शराब की गिरफ्त में दम तोड़ती जिंदगियां और उजड़ते परिवार

Lives lost and families shattered in the grip of alcohol

डॉ. प्रितम भि. गेडाम

शराबी का नाम आते ही हमारे जहन में सबसे पहले जो छवि उभरती है, वो एक दुर्गुणों से भरपूर गंदे व्यक्ति की, जो नशे की हालत में अपने होश खो चूका है और जीवन को तबाह करने पर तुला हैं। जिसे कोई सम्मान नहीं देना चाहता, हर कोई शराबियों से दूर रहना चाहते है, परिवार के लोग भी अपने पारिवारिक शराबी सदस्य को नफरत की नजर से देखते हैं। खुद शराबी भी कभी अपने बच्चे को शराबी बनता हुआ देखना पसंद नहीं करता। शराब के नशे में आज बाप बेटे की जान लेता है, बेटा माँ-बाप की जान लेता है, ऐसी खबरें अक्सर पढ़ते हैं। इतनी बुरी चीज शराब होती हैं। शराब एक साइकोएक्टिव और जहरीला पदार्थ है और इसकी लत लग सकती हैं। यह जहर धीरे-धीरे मस्तिष्क को कमजोर बनाता है, फिर बाद में शराबी अपने मस्तिष्क पर से नियंत्रण खो देता हैं। इसके बाद मनुष्य खुद के काबू में नहीं रहता और अनुचित कार्य भी करने लगता है, क्योंकि नशे के कारण शराबी अच्छे-बुरे के बीच अंतर करने की क्षमता खत्म कर चूका होता हैं।

आज के आधुनिक युग में नशा तो जैसे फ़ैशन हो गया है, ऐसा महसूस होता हैं। लोगों का नशे के प्रति बढ़ता आकर्षण के कारण आकड़े दर्शाते है कि, भारत का शराब बाजार 2030 के दशक तक दोगुना होने की राह पर हैं। किशोरवयीन छात्र-छात्राएं भी पार्टी के नाम पर शराब पीते हैं। बीच सड़क नशे में धुत होकर तमाशा करते हुए उन्हें हम सोशल मीडिया के माध्यम से देखते रहते हैं। नए साल, होली या बर्थडे पार्टी के नाम होनेवाली युवाओं की नशा पार्टी के वीडियो खूब वायरल होते है, न कपड़ों की सुध होती है, न संस्कारों की, केवल मदहोशी की मस्ती छायी होती हैं। कम उम्र के बच्चे भी शराब के आदी हो रहे है, जिस कारण समाज में बाल आपराधिक घटनाएं अत्यधिक बढ़ी हैं।

देश में तेजी से अपराध का ग्राफ बढ़ रहा हैं। अभी अपराधों में कम उम्र के युवा ज्यादा नजर आते है, बलात्कार, खून, डकैती जैसे गंभीर अपराधों में भी नाबालिगों की संख्या बेहद हैं। नशे से अपराध बढ़ते हैं। अधिकतम अपराध नशे के लिए या नशे की हालत में किये जाते हैं। अधिकतम अपराधी किसी न किसी प्रकार का नशा जरूर करते हैं। हमारे समाज में शराब बेहद आसानी से मिलनेवाला नशा है, जिस तक किसी की भी सहज पहुंच होती हैं। पिछड़े इलाके, कम शिक्षित वर्ग, ग्रामीण क्षेत्रों में देशी शराब बनाने के अवैध भट्टियों की खबरें भी बहुत दिखती हैं। नकली जहरीली शराब का मार्केट भी लगातार फलफूल रहा है, जबकि बड़ी संख्या में नकली जहरीली शराब पीकर मौत होने की दुर्घटना लगातार होती हैं। शराब की अवैध तस्करी का जाल तेजी से बढ़ ही रहा हैं।

विश्व स्वास्थ्य संगठन अनुसार, दुनिया भर में, 2019 में शराब पीने की वजह से लगभग 26 लाख लोगों की मौत हुई। अनुमान के मुताबिक, 40 करोड़ लोग शराब से जुड़ी समस्याओं से जूझ रहे थे। इनमें से 20.9 करोड़ लोग शराब पर निर्भर थे। साल 2019 में शराब द्वारा दिल की बीमारियों से अनुमानित 4,74,000 लोगों की मौत हुई। शराब पीने से कई तरह के कैंसर का खतरा बढ़ जाता है, जिनमें ब्रेस्ट, लिवर, सिर और गर्दन, एसोफेजियल और कोलोरेक्टल कैंसर शामिल हैं। साल 2019 में दुनिया भर में पाए गए कैंसर के मामलों में से 4.4 फीसदी मामले एवं कैंसर से हुई 4,01,000 मौतें शराब पीने की वजह से हुईं। शराब से जुड़ी बीमारियों का एक बड़ा हिस्सा सड़क दुर्घटनाओं से भी होता हैं। शराब पीकर वाहन चलाने पर दुर्घटना होने की प्रबल संभावना रहती है, जिसमें मौतें तो होती ही हैं, लेकिन दुर्घटनाओं में अनेको को जीवनभर के लिए दिव्यांगता का सामना भी करना पड़ता हैं। साल 2019 में शराब से जुड़ी सड़क दुर्घटनाओं में कुल 2,98,000 मौतें हुईं, जिनमें से 1,56,000 मौतें किसी अन्य व्यक्ति द्वारा शराब पीने की वजह से हुईं। अकेले अमेरिका में हर साल शराब से जुड़ी वजहों से लगभग 88,000 लोगों की मौत होती है। जिसे रोका जा सकता हैं।

भारत सरकार के सामाजिक न्याय व अधिकारिता मंत्रालय के नशा मुक्त भारत अभियान अंतर्गत 2018 के रिसर्च रिपोर्ट में बताया गया था कि, देश में लगभग 16 करोड़ व्यक्ति शराब का सेवन करते हैं इनमें से 5.7 करोड़ से अधिक व्यक्ति हानिकारक या आश्रित शराब के सेवन से प्रभावित हैं और उन्हें शराब के सेवन की समस्याओं के लिए जल्द मदद की ज़रूरत हैं। 2016 में पूरे भारत में शराब पीने की वजह से लिवर सिरोसिस से लगभग 140600 लोगों की मौत हुई। शराब पीने वाले लगभग सभी लोगों को फैटी लिवर की समस्या हो जाती है, जो शराब छोड़ देने पर ठीक हो सकती हैं।

भारत में शराब पर ज़्यादा टैक्स, आबकारी शुल्क, लाइसेंस फीस और दूसरे टैक्स लगते हैं, जिनसे देश भर की राज्य सरकारों को बहुत ज़्यादा रेवेन्यू मिलता हैं। शराब से जुड़े टैक्स से होने वाला कुल सालाना रेवेन्यू 2025-26 में 2 लाख करोड़ रूपये से ज़्यादा होने का अनुमान रहा। लेकिन शराब द्वारा होनेवाला देश का नुकसान इससे कही ज्यादा गुना बड़ा हैं। रिसर्च कहता है कि, भारत में शराब पीने से होने वाली मौतों के कारण 2011 से 2050 के बीच कम से कम 25.8 करोड़ जीवन-वर्षों का नुकसान होगा और शराब की बिक्री से मिलने वाले टैक्स को घटाने के बाद भी शराब से जुड़ी स्वास्थ्य समस्याओं के कारण 2050 तक भारतीय समाज पर 97,895 अरब रुपये का कुल आर्थिक बोझ पड़ेगा, जो कि जीडीपी के 1.45 फीसदी औसत नुकसान के बराबर हैं। अध्ययन में पाया गया कि, शराब से जुड़ी बीमारियों के इलाज का स्वास्थ्य व्यवस्था पर अनुमानित आर्थिक बोझ 3,127 अरब रुपये होगा। शराब का सामाजिक बोझ – जिसमें स्वास्थ्य व्यवस्था का खर्च, अपनी जेब से किया गया खर्च और प्रोडक्टिविटी का नुकसान शामिल है, अर्थात 121,364 अरब रुपये आंका गया।

परिवार के मुखिया पर घर की जिम्मेदारी, बच्चों की शिक्षा, भरणपोषण, अभिभावकों की सेवा, उनकी हर तरह की आवश्कताओं को पुरा करना होता है, अगर वही मुखिया शराब के नशे में डूबने लगे तो, वह खुद के साथ परिवार, समाज और देश के लिए परेशानी का सबब बन जाता हैं। एक बार किसी को नशे की लत लग जाये तो नशेड़ी अपनी लत पूरी करने के लिए उचित-अनुचित सभी काम करने लगता हैं। शारीरिक, मानसिक स्वास्थ्य खराब होता है, पारिवारिक, सामाजिक, आर्थिक स्थिति पर बुरा असर होता हैं। समाज में समस्याएं तेजी से बढ़ती है और विकास में रुकावटें निर्माण होती हैं। स्वस्थ और खुशहाल ज़िंदगी पाने के लिए सबने नशे को “ना” कहना है, मानसिक या शारीरिक सेहत मजबूत बनाना हैं। अगर देश नशा मुक्त होता है तो, अपराध जगत का आधारस्तंभ ही खत्म हो जायेगा क्योंकि नशा और अपराध एक ही सिक्के के दो पहलू हैं। बीमारियां, अपराध, दुर्घटनाएं, वादविवाद बेहद कम हो जायेंगे। लोगों में डर का माहौल खत्म होगा, समाज में समरसता आएगी, संस्कारशील समाज का निर्माण होगा। जीवन में खुशियाँ बढ़ेंगी और देश के विकास को गति मिलेगी। जीवन अनमोल है, नशामुक्त भारत अभियान अंतर्गत नशामुक्ति के लिए 14446 पर संपर्क करें। नशा छोड़े, सुखी जीवन से नाता जोड़ें।