केंद्र की राजनीति में नीतीश, बिहार बेटे के हवाले !

Nitish in central politics, Bihar handed over to his son!

अजय कुमार

बिहार के लंबे समय से मुख्यमंत्री नितीश कुमार ने राज्यसभा का रास्ता पकड़ लिया है। उनकी जीत निश्चित मानी जा रही है क्योंकि जनता दल यूनाइटेड के पास पर्याप्त विधायक संख्या है। इस फैसले ने पार्टी में भारी हलचल मचा दी है। कार्यकर्ता जगह-जगह प्रदर्शन कर रहे हैं और नितीश को ही मुख्यमंत्री बनाए रखने के नारे लगा रहे हैं। मुख्यमंत्री आवास के बाहर सैकड़ों समर्थक इकट्ठा हो गए और उन्होंने साफ कहा कि नितीश के अलावा कोई स्वीकार्य नहीं। जनता दल यूनाइटेड के कार्यकर्ताओं का गुस्सा सड़कों पर उतर आया है। पटना में मुख्यमंत्री आवास का घेराव किया गया और हिलसा के विधायक को भी रोक लिया गया। कार्यकर्ताओं का आरोप है कि कुछ लोग साजिश रच रहे हैं।पार्टी नेता विजय चौधरी ने कहा कि राज्यसभा जाने का फैसला नीतीश का अपना है। उन्होंने कार्यकर्ताओं से संयम बरतने की अपील की लेकिन हलचल थमने का नाम नहीं ले रही। एक तरफ युवा कार्यकर्ता निशांत कुमार के प्रवेश का स्वागत कर रहे हैं वहीं पुराने साथी नीतीश की विदाई से दुखी हैं।
नीतीश ने फेसबुक पर लिखा कि संसदीय जीवन से ही राज्यसभा सदस्य बनने की इच्छा थी। उन्होंने बिहारवासियों को भरोसा दिलाया कि विकसित बिहार बनाने का संकल्प कायम रहेगा और नई सरकार को पूरा सहयोग देंगे। कई लोग इसे बीजेपी की दबाव की राजनीति का नतीजा बता रहे हैं। गठबंधन में भाजपा की संख्या अधिक होने से नया मुख्यमंत्री उनका हो सकता है। सम्राट चौधरी या नित्यानंद राय जैसे नाम चर्चा में हैं। लेकिन दूसरा पहलू परिवार को मजबूत करने का लगता है। नीतीश की उम्र सत्तर पार कर चुकी है और स्वास्थ्य समस्याएं लगातार घेरे रहती हैं। मेदांता अस्पताल में रूटीन चेकअप की खबरें आती रहती हैं। ऐसे में इंजीनियर बेटे निशांत को बिहार राजनीति में स्थापित करने की तैयारी है। पार्टी नेता श्रवण कुमार ने कहा कि युवाओं की मांग पर निशांत का प्रवेश तय हो गया। एक-दो दिन में घोषणा होगी। निशांत को डिप्टी मुख्यमंत्री बनाने की चर्चा तेज है ताकि बिहार में जड़ें मजबूत हों। भाजपा नेता दिलीप जायसवाल ने भी नई पीढ़ी के प्रवेश का स्वागत किया।

नितीश के राज्यसभा जाने से बिहार की सियासत पूरी तरह बदल जाएगी। एनडीए में भाजपा का दबदबा बढ़ेगा और शायद पहली बार भाजपा का मुख्यमंत्री बने। जेडीयू का प्रभाव कम होगा लेकिन निशांत के नेतृत्व से नई ऊर्जा आएगी। विपक्षी दल जैसे राष्ट्रीय जनता दल को मौका मिलेगा। वे वंशवाद का आरोप लगाकर हमला बोलेंगे क्योंकि नीतीश हमेशा वंशवाद के खिलाफ रहे। लेकिन युवा मतदाता निशांत को स्वीकार कर सकते हैं क्योंकि वे शिक्षित और तकनीकी पृष्ठभूमि के हैं। केंद्र में नितीश की भूमिका मजबूत होगी। वे सामाजिक न्याय और विकास के मुद्दों पर बोल सकेंगे। बिहार को केंद्र से अधिक फंड मिलने की संभावना बढ़ेगी। लेकिन राज्य में अस्थिरता आ सकती है अगर कार्यकर्ताओं का विरोध बढ़ा। नया मुख्यमंत्री चुनने की प्रक्रिया तेज होगी। भाजपा विधायक दल नेता सम्राट चौधरी मजबूत दावेदार हैं जिनके पास वित्त और गृह जैसे विभाग हैं। विजय चौधरी भी दौड़ में हैं। निशांत डिप्टी बनकर संतुलन बनाए रखेंगे। यह बदलाव लंबी रणनीति का हिस्सा लगता है। नितीश राष्ट्रीय स्तर पर सक्रिय रहेंगे जबकि बिहार में नई पीढ़ी सत्ता संभालेगी। कार्यकर्ताओं को मनाने के लिए पार्टी मंथन कर रही है। आने वाले दिनों में साफ हो जाएगा कि बिहार की कुर्सी किसकी होगी।