ब्रिक्स सम्मिट: भारत ने विश्व-शांतिदूत की भूमिका निभाई

BRICS Summit: India played the role of a global peacemaker

प्रो. नीलम महाजन सिंह

ब्रिक्स: 2026, नई दिल्ली के घोषणापत्र में मज़बूत बहुपक्षवाद, विकासशील देशों के लिए ज़्यादा प्रतिनिधित्व व गहरे आर्थिक सहयोग की बात कही गई है। “इस साल का ब्रिक्स शिखर सम्मेलन ऐतिहासिक है। यह ब्रिक्स की 20वीं वर्षगांठ है,” पीएम मोदी ने कहा। साथ ही, पश्चिम एशिया व दुनिया के अन्य तनावपूर्ण इलाकों में विवादों को सुलझाने के लिए कूटनीति पर ज़ोर दिया गया है। घोषणापत्र में सीमा-पार भुगतान, व्यापार, ऊर्जा सुरक्षा, टेक्नोलॉजी और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के क्षेत्र में मज़बूत सहयोग का भी समर्थन किया गया है। ब्रिक्स नेताओं ने एक ज़्यादा समावेशी व संतुलित वैश्विक व्यवस्था बनाने की अपनी कोशिशों को पुन: दोहराया है। समूह ने संयुक्त राष्ट्र (United Nations) में सुधारों का समर्थन किया, जिसमें सुरक्षा परिषद शामिल है व कहा कि अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं में विकासशील देशों की आवाज़ ज़्यादा मज़बूत होनी चाहिए। चीन व रूस ने यू.एन. और यू.एन. सुरक्षा परिषद में बड़ी भूमिका निभाने की ब्राज़ील व भारत की आकांक्षाओं के लिए अपना समर्थन जताया। वैश्विक विवादों पर, पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव पर गहरी चिंता जताई गई और ज़्यादा से ज़्यादा संयम बरतने, नागरिक बुनियादी ढांचे की सुरक्षा करने, तथा स्थायी शांति के लिए बातचीत और कूटनीति अपनाने का आह्वान किया गया। घोषणापत्र में वैश्विक व्यापार, सप्लाई चेन व ऊर्जा के प्रवाह को बनाए रखने की बात कही गई। “गाज़ा के मामले में, युद्धविराम का पालन करने, बिना किसी रुकावट के मानवीय सहायता पहुँचाने और लोगों को ज़बरदस्ती विस्थापित करने पर रोक लगाने का आग्रह किया गया”। साथ ही, ‘टू-स्टेट सॉल्यूशन’ (दो-देश समाधान) व फ़िलिस्तीन को यू.एन. की पूर्ण सदस्यता दिलाने के समर्थन को भी दोहराया गया। घोषणापत्र में आतंकवाद के सभी रूपों की कड़ी निंदा की गई है और खास तौर पर 22 अप्रैल, 2025 को ‘पहलगाम में हुए आतंकवादी हमले की निंदा की गई’, जिसमें 26 लोग मारे गए थे। ब्रिक्स ने सीमा-पार आतंकवाद, टेरर फाइनेंसिंग व आतंकवादियों के सुरक्षित ठिकानों के खिलाफ़ सख़्त कार्रवाई की मांग की और कहा कि आतंकवादी गतिविधियों और उनके सपोर्ट नेटवर्क में शामिल लोगों को जवाबदेह ठहराया जाना चाहिए।इसने चरमपंथ, कट्टरपंथ, संगठित अपराध, मनी लॉन्ड्रिंग और सीमा-पार धोखाधड़ी नेटवर्क के खिलाफ़ गहरे सहयोग का भी आह्वान किया। आर्थिक मोर्चे पर, ब्रिक्स ने गहरे आर्थिक सहयोग और सीमा-पार भुगतान पर बेहतर काम करने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराई। इसमें भुगतान और मैसेजिंग सिस्टम के बीच ‘इंटर – ऑपरेबिलिटी’ (आपसी तालमेल), व्यापार निपटान व निवेश के लिए स्थानीय मुद्राओं के इस्तेमाल को बढ़ावा देना शामिल है। समूह ने सीमा-पार भुगतान को तेज़, सस्ता, ज़्यादा सुलभ, पारदर्शी और सुरक्षित बनाने के प्रयासों का भी समर्थन किया, साथ ही ब्रिक्स आर्थिक साझेदारी 2030 को आगे बढ़ाया। टेक्नोलॉजी, इनोवेशन, स्वास्थ्य, कृषि और जलवायु के प्रति लचीलापन (क्लाइमेट रेजिलिएंस) भी अहम रहे। ब्रिक्स ने (AI) ऐ.आई. को आर्थिक विकास और टिकाऊ विकास के लिए एक बड़ा अवसर माना, साथ ही सुरक्षित, भरोसेमंद व समावेशी ऐ.आई. की मांग की। घोषणापत्र में डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर, कृषि और खाद्य सुरक्षा में सहयोग, मज़बूत एनर्जी सिस्टम, ज़रूरी मिनरल सप्लाई चेन और आपदा की तैयारी को भी बढ़ावा दिया गया। ये सभी बातें शिखर सम्मेलन की व्यापक थीम “लचीलेपन, इनोवेशन, सहयोग और स्थिरता के लिए निर्माण” को दर्शाती हैं। ब्रिक्स ने संयुक्त राष्ट्र सचिवालय और अन्य अंतरराष्ट्रीय संगठनों में समान भौगोलिक प्रतिनिधित्व की मांग की है। समूह का कहना है कि विकासशील देशों का प्रतिनिधित्व लगातार कम रहा है, खासकर वरिष्ठ और निर्णय लेने वाले पदों पर। समूह ने नेतृत्व की भूमिकाओं में महिलाओं, खासकर उभरते बाज़ारों और विकासशील देशों की महिलाओं की ज़्यादा भागीदारी की भी मांग की। इसने कहा कि संयुक्त राष्ट्र के कार्यकारी प्रमुखों और वरिष्ठ अधिकारियों की नियुक्ति पारदर्शिता, समावेशिता और व्यापक भौगोलिक प्रतिनिधित्व पर आधारित होनी चाहिए, जो संयुक्त राष्ट्र चार्टर के अनुच्छेद 101 के अनुरूप हो। ब्रिक्स ने इस बात पर भी ज़ोर दिया कि संयुक्त राष्ट्र United Nations सिस्टम में ऊँचे पदों पर किसी एक देश या देशों के समूह का एकाधिकार नहीं होना चाहिए। घोषणा पत्र में यू.एन. महासचिव के पद पर क्षेत्रीय विविधता की ऐतिहासिक कमी का भी ज़िक्र किया गया। इसमें बताया गया कि इस पद पर कभी कोई महिला नहीं चुनी गई है, जबकि लैटिन अमेरिका और कैरिबियन, अफ्रीका और एशिया से प्रतिनिधित्व सीमित रहा है। ग्लोबल डिप्लोमेसी व ब्रिक्स सम्मिट पर एक इंटरव्यू में, पूर्व विदेश मंत्री सलमान खुर्शीद ने जियो-पॉलिटिकल तनाव के बीच भारत की लीडरशिप भूमिका पर चर्चा की। सलमान खुर्शीद ने इस बात पर ज़ोर दिया कि व्यापक ग्लोबल असर की कोशिश करने से पहले भारत को सदस्य देशों के बीच आपसी मतभेदों को सुलझाने को प्राथमिकता देनी चाहिए। उन्होंने कहा, “जहाँ तक ब्रिक्स का सवाल है, चीज़ों को ठीक करने में भारत की अहम भूमिका है।” उन्होंने ‘मल्टी अलाइनमेंट’ के बजाय ‘नॉन अलाइनमेंट’ (गुटनिरपेक्षता) की स्थायी विचारधारा का समर्थन किया और ‘मल्टी-अलाइनमेंट’ को बचने का एक तरीका बताया। सलमान खुर्शीद ने इंटरनेशनल सम्मिट, पश्चिम के साथ संबंधों में संतुलन बनाने और अमेरिकी चुनावों के बाद ग्लोबल डिप्लोमैटिक बदलावों की तैयारी पर भी बात की। प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि अलग-अलग चुनौतियों से निपटने के लिए ग्लोबल साउथ को “नियम बनाने वाला रूल शेपर” बनना होगा। सम्मेलन में अपने शुरुआती भाषण में, पीएम नरेंद्र मोदी ने कहा कि ब्रिक्स ने वैश्विक मंच पर अपनी एक अलग पहचान बनाई है और यह समूह किसी के खिलाफ़त में नहीं है। इन बातों को अमेरिका व अन्य पश्चिमी देशों के लिए एक संदेश के तौर पर देखा जा रहा है। पीएम मोदी ने कहा, “आज, ग्लोबल साउथ वैश्विक संकटों में तो सबसे आगे खड़ा है, लेकिन फैसले लेने की प्रक्रिया में पीछे है। हमें ‘विशेषाधिकार के पिरामिड’ को ‘साझेदारी के मंच’ में बदलना होगा – एक ऐसा मंच जहाँ हर देश की आवाज़ हो, हर सदस्य की हिस्सेदारी हो, और हर कोशिश के केंद्र में मानवता का विकास हो। इस सिलसिले में, वैश्विक शासन में सुधार के लिए 10 प्रस्ताव तैयार करें, ताकि अगले सम्मेलन तक उन्हें ब्रिक्स सुधार रोडमैप का रूप दिया जा सके।” भारतीय वार्ताकारों ने आम सहमति बनाने में कामयाबी हासिल की, जिससे पता चलता है कि जारी युद्ध से जुड़े पैराग्राफ की शब्दावली को लेकर ईरान, यू.ऐ.ई. और सऊदी अरब के बीच मतभेद सुलझा लिए गए। प्रधान मंत्री मोदी ने ब्रिक्स को संबोधित करते हुए वैश्विक शासन के लिए 10 सूत्रीय प्रस्ताव पेश किया।
“वैश्विक वित्तीय संस्थानों में वोटिंग पावर, नेतृत्व के पद और नीतिगत प्राथमिकताएं आर्थिक हकीकत के आधार पर तय होनी चाहिए। हमें ग्लोबल साउथ को ‘नियम मानने वाले’ (rule takers) से ‘नियम बनाने वाले’ (rule shapers) में बदलना होगा।” ‘आवाज़ से असर तक, विशेषाधिकार से साझेदारी तक – ब्रिक्स के 20 साल का यही संदेश हो सकता है। भारत ने लोगों पर केंद्रित मानवता को प्राथमिकता देने वाला नज़रिया अपनाया है। “लचीलापन, (flexibility) इनोवेशन, सहयोग और सस्टेनेबिलिटी हमारी प्राथमिकताएं रही हैं।” इन प्राथमिकताओं के साथ, नागरिकों से जोड़ने पर खास ज़ोर दिया गया। इसी नज़रिए के साथ, लगभग 30 शहरों में 350 से ज़्यादा बैठकें आयोजित की गई हैं, जिससे हमें आपकी टीमों का भारत में स्वागत करने का मौका मिला है,” श्री मोदी ने आगे कहा। हम किसी के खिलाफ नहीं हैं, बल्कि सबके साथ मिलकर आगे बढ़ने की सोच के साथ काम करते हैं। अगले 20 सालों में हमें एक नए और बड़े एजेंडे पर काम करना है। हमें अपनी कार्य प्रणाली से ही शुरुआत करनी होगी। ब्रिक्स की अध्यक्षता हर साल बदलती है, लेकिन संस्थागत गति धीमी नहीं होनी चाहिए। इंटरनेशनल मीडिया सेंटर में ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में भाग लेने वाले सभी देशों के झंडे लगाए गए हैं, जो इस समूह की विविध सदस्यता और दुनिया भर के नेताओं और प्रतिनिधिमंडलों की उपस्थिति को दर्शाते हैं। रामेश्वरम में मंदिर की पृष्ठभूमि में मोदी ने नेताओं का स्वागत किया। मोदी ने रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन को ‘तिरुक्कुरल’ का रूसी अनुवाद भी भेंट किया – यह महान कवि और दार्शनिक तिरुवल्लुवर द्वारा रचित क्लासिक तमिल कविता संग्रह है। आज, ब्रिक्स में 11 देश शामिल हैं: ब्राज़ील, चीन, मिस्र, इथियोपिया, भारत, इंडोनेशिया, ईरान, रूस, सऊदी अरब, दक्षिण अफ्रीका और यू.ए.ई.। ये सभी सदस्य मिलकर दुनिया की 49.5% आबादी, 40% GDP और 26% व्यापार का प्रतिनिधित्व करते हैं। ये आंकड़े उनकी बड़ी आबादी और मज़बूत आर्थिक स्थिति को दिखाते हैं। सदस्यों की संख्या बढ़ने से एशिया, अफ्रीका, मध्य पूर्व और लैटिन अमेरिका में इसकी भौगोलिक पहुँच भी बढ़ी है। इस विविधता से बड़े बाज़ार, प्राकृतिक संसाधन, तकनीकी क्षमताएँ और विकास के अलग-अलग अनुभव एक साथ आते हैं। रॉयटर्स को बताया कि उभरती अर्थव्यवस्थाओं का समूह ब्रिक्स एक संयुक्त घोषणा पत्र पर सहमत हो गया है। यह सहमति नई दिल्ली में नेताओं के शिखर सम्मेलन शुरू करने से कुछ घंटे पहले बनी, जिसका मकसद इस समूह के वैश्विक प्रभाव को बढ़ाना है। यह सम्मिट गल्फ – खाड़ी विवाद को लेकर सदस्य देशों, ईरान और संयुक्त अरब अमीरात के बीच मतभेदों को दूर करने की उम्मीद के साथ हुई है। यह सम्मिट ऐसे समय में हो रही है जब अमेरिका और ईरान के बीच छह महीने से चल रहे युद्ध में एक-दूसरे पर हमले फिर से शुरू हो गए हैं। भारत के विदेश मंत्रालय ने इस घोषणा-पत्र पर टिप्पणी के अनुरोध का तुरंत कोई जवाब नहीं दिया। (रॉयटर्स Reuters) ब्रिक्स सदस्य देशों के कलाकारों ने संस्कृतियों का ‘संगम’ रचा। भारतीय अवधारणा ‘संगम’ — यानी नदियों का मिलन — से प्रेरित होकर, ब्रिक्स के अलग-अलग सदस्य देशों के कलाकार समिट स्थल पर एक बड़े थीम-आधारित म्यूरल (दीवार पर बनी पेंटिंग) को बनाने के लिए एक साथ आए हैं। यह दोस्ती और संस्कृतियों के मिलन का प्रतीक है।
भारतीय विदेश मंत्रालय (Ministry of External Affairs, Government of India) की सांस्कृतिक शाखा, इंडियन काउंसिल फॉर कल्चरल रिलेशंस ( Indian Council For Cultural Relations ) के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि “ब्रिक्स फ्रेंडशिप म्यूरल प्रोजेक्ट” के तहत तैयार की गई यह शानदार पेंटिंग मुख्य भारत मंडपम बिल्डिंग के अंदर एक दीवार पर लगाई गई है। इसी बिल्डिंग में सम्मिट रूम भी है।इसे “संगम: संस्कृतियों का मिलन” थीम के तहत बनाया गया था और यह ब्रिक्स सदस्य देशों की अलग-अलग कलात्मक परंपराओं को एक साथ लाकर एक साझा सार्वजनिक कलाकृति बनाता है। प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी ने आज संयुक्त अरब अमीरात के क्राउन प्रिंस, शेख खालिद बिन मोहम्मद के साथ द्विपक्षीय बैठक की। इस दौरान उन्होंने रक्षा, अंतरिक्ष, परमाणु ऊर्जा, तकनीक और इनोवेशन जैसे रणनीतिक और उभरते क्षेत्रों में दोनों देशों के बीच सहयोग बढ़ाने के तरीकों पर चर्चा की। नई दिल्ली में 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के दौरान हुई इस बैठक में, दोनों नेताओं ने भारत – यू.ए.ई. (UAE) व्यापक रणनीतिक साझेदारी के महत्व को दोहराया। साथ ही, उन्होंने यू.ए.ई. के राष्ट्रपति, शेख मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान, की जनवरी 2026 में भारत यात्रा और श्री मोदी की मई 2026 में संयुक्त अमीरात यात्रा की सफलता को याद किया। विदेश मंत्रालय ने एक बयान में कहा, “नेताओं ने कई क्षेत्रों में द्विपक्षीय संबंधों में हुई प्रगति को माना।” “उन्होंने यू.ए.ई. की इंटरनेशनल होल्डिंग कंपनी द्वारा ओडिशा में 11.5 अरब डॉलर के इंटीग्रेटेड ग्रीनफील्ड एल्युमीनियम प्रोजेक्ट में निवेश करने की घोषणा का सकारात्मक रूप से संज्ञान लियाश यह भारत का सबसे बड़ा इंटीग्रेटेड एल्युमीनियम निवेश है।” बयान में कहा गया है कि इस प्रोजेक्ट से ओडिशा के एक ग्लोबल एल्युमीनियम मैन्युफैक्चरिंग हब के रूप में स्थापित होने की उम्मीद है। नेताओं ने भारत – यू.ए.ई. साझेदारी को और गहरा करने में यू.ए.ई. के सबसे नए सॉवरेन इन्वेस्टमेंट फंड, ‘L’Imad’ की भूमिका को भी माना। बयान में कहा गया, “नेताओं ने भारत की अध्यक्षता के दौरान सकारात्मक नतीजों का स्वागत किया और सहमति जताई कि दोनों देश साझा हितों और प्राथमिकताओं को आगे बढ़ाने और सहयोग को और मजबूत करने के लिए इस मंच के माध्यम से मिलकर काम करना जारी रखेंगे।” सम्मिट 2026 में ‘इंडिया फ्रेंडशिप मेन्यू’ के साथ पाक-कला कूटनीति (culinary diplomacy) का अनुभव करें, जिसमें ग्लोबल और भारतीय व्यंजन शामिल हैं। नेता ग्लोबल व्यापार विवादों पर चर्चा करेंगें। संयुक्त घोषणा पत्र को लेकर सस्पेंस बना हुआ था कि नई दिल्ली में दो दिवसीय ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में नेता संयुक्त घोषणा पत्र पर आम सहमति बना पाएंगे या नहीं। पश्चिम एशिया संघर्ष को लेकर ईरान व यू.ए.ई. के बीच तीखे मतभेद हैं, जबकि भारत ग्लोबल साउथ को बढ़ती भू-राजनीतिक उथल-पुथल से बचाने की कोशिश कर रहा है। कई राजनयिक सूत्रों ने बताया कि इस मुश्किल मुद्दे पर आम सहमति बनाने के लिए तेज़ी से बातचीत चली, लेकिन साथ ही यह भी कहा कि बातचीत आखिरी समय तक खिंच सकती है, क्योंकि ईरान और यू.ए.ई. दोनों ही अपने रुख पर अड़े हुए हैं। रणनीतिक संतुलन बनाते हुए, नई दिल्ली, इस सम्मिट का इस्तेमाल, आर्थिक विकास के लिए एक पूरक इंजन के तौर पर पेश करने के लिए करना चाहती है। साथ ही, वह अमेरिका और अन्य पश्चिमी ताकतों की संवेदनशीलता का भी ध्यान रख रही है, खासकर व्यापार और ऊर्जा के क्षेत्रों में। चीनी राष्ट्रपति शी व पीएम मोदी की मुलाक़ात को लेकर ‘उम्मीद’: लेखक और बड़े कॉर्पोरेट सलाहकार आर. गोपालकृष्णन ने कहा, “मुझे उम्मीद है कि दिल्ली में ब्रिक्स समिट के दौरान चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग और प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी के बीच होने वाली मुलाक़ात का नतीजा अच्छा निकलेगा”। अपनी नई किताब “चाणक्य और सन त्ज़ु – व्यापार, सोच और यात्रा पर एक बिज़नेस नज़रिए” के सिंगापुर में लॉन्च के दौरान, मिस्टर गोपालकृष्णन ने कहा, “भारत और चीन की सरकारों को काम करने के दायरे और नियम तय करके अपने व्यवसायों को साथ मिलकर काम करने देना चाहिए। सरकारों को ‘लक्ष्मण रेखा’ (रूपरेखा या ढांचा) तय करनी चाहिए और यह बताना चाहिए कि क्या नहीं किया जा सकता है।”