इन खंडों को 20,700 करोड़ रुपये से अधिक की लागत से विकसित किया गया है। इनमें सानंद (उत्तर)-मकरपुरा, न्यू उमरगाँव-न्यू सफाले तथा न्यू सफाले-जेएनपीए खंड शामिल हैं। इन खंडों के राष्ट्र को समर्पित होने के साथ वेस्टर्न डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर का पूरा नेटवर्क परिचालन में आ गया है।
यह उपलब्धि केवल रेलवे की नई पटरियों के विस्तार की कहानी नहीं है। यह देश की अर्थव्यवस्था और लॉजिस्टिक्स व्यवस्था को नई गति देने वाली आधारभूत संरचना है। मालगाड़ियों के लिए अलग समर्पित कॉरिडोर उपलब्ध होने से माल परिवहन की गति बढ़ेगी, ट्रांजिट टाइम कम होगा और औद्योगिक क्षेत्रों तथा बंदरगाहों के बीच कनेक्टिविटी मजबूत होगी। जेएनपीए तक सीधी कनेक्टिविटी से आयात- निर्यात के माल की आवाजाही अधिक सुगम होने के साथ लॉजिस्टिक्स लागत को कम करने में भी मदद मिलेगी।
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने अपने संबोधन में डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर के पूर्ण होने को देश के लिए महत्वपूर्ण उपलब्धि बताते हुए इसे विकसित भारत की यात्रा से जोड़ा। उन्होंने आधुनिक बुनियादी ढाँचे को देश की आर्थिक प्रगति की आधारशिला बताते हुए इस बात पर जोर दिया कि भारत को विकसित राष्ट्र बनाने के लिए सड़क, रेल, बंदरगाह और अन्य आधारभूत सुविधाओं का तेज विस्तार आवश्यक है। उनके संबोधन में गुजरात के विकास को देश के विकास से जोड़ने और विकास की गति को और तेज करने का संदेश भी स्पष्ट दिखाई दिया।
भारत जैसे विशाल देश में आर्थिक विकास की गति केवल उत्पादन बढ़ाने से निर्धारित नहीं होती। उत्पादन को बाजार तक पहुँचाने की गति, कच्चे माल को उद्योग तक पहुँचाने की क्षमता और बंदरगाहों से देश के अलग-अलग हिस्सों तक माल पहुँचाने की दक्षता भी उतनी ही महत्वपूर्ण है। इसी दृष्टि से डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर भारत के बदलते लॉजिस्टिक्स तंत्र की रीढ़ बनने की क्षमता रखता है।
प्रधानमंत्री ने विभिन्न स्थानों से मालगाड़ी सेवाओं को भी हरी झंडी दिखाई। न्यू सानंद (उत्तर), न्यू मकरपुरा, न्यू उमरगाँव और न्यू जेएनपीए से मालगाड़ी सेवाओं की शुरुआत पश्चिमी भारत के औद्योगिक और व्यापारिक नेटवर्क को और मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। इससे उद्योगों को माल की तेज आवाजाही का विकल्प मिलेगा और बंदरगाहों से जुड़ी आपूर्ति श्रृंखला को भी मजबूती मिल सकती है।रेल विकास का दूसरा महत्वपूर्ण पक्ष यात्री सुविधाओं और क्षेत्रीय कनेक्टिविटी से जुड़ा है। प्रधानमंत्री ने बड़ोदरा और टांडा रोड के बीच नई ट्रेन सेवा को भी हरी झंडी दिखाई। इससे बड़ोदरा के साथ छोटा उदयपुर और अलीराजपुर जैसे क्षेत्रों के लोगों को बेहतर रेल संपर्क उपलब्ध होने की उम्मीद है। वहीं छोटा उदयपुर-धार रेल परियोजना के हिस्से के रूप में विकसित जोबट-टांडा रोड नई रेल लाइन को राष्ट्र को समर्पित किया गया।
यह रेल लाइन अलीराजपुर के दूरदराज और आदिवासी क्षेत्रों को राष्ट्रीय रेल नेटवर्क से जोड़ने की दृष्टि से विशेष महत्व रखती है। रेल संपर्क किसी क्षेत्र के लिए केवल आवागमन का साधन नहीं होता, बल्कि उसके साथ शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार, व्यापार और पर्यटन की संभावनाएँ भी आगे बढ़ती हैं। ऐसे क्षेत्रों को बेहतर रेल कनेक्टिविटी देना उन्हें आर्थिक मुख्यधारा से जोड़ने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।
बड़ोदरा से आज केवल तैयार परियोजनाओं का उद्घाटन नहीं हुआ, बल्कि भविष्य की रेल क्षमता बढ़ाने की नींव भी रखी गई। प्रधानमंत्री ने लगभग 329 किलोमीटर लंबी तीन रेल परियोजनाओं की आधारशिला रखी। इन पर 9,700 करोड़ रुपये से अधिक का निवेश प्रस्तावित है। इनमें वडोदरा-रतलाम तीसरी और चौथी रेल लाइन, मियागाम करजन-चोरंडा-मालसर गेज परिवर्तन तथा विश्वामित्री-दभोई डबलिंग परियोजना शामिल हैं।
वडोदरा-रतलाम के बीच तीसरी और चौथी रेल लाइन का विस्तार विशेष रूप से महत्वपूर्ण है। गुजरात और मध्य प्रदेश को जोड़ने वाला यह रेल मार्ग यात्री तथा माल परिवहन दोनों के लिए महत्वपूर्ण है। अतिरिक्त रेल लाइनें बनने से मार्ग की क्षमता बढ़ेगी, ट्रेनों के संचालन में सुविधा होगी और बढ़ते यातायात के दबाव को कम करने में मदद मिलेगी। विकास के साथ जब यात्री और माल परिवहन की आवश्यकता लगातार बढ़ रही हो, तब रेल नेटवर्क की क्षमता बढ़ाना समय की आवश्यकता बन जाता है।
सड़क परिवहन को भी कार्यक्रम में महत्वपूर्ण स्थान दिया गया। प्रधानमंत्री ने लगभग 1,780 करोड़ रुपये की लागत वाली तीन राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाओं की आधारशिला रखी। इनमें एनएच-48 के कामरेज-चलथान खंड का छह लेन में विस्तार, वडोदरा-सूरत खंड में तापी और नर्मदा पर प्रमुख पुलों सहित अतिरिक्त संरचनाओं का निर्माण तथा एनएच-53 पर अभवा, मिंधोला और खजोद जंक्शन पर ग्रेड-सेपरेटेड संरचनाओं का निर्माण शामिल है।
रेल और सड़क—दोनों क्षेत्रों में एक साथ हो रहा यह विस्तार बताता है कि आधुनिक भारत में कनेक्टिविटी को विकास की बुनियादी शर्त माना जा रहा है। किसी उद्योग को बाजार से जोड़ना हो, किसी बंदरगाह को औद्योगिक क्षेत्र से जोड़ना हो या किसी दूरदराज गाँव और आदिवासी क्षेत्र को राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था की मुख्यधारा से जोड़ना हो, मजबूत परिवहन नेटवर्क उसकी पहली आवश्यकता है।
गुजरात की धरती से इन परियोजनाओं का शुभारम्भ अपने आप में विशेष संदेश देता है। गुजरात लंबे समय से उद्योग, बंदरगाह, व्यापार और निवेश के महत्वपूर्ण केंद्र के रूप में अपनी पहचान बनाए हुए है। ऐसे में राज्य में रेल और सड़क कनेक्टिविटी को मजबूत करने का प्रभाव केवल गुजरात तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि पश्चिमी भारत के व्यापक औद्योगिक और व्यापारिक तंत्र पर पड़ेगा।
डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर के माध्यम से बंदरगाहों तक माल की तेज आवाजाही, औद्योगिक केंद्रों तक बेहतर कनेक्टिविटी और लॉजिस्टिक्स लागत में संभावित कमी भारतीय उद्योग को प्रतिस्पर्धात्मक बढ़त देने में सहायक हो सकती है। यही कारण है कि बड़ोदरा से शुरू होने वाली इन परियोजनाओं को केवल क्षेत्रीय विकास की दृष्टि से देखना पर्याप्त नहीं होगा। इसका संबंध देश की अर्थव्यवस्था, निर्यात क्षमता और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में भारत की भूमिका से भी जुड़ा है।
बड़ोदरा की धरती आज एक ऐसे विकास मॉडल की साक्षी बनी है, जिसमें रेलवे की नई पटरी केवल शहरों और राज्यों को नहीं जोड़ती, बल्कि उद्योग और बाजार को, बंदरगाह और उत्पादन केंद्र को तथा गाँव और महानगर को एक-दूसरे से जोड़ती है।
प्रधानमंत्री के संबोधन का व्यापक संदेश भी इसी दिशा में रहा कि विकसित भारत का संकल्प मजबूत बुनियादी ढाँचे के बिना पूरा नहीं हो सकता। नई रेल लाइनें, समर्पित माल ढुलाई गलियारे, आधुनिक राजमार्ग और बेहतर क्षेत्रीय कनेक्टिविटी मिलकर देश की आर्थिक क्षमता को बढ़ाने का आधार तैयार करते हैं।
आज बड़ोदरा से विकास की जो नई रेल चली है, उसकी मंजिल केवल गुजरात नहीं है। इसकी दिशा पूरे देश की आर्थिक रफ्तार, बेहतर कनेक्टिविटी और विकसित भारत के उस संकल्प की ओर है, जिसमें आधुनिक बुनियादी ढाँचा आने वाली पीढ़ियों की आकांक्षाओं को पूरा करने का आधार बनेगा। गुजरात की धरती से शुरू हुआ यह विकास का सफर देश की विकास यात्रा को नई गति देने की क्षमता रखता है।





