पूरा ध्यान एशियन चैंपियंस ट्रॉफी हॉकी में खेलने के लिए मिले मौके पर : कृष्ण बहादुर पाठक

Full focus on getting the opportunity to play in Asian Champions Trophy Hockey: Krishna Bahadur Pathak

सत्येन्द्र पाल सिंह

नई दिल्ली : नेपाली मूल के पंजाब के अनुभवी हॉकी गोलरक्षक कृष्ण बहादुर पाठक ने एफआईएच हॉकी विश्व कप और एशियाई खेलों सहित लंबे समय तक टीम से बाहर रहने के बाद 27 अक्टूबर से 5 नवंबर तक जालंधर व मोहाली में होने वाली पुरुष एशियन चैंपियंस ट्रॉफी हॉकी,पंजाब 2026 से भारत की 18 सदस्यीय टीम में वापसी की है। भारत को लगातार दो ओलंपिक में कासा जिताने वाले अब अपनी हॉकी ‘टांग’ चुके गोलरक्षक पीआर श्रीजेश के साथ करीब पांच बरस खेलने के बाद कृष्ण बहादुर पाठक को उनके ढीले प्रदर्शन के चलते भारतीय हॉकी टीम से बाहर कर उनकी जगह मोहित शशिकुमार को भारतीय टीम में शामिल किया गया था। मोहित के भी उम्मीदों पर खरा न उतरने पर भारतीय टीम से बाहर करने और उनकी जगह बिना कोई खास प्रदर्शन किए कृष्ण बहादुर पाठक की टीम में वापसी सवाल खड़े करती है।

संभवत: फिलहाल उनके अनुभव के चलते एशियन चैंपियंस ट्रॉफी के पंजाब में होने पर ही उन्हे भारतीय टीम में जगह मिल पाई है।

भारतीय हॉकी टीम ने हरमनप्रीत सिंह की कप्तानी में एफआईएच हॉकी विश्व कप में आठवें स्थान पर रहने के बाद हरमनप्रीत सिंह की अगुआई में काकामिगहारा (जापान) में लागतार दूसरी बार एशियाई खेलो में स्वर्ण पदक जीता है। 29 वर्षीया गोलरक्षक कृष्ण बहादुर पाठक भारत के लिए आखिरी बार दिसंबर 2025 में दक्षिण अफ्रीकी दौरे पर खेले थे। भारत के लिए, 156 अंतर्राष्ट्रीय हॉकी मैच खेल चुके कृष्ण बहादुर पाठक ने कहा, मुझे नहीं लगता कि मेरे लिए अब एशियन चैंपियंस ट्रॉफी हॉकी में खेलने से बड़ा और कुछ हो सकता है। यह मौका देने के लिए मैं हॉकी इंडिया पंजाब सरकार का आभार जताता हूं। मैं भारत की डेवलपमेंट हॉकी टीम के साथ बेंगलुरू में था और वहां कोच ने मेरी गोलकीपिंग बेहतर करने के लिए जो कुछ भी बताया मैं उस पर मेहनत कर रहा हूं। मेरा मानना है कि मैंने वह वह सब कुछ कर लिया जो कोच ने मुझे बताया। अब मेरा पूरा ध्यान एशियन चैंपियंस ट्रॉफी हॉकी में खेलने के लिए मौके पर है। मेरे और मेरे साथ सुरजीत हॉकी एकेडमी, जालंधर में खेल चुके मौजूदा भारतीय हॉकी टीम खिलाड़ियों के लिए एशियन चैंपियंस ट्रॉफी हॉकी इसलिए खासहै क्योंकि हम सभी उसी मैदान पर खेलेंगे, जिसमें हम सभी ने सात बरस तक अपना हॉकी का कौशल निखारा। हमने भारत की डेवलपमेंट हॉकी टीम के लिए कर्नाटक की सीनियर हॉकी टीम के खिलाफ बेंगलुरू में मैच खेले। मैचों और टीम की ट्रेनिंग की टीम के अलावा हमने अतिरिक्त गोलकीपिंग सेशन भी किए जिससे कि मैं उन चीजों पर मेहनत कर सकूं जिनमें मुझे बतौर गोलरक्षक सुधार करने को कहा गया था।‘