तनवीर जाफ़री
पंजाब राज्य का भारतीय कृषि उत्पादन और देश की खाद्य सुरक्षा में सबसे अहम योगदान है। भारत के कुल भौगोलिक क्षेत्र का मात्र 1.5% हिस्सा होने के बावजूद, पंजाब को ‘भारत का अन्न भंडार’ और ‘भारत की खाद्य टोकरी’ कहा जाता है। भारत सरकार द्वारा ख़रीदे जाने वाले कुल गेहूं का लगभग 46% हिस्सा अकेले पंजाब से आता है। केंद्रीय पूल में जमा होने वाले कुल चावल के सरकारी उपार्जन में भी पंजाब का लगभग 31% योगदान है। देश के कुल खाद्यान्न उत्पादन में पंजाब 13 से 14 प्रतिशत का योगदान देता है। गेहूं उत्पादन का लगभग 14% से 22% हिस्सा पंजाब में उगता है, जो इसे देश के शीर्ष उत्पादकों में बनाए रखता है। इसी तरह पंजाब देश के चावल उत्पादन का लगभग 10% से 11% हिस्सा पैदा करता है। भारत के कुल दूध उत्पादन में भी पंजाब लगभग 6.2% से 10% का योगदान देता है। इसी तरह देश के शहद उत्पादन में भी पंजाब का योगदान क़रीब 20% और मशरूम उत्पादन में रिकॉर्ड 48% है। पंजाब की यह सफलता उसकी फ़सल सघनता के कारण है, जो 186% से भी अधिक है। राज्य का लगभग 82% से 87% भूभाग खेती के अंतर्गत आता है, जबकि राष्ट्रीय औसत केवल 40% है। यही कारण है कि प्रति हेक्टेयर उत्पादन के मामले में पंजाब के किसान देश में अग्रणी बने हुए हैं और देश की भुखमरी मिटाने में सबसे आगे खड़े हैं।
परन्तु दुर्भाग्यवश कृषि उत्पादन से लेकर लंगर चलाने व ज़रूरतमंदों की मदद के लिये अग्रणी रहने वाले इस राज्य को विगत कुछ वर्षों से मात्र ‘नशे ‘ को लेकर बदनाम करने की बड़ी साज़िश रची जा रही है। चूँकि पंजाब की 17 वीं विधानसभा चुनाव फरवरी 2027 में कराए जाने की पूरी संभावना इसीलिये चुनाव पूर्व विभिन्न राजनैतिक दल पंजाब में कथित तौर पर व्याप्त नशे की समस्या को एक प्रमुख राजनैतिक मुद्दा बना रहे हैं। मिसाल के तौर पर भारतीय जनता पार्टी ने हाल ही में राज्य की सभी 117 विधानसभा सीटों पर 13 दिवसीय ‘नशा मुक्त पंजाब यात्रा’ निकाली और नशे को ही राज्य का अपना मुख्य चुनावी एजेंडा घोषित किया। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने पिछले दिनों जालंधर में यह घोषणा की, कि यदि पंजाब में भाजपा की सरकार बनती है, तो 31 दिसंबर 2029 तक पंजाब को पूरी तरह से नशे के कारोबार से मुक्त कर दिया जाएगा। उन्होंने राज्य की भगवंत मान सरकार को ‘आपदा’ सरकार क़रार देते हुये यह आरोप लगाया कि आम आदमी पार्टी ने राज्य में सिंथेटिक ड्रग्स के अवैध कारोबार को खुलेआम फलने-फूलने दिया है। जबकि ‘आप’ नेताओं का कहना है कि केंद्र सरकार पंजाब को बदनाम कर रही है। ‘आप’ नेताओं ने गुजरात जैसे राज्यों के बंदरगाहों पर पकड़े जाने वाले भारी मात्रा में नशीले पदार्थों का हवाला देते हुए केंद्र की सीमा सुरक्षा की विफलता पर सवाल उठाए हैं। केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने वादा किया है कि सत्ता में आने के 6 महीने के भीतर पंजाब के पूरे ड्रग नेटवर्क को ध्वस्त कर दिया जाएगा और नशे के व्यापारियों को जेल भेजा जाएगा। पंजाब में कथित तौर पर फैले नशा नेटवर्क को लेकर बनाई गई फ़िल्म ‘उड़ता पंजाब’ ने और भी इस विषय को प्रमुखता से कुछ इसतरह प्रचारित कर दिया गोया देश का कृषि प्रमुख व भारतीय अर्थव्यवस्था में कृषि के माध्यम से अपना अतुलनीय योगदान देने वाला देश का यही इकलौता राज्य है जो नशे में डूबा हुआ है।राजनीतिक दल भी एक-दूसरे को घेरने के लिए इस मुद्दे को कुछ इस तरह उछाल रहे हैं मानो पंजाब का हर दूसरा नागरिक नशेड़ी हो। जो कि तथ्यात्मक रूप से पूरी तरह ग़लत व निराधार है।
जब हम राष्ट्रीय सन्दर्भ में पंजाब पर लगने वाले इसी ‘लांछन’ व काले धब्बे का जायज़ा लेने की कोशिश करते हैं तो हमें आंकड़ों के अनुसार यह पता चलता है कि अरुणाचल प्रदेश राज्य शराब की खपत में देश में सबसे आगे है। यहाँ लगभग 53% पुरुष और 24% महिलाएं शराब का सेवन करती हैं। इसी तरह छत्तीसगढ़ और त्रिपुरा राज्यों में भी शराब की खपत का प्रतिशत अन्य राज्यों की तुलना में काफ़ी अधिक है। जबकि अफ़ीम के सेवन में मिज़ोरम का नाम देश में सबसे आगे आता है। इसी तरह भांग व गांजे की चपेट में आने वाले सबसे अधिक आबादी वाले राज्यों में उत्तर प्रदेश और बिहार का नाम सर्वोपरि आता है। जबकि हशीश व चरस जैसे शेन के लिये हिमाचल के कसौल व मलाना जैसे इलाक़ों को सबसे प्रमुख माना जाता है। इस इलाक़े में तो लाखों की संख्या में विदेशी विशेषकर इस्राईली नागरिक स्थायी रूप से यहाँ रहकर न केवल नशा करते हैं बल्कि इसके कारोबार में भी शरीक हैं। कसोल- मलाना का यह नेटवर्क गोवा तक फैला हुआ है। हाँ,पंजाब में अफ़ीम की श्रेणी से जुड़े नशों का इस्तेमाल इस समय ज़्यादा ज़रूर हो रहा है, जिनमें ‘चिट्टा’ जोकि हेरॉइन और सिंथेटिक ड्रग्स का मिश्रण है, यह सबसे ख़तरनाक है। इसके अलावा पारंपरिक तौर पर भुक्की व अफ़ीम का चलन भी तेज़ी से बढ़ा है। परन्तु सवाल यह है कि जिस सिख बाहुल्य राज्य में जहाँ की बड़ी आबादी धूम्रपान को भी वर्जित समझती हो और कई शहरों,क़स्बों व गांवों में तो बीड़ी,सिगरेट व तम्बाकू भी आसानी से उपलब्ध न हो उस समाज से जुड़े लोग आख़िर नशे की गिरफ़्त में कैसे आ गये ?
दरअसल जो पंजाब कभी हरित क्रांति के कारण बहुत समृद्धि था वह पिछले कुछ दशकों में खेती से आमदनी घटने, उद्योगों की कमी और शिक्षित युवाओं में बेरोज़गारी बढ़ने के कारण निराशा में डूबता जा रहा है। दूसरी बात यह कि पंजाब के युवाओं में अमेरिका,कनाडा,यू के और ऑस्ट्रेलिया आदि देशों में जाने की भारी होड़ लगी रहती है। परन्तु जिन युवाओं का वीज़ा नहीं लग पाता या जो असफल हो जाते हैं अथवा ठगे जाते हैं , वे मानसिक तनाव और अवसाद के कारण भी नशे की लत का शिकार हो रहे हैं। जहाँ तक नशीली सामग्री की उपलब्धता का सवाल है तो पंजाब की पाकिस्तान के साथ क़रीब 553 किलोमीटर लंबी अंतर्राष्ट्रीय सीमा लगती है। अफ़ग़ानिस्तान और पाकिस्तान से होने वाली ड्रग्स की तस्करी के लिए पंजाब एक ‘ट्रांज़िट रूट’ बन जाता है। हाल के दिनों में तो तस्करों द्वारा सीमा पार से ड्रोन के ज़रिए नशीले पदार्थों की सप्लाई करने के मामलों में भी बढ़ोत्तरी हुई है। निश्चित रूप से सीमा पार से आने वाली नशीले सामान की खेप को रोकने की ज़िम्मेदारी केंद्र सरकार व उसके अधीनस्थ सुरक्षा बालों की है। इसके अलावा पिछले कुछ वर्षों में नशीले पदार्थों की कई बड़ी खेप देश के विभिन्न बंदरगाहों पर पकड़ी गई हैं। गृह मंत्रालय द्वारा संसद में दी गई जानकारी के अनुसार, वर्ष 2020 से 2024 के बीच ही देश के बंदरगाहों पर 11,311 करोड़ रूपये से अधिक मूल्य के ड्रग्स ज़ब्त किए गए, जिनमें से अधिकांश मामले गुजरात और महाराष्ट्र के बंदरगाहों पर सामने आए हैं। इनमें एक मुंद्रा बंदरगाह भी है। जिस का स्वामित्व और संचालन अडानी ग्रुप की कंपनी अडानी पोर्ट्स एंड स्पेशल इकोनॉमिक ज़ोन के पास है। इसके अलावा मुंबई के न्हावा शेवा पोर्ट, तमिलनाडु के तूतीकोरिन बंदरगाह, गुजरात के पीपावाव व कांडला बंदरगाह, तथा कोलकाता बंदरगाह से भी नशीले पदार्थों की बड़ी खेप पकड़ी जाती रही हैं।
निःसंदेह पंजाब में फैली नशे की समस्या का राजनीतिकरण और इसका सनसनीखेज़ प्रदर्शन व प्रचार अन्य राज्यों की तुलना में बहुत ज़्यादा हुआ है। अनेक फ़िल्मों और गानों में भी पंजाब को अक्सर ‘नशे की राजधानी’ के रूप में बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया गया है । इससे पूरे राज्य और वहाँ के मेहनती युवाओं की एक वैश्विक छवि ख़राब हुई। वास्तव में पंजाब नशे को लेकर ‘ इस समय ‘बद अच्छा बदनाम बुरा’ की कहावत का शिकार है।





